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TMC के 30 MLAs से छिनी सुरक्षा, लेकिन दीदी की MP को मिला Y श्रेणी प्रोटेक्शन

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Kakoli Ghosh Dastidar Gets Y Category Security: केंद्र ने TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार को IB रिपोर्ट के बाद CISF की Y कैटेगरी सुरक्षा दी गई है. पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं की सुरक्षा कटौती के बीच इसे बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है.

TMC के 30 MLAs से छिनी सुरक्षा, लेकिन दीदी की MP को मिला Y श्रेणी प्रोटेक्शनZoom

केंद्र सरकार ने टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार को Y श्रेणी सुरक्षा दी है. फोटो- पीटीआई

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद सुरक्षा को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया है. एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेताओं और विधायकों की सुरक्षा में कटौती की खबरें चर्चा में हैं, वहीं दूसरी तरफ काकोली घोष दस्तीदार को केंद्र सरकार ने ‘Y’ कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान कर दी है. इस फैसले ने बंगाल की सियासत में नई बहस छेड़ दी है.

केंद्र सरकार ने वरिष्ठ टीएमसी नेता और लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार को CISF की सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराई है. अधिकारियों के मुताबिक यह सुरक्षा 19 मई से लागू कर दी गई है. यह फैसला गृह मंत्रालय द्वारा इंटेलिजेंस ब्यूरो की थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर लिया गया.

क्या होती है Y कैटेगरी सुरक्षा?

‘Y’ कैटेगरी सुरक्षा भारत में वीआईपी सुरक्षा की अहम श्रेणियों में गिनी जाती है. इसमें आमतौर पर 24 घंटे सुरक्षा के लिए हथियारबंद जवानों की टीम तैनात रहती है. खतरे के स्तर के अनुसार सुरक्षाकर्मियों की संख्या तय की जाती है. इस बार खास बात यह है कि काकोली घोष दस्तीदार को यह सुरक्षा सीआईएसएफ के जरिए दी गई है. सीआईएसएफ आमतौर पर एयरपोर्ट, मेट्रो, परमाणु संयंत्र और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए जानी जाती है, लेकिन खतरे के आकलन के आधार पर यह हाई-प्रोफाइल नेताओं को भी सुरक्षा देती है.

कौन हैं काकोली घोष दस्तीदार?

काकोली घोष दस्तीदार पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC का बड़ा चेहरा मानी जाती हैं. वह राज्य की बारासात लोकसभा सीट से सांसद हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन तथा संसदीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं. टीएमसी की ओर से वह कई राष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर आवाज रही हैं. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती है. संसद में भी वह कई बार स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखती रही हैं.

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ टीएमसी नेताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है. ऐसे में केंद्र द्वारा काकोली घोष दस्तीदार को सुरक्षा दिए जाने को सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है.

30 विधायकों की सुरक्षा कटौती की चर्चा क्यों?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदली हैं. सूत्रों के मुताबिक चुनाव के बाद कई TMC नेताओं और करीब 30 विधायकों की सुरक्षा में कटौती या समीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई थी. ऐसे माहौल में काकोली घोष दस्तीदार को ‘Y’ कैटेगरी सुरक्षा मिलना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. विपक्षी दल इसे केंद्र की सेलेक्टेड सुरक्षा नीति बता रहे हैं, जबकि अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा केवल खतरे के आकलन के आधार पर दी जाती है.

IB रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला

सूत्रों के मुताबिक इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट में काकोली घोष दस्तीदार के लिए संभावित सुरक्षा खतरे का जिक्र किया गया था. इसके बाद गृह मंत्रालय ने उनकी सुरक्षा प्रोफाइल की समीक्षा की और CISF सुरक्षा मंजूर कर दी. अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि सुरक्षा व्यवस्था स्थायी नहीं होती. समय-समय पर खतरे के स्तर की समीक्षा की जाती है. अगर भविष्य में खतरा बढ़ता या घटता है तो सुरक्षा श्रेणी में बदलाव भी किया जा सकता है.

बंगाल की राजनीति में नया संदेश?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में बदलते सत्ता समीकरण के बीच सुरक्षा अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है. एक ओर TMC लगातार अपने नेताओं पर राजनीतिक दबाव और सुरक्षा खतरे की बात करती रही है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि सुरक्षा का फैसला केवल इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर लिया जाता है. हालांकि, काकोली घोष दस्तीदार को मिली ‘Y’ कैटेगरी सुरक्षा ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में सुरक्षा और राजनीतिक टकराव दोनों बड़े मुद्दे बने रह सकते हैं.



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