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Tribal Family Social Boycott: सामुदायिक व्यवस्था किसी समाज की पहचान हो सकती है, लेकिन जब वही व्यवस्था किसी परिवार के जीवन, सम्मान और आजीविका पर संकट बन जाए तो सवाल उठना स्वाभाविक है. मामला पाकुड़ का है जहां बेटे की शादी में व्यस्त रहने के कारण अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए एक आदिवासी परिवार और उससे जुड़े 15 परिवारों का पंचायत ने सामाजिक बहिष्कार कर दिया. गांव में हुक्का-पानी, रोजगार और सामाजिक संबंधों तक पर रोक लगाने के आरोप ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है.
अंतिम संस्कार में शामिल न होने पर आदिवासी परिवार पर 2 लाख जुर्माना और सामाजिक बहिष्कार
पाकुड़. झारखंड के पाकुड़ जिले से सामाजिक बहिष्कार और कथित पंचायत फरमान का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है. आरोप है कि एक आदिवासी परिवार के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाने पर पंचायत ने न सिर्फ पूरे परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया, बल्कि उससे जुड़े 15 परिवारों को गांव से सामाजिक रूप से अलग-थलग करने का फैसला भी सुना दिया. पीड़ित परिवार का कहना है कि शादी की व्यस्तता के कारण वे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके थे, लेकिन इसके बाद जिस तरह का दबाव बनाया गया, उसने पूरे परिवार को भय और असुरक्षा में डाल दिया है. परिवार का आरोप है कि गांव की पंचायत ने उन्हें समाज से काट देने जैसा फैसला सुना दिया. गांव के कुएं से पानी लेने, दुकानों से सामान खरीदने और मजदूरी करने तक पर रोक लगाने के आरोप ने पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है. पीड़ित परिवार का कहना है कि अब उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा और रोजी-रोटी दोनों की चिंता सताने लगी है.
अंतिम संस्कार में शामिल न होने से शुरू हुआ विवाद
मामला पाकुड़ जिले के मालपहाड़ी ओपी थाना क्षेत्र के सुन्दरापहाड़ी गांव का है. यहां के निवासी चुड़का टुडू ने उपायुक्त मेघा भारद्वाज और पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह को दिए आवेदन में बताया कि 12 मई को उनके बेटे सूरज टुडू की शादी थी. पूरा परिवार शादी की तैयारियों और कार्यक्रमों में व्यस्त था. इसी दौरान गांव के एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई और 13 मई को उसका अंतिम संस्कार किया गया. परिवार का कहना है कि शादी की व्यस्तता के कारण उन्हें अंतिम संस्कार की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी, जिसके चलते वे वहां शामिल नहीं हो पाए. इसी बात को लेकर गांव में विवाद शुरू हो गया.
300 लोगों की बैठक में 15 परिवारों का बिटलाहा का फैसला
आरोप के अनुसार 16 और 17 मई को गांव में करीब 300 लोगों की बैठक बुलाई गई. इस बैठक में चुड़का टुडू से जुड़े 15 परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला लिया गया. पंचायत ने कथित तौर पर फरमान जारी किया कि ये परिवार गांव के कुएं से पानी नहीं ले सकेंगे, दुकानों से सामान नहीं खरीद सकेंगे और ग्रामीण उनसे किसी प्रकार का संबंध नहीं रखेंगे. पंचायत के फैसले के बाद इन परिवारों को गांव में मजदूरी और किसी भी तरह का रोजगार करने से भी रोक दिया गया. इससे पूरे परिवार पर आजीविका का संकट मंडरा रहा है.
2 लाख जुर्माना, 40 बीघा जमीन कब्जे और जान से मारने की धमकी
पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि पंचायत की ओर से उन पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. जुर्माना नहीं देने पर उनकी 40 बीघा कृषि भूमि पर कब्जा करने की धमकी दी गई. साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि अगर उन्होंने पुलिस या प्रशासन से शिकायत की तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा. इन धमकियों से भयभीत परिवार ने प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है. चुड़का टुडू का कहना है कि वे बेगुनाह हैं और केवल शादी की व्यस्तता के कारण अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके थे.
पुलिस जांच के लिए टीम गठित, बाइट से करेंगे तथ्य स्पष्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है. एसपी अनुदीप सिंह ने बताया कि मामले की जांच के लिए पाकुड़ एसडीपीओ दयानंद आजाद के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई है, जिसमें मुफस्सिल थाना प्रभारी भी शामिल हैं. यह टीम पूरे प्रकरण की जांच कर रही है. पुलिस ने कहा है कि जांच के बाद आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस मामले में एएसआई मंगल किस्कू की बाइट और पीड़ित चुड़का टुडू की बाइट के आधार पर भी तथ्यों को परखा जाएगा.
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