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Jamui Dabill Panchayat Library: जमुई जिले की एक महिला मुखिया ने वो कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े जनप्रतिनिधियों के लिए मिसाल बन गया है. दाबिल पंचायत की मुखिया पुतुल देवी ने अपने स्तर से 15 लाख रुपये खर्च कर गांव के बच्चों के लिए एक ऐसी हाईटेक एयर कंडीशन लाइब्रेरी बनवा दी है. जो 24 घंटे खुली रहती है. शहरों जैसी सुविधाओं से लैस इस अनूठी लाइब्रेरी में रोजाना आसपास के दर्जनों गांवों से 200 से अधिक छात्र-छात्राएं बैठकर अफसर बनने का सपना बुन रहे हैं. इस लाइब्रेरी की क्या हैं खासियतें, जानिए.
जमुई: पंचायत में जब विकास की बात होती है तो आमतौर पर गली-नाली, सड़क इत्यादि के निर्माण की बात की जाती है. लेकिन जमुई का एक पंचायत ऐसा भी है जहां के मुखिया ने विकास के लिए कुछ ऐसा कर दिया है, जिसकी अब सराहना हो रही है. इस मुखिया ने करीब 15 लाख रुपए खर्च कर एक ऐसा हाईटेक लाइब्रेरी का निर्माण कराया है, जिसमें डेढ़ सौ से भी अधिक की संख्या में बच्चे प्रतिदिन पढ़ने आते हैं. दाबिल पंचायत के अलावा आसपास के भी दूसरे पंचायत से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां प्रतिदिन पढ़ने आते हैं. अभी जहां बाहर 40 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक की गर्मी है, ऐसे में यह बच्चे बिना किसी फीस के अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ एयर कंडीशन कमरे में अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.
खर्च कर दिए 15 लाख से भी अधिक रुपए
दरअसल, दाबिल पंचायत की मुखिया पुतुल देवी ने इस हाईटेक लाइब्रेरी का निर्माण कराया है. पुतुल देवी के पति योगेंद्र राम बताते हैं कि इसको बनवाने में करीब 15 लाख से भी अधिक रुपए की लागत आई है. जिसमें कुछ पैसे तो इन्होंने अलग-अलग योजना और मद के जरिए खर्च किए, जिसके जरिए इन्होंने जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके भवन का जीर्णोद्धार करवाया. फिर कुछ ग्रामीण सहयोग से इन्होंने भवन का रंग रोगन करवाया. बाद में करीब 4 लाख से भी अधिक रुपए इन्होंने अपनी जेब से लगाए, और इस पूरे लाइब्रेरी को एयर कंडीशन बनाया. इतना ही नहीं इस लाइब्रेरी की 24 घंटे हाईटेक कैमरे से निगरानी की जाती है. लड़कियों के लिए शौचालय सहित कई तरह की सुविधा यहां पर विकसित की गई है.
पढ़ने आते हैं 200 से भी अधिक बच्चे
योगेंद्र राम बताते हैं कि उनके इस हाईटेक लाइब्रेरी में दाबिल के अलावा आसपास के कहरडीह, चांगोंडीह, बानपुर, कोल्हुआ, गरसंडा सहित दर्जन भर से भी अधिक गांव से 200 से भी अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं. यह लाइब्रेरी 24 घंटे खुला रहता है. इसमें उन्होंने दो मेंटर को भी रखा है, जो तैयारी करने वाले छात्रों को सही रास्ता बताते हैं.
पति के सपने को मुखिया पत्नी ने किया साकार
योगेंद्र राम बताते हैं कि मैं पहले बीएमपी में हवलदार की नौकरी कर रहा था. मैं अपनी नौकरी छोड़ दी तथा पंचायत का चुनाव लड़ा. जब मेरी पत्नी पंचायत चुनाव जीत कर आई, तब से ही मेरी ख्वाहिश थी कि मैं यहां के युवा, खास कर पढ़ने-लिखने वाले युवाओं के लिए कुछ कर सकूं. इसी कड़ी में इसका निर्माण कराया. मैं पिछले कई सालों से यह करना चाहता था. अब जाकर यह सफल हो सका है. पिछले 1 साल से भी अधिक समय से यह लाइब्रेरी अनवरत रूप से जारी है. यह आसपास के इलाके में नजीर बन गया है. छात्र बताते हैं कि यहां तैयारी करने से उन्हें काफी सुविधा भी होती है. यहां पर पढ़ने का एक बेहतर शैक्षणिक माहौल भी बना हुआ है. दाबिल पंचायत के मुखिया की इस पहल की अब हर जगह सराहना हो रही है.
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