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भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम आसमान की अभेद्य ढाल है. इसकी एक मिसाइल दागने का खर्च 2.5 करोड़ से 16.6 करोड़ रुपये तक आता है. हाल ही में भारत ने 10,000 करोड़ रुपये में 288 नई मिसाइलों का आर्डर दिया है. महंगे आपरेशनल कॉस्ट के कारण इस सिस्टम का उपयोग केवल बड़े खतरों जैसे फाइटर जेट और क्रूज मिसाइलों को मार गिराने के लिए किया जाता है.
S-400 का एक बटन दबाते ही स्वाहा हो जाते हैं करोड़ों रुपये. (File Photo : PTI)
नई दिल्ली: भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम आसमान का असली सुदर्शन चक्र है. दुश्मन देश भारत की तरफ आंख उठाने से भी डरते हैं. यह सिस्टम पलक झपकते ही दुश्मन के फाइटर जेट और मिसाइलों को नष्ट कर देता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस एडवांस सिस्टम को एक बार चलाने में कितना भारी भरकम बजट खर्च होता है. हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस खतरनाक सिस्टम की सिर्फ एक मिसाइल दागने की कीमत करोड़ों रुपये में है. इसकी सबसे एडवांस मिसाइल को एक बार फायर करने का खर्च किसी भी आम इंसान को हैरान कर सकता है. रूस से खरीदे गए इस खतरनाक हथियार का आपरेशनल कॉस्ट बहुत ज्यादा है. भारत ने अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इस पर बड़ा इन्वेस्टमेंट किया है. आइए जानते हैं कि इस घातक सिस्टम से एक बार फायर करने पर कितना बड़ा खर्च आता है.
S-400 सिस्टम की एक मिसाइल फायर करने की असली कीमत क्या है?
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम में कुल चार अलग-अलग तरह की मिसाइलें लोड होती हैं. इन मिसाइलों की मारक क्षमता 40 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर तक होती है. डिफेंस एक्सपर्ट्स और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसके एक मिसाइल की कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये से शुरू होती है. इसकी सबसे खतरनाक और लंबी दूरी वाली मिसाइल का नाम 40N6E है. इस मिसाइल की कीमत करीब 8.3 करोड़ रुपये से लेकर 16.6 करोड़ रुपये तक होती है. इसका मतलब है कि अगर भारत इस सिस्टम से केवल एक लंबी दूरी की मिसाइल दागता है तो एक बार में कम से कम 16 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आता है.
भारत को S-400 के नए मिसाइल आर्डर पर कितना खर्च करना पड़ा है?
भारतीय एयरफोर्स अपनी सुरक्षा को लगातार अपडेट कर रही है. डिफेंस प्रोक्योरमेंट काउंसिल ने हाल ही में 288 नई एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी है. इस नए डिफेंस सौदे की कुल वैल्यू लगभग 10,000 करोड़ रुपये है. इस आर्डर में 120 कम दूरी की मिसाइलें शामिल हैं. इसके साथ ही 168 लंबी दूरी की मिसाइलें भी खरीदी जा रही हैं. इस पूरे आर्डर की कास्ट को देखें तो इसमें मेंटेनेंस और लाइफसाइकिल का खर्च भी शामिल होता है. इस बड़े आर्डर से साफ है कि भारत अपनी आसमानी ढाल को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहता है.
S-400 का आपरेशनल कॉस्ट इतना महंगा क्यों हो जाता है?
यह कोई साधारण मिसाइल सिस्टम नहीं है. इसमें एडवांस रडार और सुपरफास्ट गाइडेड कंप्यूटर तकनीक का इस्तेमाल होता है. यह सिस्टम एक साथ 36 टारगेट पर नजर रख सकता है. यह एक बार में 72 मिसाइलें दागने में सक्षम है. इसके रडार की रेंज 600 किलोमीटर तक होती है. इस हाई-टेक रडार को हर समय एक्टिव रखने में बहुत ज्यादा बिजली और फ्यूल का इस्तेमाल होता है. इसके पार्ट्स और मेंटेनेंस के लिए रूस पर निर्भरता भी इसकी आपरेशनल कास्ट को बढ़ा देती है. ट्रेनिंग और लगातार होने वाले आपरेशनल खर्च मिलकर इसे दुनिया का सबसे महंगा डिफेंस सिस्टम बनाते हैं.
क्या सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए S-400 का उपयोग करना समझदारी है?
आजकल युद्ध के मैदान में सस्ते कामिकेजी ड्रोन का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है. एक सामान्य ड्रोन की कीमत महज 15 से 20 लाख रुपये होती है. अगर इस सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए भारत S-400 की 8 करोड़ रुपये की मिसाइल फायर करता है तो यह आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान है. डिफेंस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इतने महंगे सिस्टम का इस्तेमाल सिर्फ बड़े खतरों के लिए होना चाहिए. दुश्मन के फाइटर जेट या क्रूज मिसाइल को नष्ट करने के लिए ही इसका उपयोग सबसे बेस्ट माना जाता है. छोटे और सस्ते ड्रोन से निपटने के लिए भारत अब कम दूरी वाले सस्ते एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात कर रहा है.
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दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें