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झारखंड में ऐतिहासिक सरेंडर की तैयारी, मुख्यधारा में लौटेंगे 25 नक्सली! सारंडा...


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सारंडा जंगल में करीब 25 नक्सलियों के सामूहिक सरेंडर की तैयारी, आईजी ऑपरेशन नरेंद्र सिंह ने कहा नक्सल नेटवर्क लगभग खत्म, सुरक्षा बलों की चौतरफा घेराबंदी

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झारखंड में ऐतिहासिक सरेंडर की तैयारी, मुख्यधारा में लौटेंगे 25 नक्सली!Zoom

झारखंड में 25 नक्सलियों के एक साथ सरेंडर की तैयारी चल रही है.

रांची. झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच जल्द ही एक ऐतिहासिक तस्वीर देखने को मिल सकती है. राज्य के सबसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में शामिल सारंडा के जंगलों में सक्रिय करीब 25 नक्सलियों के एक साथ आत्मसमर्पण करने की तैयारी चल रही है. सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों की लगातार चौतरफा घेराबंदी के कारण नक्सली संगठन पूरी तरह दबाव में हैं.

आईजी ऑपरेशन नरेंद्र सिंह ने क्या कहा?

आईजी ऑपरेशन नरेंद्र सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड पुलिस और सुरक्षाबलों ने संयुक्त अभियान चलाकर नक्सलियों के ताबूत में अंतिम कील ठोकने की तैयारी कर ली है. उन्होंने कहा कि अब नक्सलियों के पास दो ही रास्ते बचे हैं- या तो हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हो जाएं या फिर सुरक्षाबलों की कार्रवाई का सामना करें. उन्होंने बताया कि झारखंड के ज्यादातर इलाकों से नक्सली नेटवर्क लगभग खत्म हो चुका है. सिर्फ सारंडा का इलाका बचा है, जहां अब भी कुछ बड़े दस्ते सक्रिय हैं, लेकिन वहां भी सुरक्षाबलों ने मजबूत पकड़ बना ली है.

सारंडा के जंगलों में चौतरफा घेराबंदी

आईजी ऑपरेशन के मुताबिक कोबरा, झारखंड जगुआर और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम लगातार जंगलों में सर्च ऑपरेशन चला रही है. पूरे इलाके की स्क्रीनिंग की जा रही है ताकि नक्सलियों के मूवमेंट पर नजर रखी जा सके. उन्होंने जानकारी दी कि मंगलवार को सोनुआ थाना क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ भी हुई थी. इस दौरान नक्सली कुछ सामान छोड़कर जंगल की ओर भाग निकले. सुरक्षाबलों को यह भी सूचना मिली है कि मुठभेड़ में कुछ नक्सली घायल हुए हैं.

‘अब बचना मुश्किल’

सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि सारंडा के जंगलों को चारों तरफ से घेर लिया गया है और नक्सलियों के पास निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा है. लगातार चल रहे अभियान और बढ़ते दबाव के कारण अब बड़ी संख्या में नक्सली सरेंडर की तैयारी कर रहे हैं. सूत्रों की मानें तो आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कई हार्डकोर उग्रवादी भी शामिल हो सकते हैं. यदि ऐसा होता है तो यह झारखंड के इतिहास में नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जाएगा.

बदलेगी सारंडा की तस्वीर

सारंडा का जंगल लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है. लेकिन अब पुलिस और सुरक्षाबलों का कहना है कि जल्द ही यहां विकास, सड़क, शिक्षा और रोजगार की नई तस्वीर दिखाई देगी. सरकार भी सरेंडर करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल करने की योजना पर काम कर रही है. अगर यह सामूहिक सरेंडर सफल होता है तो राज्य में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में यह सबसे बड़ा मोड़ साबित हो सकता है.

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Utkarsh KumarChief Sub Editor

Utkarsh Kumar is currently working as a Chief Sub Editor with Network 18 Media & Investment Limited for the News18 Hindi website. (Bihar/Jharkhand). He is multimedia journalist with over 15 years of experience …और पढ़ें



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