Last Updated:
रांची की कंचन और 6 महिलाओं ने मिलकर “लातिका” नाम से स्नैक्स ग्रुप शुरू किया, जो आज बड़ा ब्रांड बन चुका है. ये महिलाएं मिनी समोसा, ठेकुआ, निमकी, मसाला मखाना और रागी-बाजरा लड्डू जैसे पारंपरिक स्नैक्स बनाकर ब्रांडेड पैकेजिंग में पूरे भारत में भेजती हैं. झारक्राफ्ट की मदद से इन्हें सरकारी मेलों में स्टॉल लगाने का मौका मिला. आज इनके ग्राहक दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में हैं और समूह की मासिक कमाई 2 लाख रुपये से अधिक पहुंच चुकी है.
रांची : रांची की कंचन ने अन्य 6 हाउसवाइफ महिलाओं के साथ मिलकर अपना एक समूह बनाई है. जिसका नाम है लातिका. इस समूह का काम होता है तरह-तरह के स्नैक्स बनाना जिसमें यह खासतौर पर मिनी समोसा से लेकर ठेकुआ, निमकी, मसाला मखाना और भी कई सारी चीज यह बनाने का काम करती है और इसके एकदम ब्रांडेड की तरह पैकेज करती है और बेचती है.
झारक्राफ्ट की तरफ से मदद भी मिला है और दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे शहरों में जाकर सरकारी मेले में अपना स्टॉल भी लगाती है. आज आलम यह है कि ऑल ओवर इंडिया में इनके कस्टमर है और महीने की कमाई 2 लाख से अधिक चुकी है. कंचन बनती है, पहले मैं हाउसवाइफ थी. सिर्फ घर पर खाना बनाती थी घर से निकलना भी नहीं होता था. पर आज पूरा दुनिया घूम रही हूं.
आज अपने पैरों पर खड़ी
वहीं, सोनाली बताती है कि आज हम सारे लोग अपने पैरों पर खड़े हैं. आज किसी पर निर्भर होने की जरूरत नहीं. पहले छोटे-छोटे चीजों के लिए घर वालों के सामने हाथ फैलाने पड़ते थी. लेकिन आज आलम ये है कि आज हम उनकी मदद करते हैं. हम तरह-तरह की पकवान भी बनाते हैं. जैसे गुजिया, कचौड़ी, पकौड़ी यह सारी चीज. यह सारी चीज हमने अपनी दादी नानी से सीखी है.
झारक्राफ्ट से भी चुकी मदद मिल जाती है, तो हमें सरकारी स्टॉल भी फ्री में मिल जाते हैं. अब क्या है कि मुंबई कोलकाता तक जब हम चाहते हैं तो हमारे इस प्रोडक्ट जैसे रागी व बाजरा लड्डू हम यह भी बनाते हैं, निमकी ठेकुआ यह सब मेट्रो सिटी में खासतौर पर खूब पसंद किया जाता है. क्योंकि, वहां के लोग पास यह सब बनाने का उतना फुर्सत नहीं. इसीलिए एक बार वह खाते हैं तो हमारे पेटेंट कस्टमर बन जाते हैं.
पूरे भारत में डिलीवरी
हमारे कस्टमर मेट्रो सिटी में अधिक है. नमकीन गुजिया यह सब आर्डर करते हैं. उनको एकदम ब्रांडेड स्टाइल में पैकेजिंग करके भेजते है. एक बार में 20 किलो ठेकुआ, 30 किलो नमकीन इस तरीके के आर्डर आते हैं. आज आलम ये है कि हमारे पास फुर्सत नहीं है. कई बार तो आर्डर ले नहीं पाते. आज अच्छा लगता है कि हमारा स्वाद और काम लोगों को इतना पसंद आ रहा है. आराम से महीने की कमाई 2 लाख पार जा चुकी हैं.
About the Author
7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें