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Ganga Dussehra Date: हिंदू धर्म में गंगा दशहरा को आस्था, श्रद्धा और पुण्य का महापर्व माना जाता है. मान्यता है कि इस पावन दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं, इसलिए स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. इस शुभ अवसर पर किए गए पुण्य कार्य जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं. आइए जानते हैं स्नान-दान का शुभ मुहूर्त.
हिंदू धर्म में हर तिथि हर वार का अत्यधिक महत्व शास्त्रों मे बताया गया है. इसी अनुसार, गंगा दशहरा को बेहद पवित्र और पुण्यदायी पर्व माना गया है. मान्यता है कि इसी शुभ दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, जिससे धरती पर जीवन और आस्था का नया प्रवाह शुरू हुआ. हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को यह पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है.
कहा जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पूजा और दान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस बार गंगा दशहरा की तारीख को लेकर लोगों के मन में असमंजस बना हुआ है कि यह पर्व कब मनाया जायगा. ऐसे में जानते हैं सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व.
कब मनाया जायगा गंगा दशहरा
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 25 मई 2026 को सुबह 4 बजकर 28 मिनट के लगभग पर होगी. वहीं, दशमी तिथि का समापन 26 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर किया जाता है. इसी वजह से गंगा दशहरा का पर्व 25 मई 2026, सोमवार को मनाया जाएगा. ऐसे में श्रद्धालुओं को इसी दिन स्नान-दान और पूजा करना शुभ रहेगा.
गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का पर्व बेहद पावन और खास माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं और राजा भागीरथ के पूर्वजों को मोक्ष प्रदान किया था. इसलिए इस दिन को गंगा अवतरण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. मान्यता है कि गंगा दशहरा पर गंगा स्नान और दान-पुण्य करने से जीवन के दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है. मां गंगा भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष का आशीर्वाद देती हैं.
क्या है इस दिन स्नान का महत्व धार्मिक
मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा का पर्व बेहद पवित्र माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति को दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इनमें तीन कायिक यानी शरीर से जुड़े पाप शामिल हैं. हिंसा करना, चोरी करना और अनुचित आचरण अपनाना. वहीं वाणी से होने वाले चार पापों में झूठ बोलना, कटु शब्द कहना, चुगली करना और दूसरों की निंदा करना शामिल माना गया है. इसके अलावा मन से जुड़े तीन पाप लालच, ईर्ष्या और नकारात्मक या अशुद्ध विचार भी इसमें आते हैं. मान्यता है कि गंगा दशहरा पर श्रद्धा से स्नान और पूजा करने से आत्मिक शुद्धि का लाभ मिलता है.
गंगा स्नान करते समय जरूर करे ये मंत्र का जाप
नमामि गंगे तव पाद पंकजम्,सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम्।भुक्तिं च मुक्तिं च ददासि नित्यं,भावानुसारेण सदा नराणाम्॥