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सिंहस्थ 2028 को देश का सबसे बड़ा ग्रीन महाकुंभ बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. प्लास्टिक और थर्माकोल की जगह पत्तल-दोने, बांस के टेंट और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होगा. भीषण गर्मी से राहत के लिए शहर में हरित वन-उपवन और छायादार विश्राम स्थल बनाए जाएंगे. इस बार सिंहस्थ में आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिलेगा.
धार्मिक नगरी उज्जैन मे 2028 मे सिंहस्थ महाकुम्भ का आयोजन होने वाला है. जिसमे करोड़ो की संख्या मे श्रद्धांलुओ का आस्था का सैलाब उमड़ेगा. इस बार सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को एक नई और अनोखी पहचान देने की तैयारी शुरू हो चुकी है. आयोजन को पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया जा सके. वन विभाग ने “ग्रीन सिंहस्थ मॉडल” पर काम शुरू कर दिया है, जिसमें परंपरा, सुविधाएं और पर्यावरण का संतुलित संगम देखने को मिलेगा.
आयोजन के दौरान प्लास्टिक और लकड़ी के उपयोग को न्यूनतम रखा जाएगा और प्राकृतिक संसाधनों को प्राथमिकता दी जाएगी. भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए हरित क्षेत्र और प्राकृतिक छांव की व्यवस्थाएं भी की जाएंगी. दावा किया जा रहा है कि सिंहस्थ 2028 देश का सबसे बड़ा और सबसे ईको फ्रेंडली महाकुंभ बनकर नई मिसाल पेश करेगा.
साधु-संतो के डेरे बनेंगे आकृष्ण का केंद्र
इस बार आने वाले 2028 सिंहस्थ (महाकुंभ) मे आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण की अनूठी मिसाल देखने को मिलेगी. भोजनशालाओं में प्लास्टिक और थर्माकोल की जगह खाखरे और इलायची के पत्तों से बने दोने-पत्तलों का उपयोग किया जाएगा, जिससे प्रदूषण पर नियंत्रण मिलेगा. साधु-संतों के डेरे भी बांस और प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार किए जाएंगे. श्रद्धालुओं को भीषण गर्मी से राहत देने के लिए शहर में वन-उपवन और हरित छांव विकसित की जाएगी. वन विभाग हरदा और बालाघाट से बड़े पैमाने पर बांस मंगाने की तैयारी में जुटा है, जबकि धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आवश्यक सामग्रियों की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि सिंहस्थ में आस्था और पर्यावरण का अद्भुत संगम दिखाई दे.
गर्मी से राहत के लिए बनेंगे वन-उपवन
डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खास तैयारियां शुरू हो गई हैं. आयोजन भीषण गर्मी के मौसम में होने वाला है, इसलिए शहर और आसपास के क्षेत्रों में अस्थायी और स्थायी वन-उपवन विकसित किए जाएंगे. श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए बड़े-बड़े पेड़, हरित छांव और प्राकृतिक विश्राम स्थल तैयार होंगे. इन हरित क्षेत्रों में आने वाले लोग गर्मी से राहत के साथ प्रकृति की शांति और सुकून का भी अनुभव कर सकेंगे.
साधु-संतो के साथ पर्यटको को मिलेगी विशेष सुविधा
सिंहस्थ 2028 केवल आस्था का महापर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का भी बड़ा संदेश बनेगा. वन विभाग इसे देश-दुनिया के सामने “ग्रीन महाकुंभ” के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी में जुटा है, जहां पर्यावरण और धार्मिक परंपराओं का अनोखा संगम देखने को मिलेगा. संत समाज और अखाड़ों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चंदन, बिल्वपत्र, तुलसी और अन्य पूजन सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है.