Last Updated:
कोलकाता ने 1984 में भारत को उसकी पहली मेट्रो दी थी. चालीस साल बाद, उसने एक बार फिर नया कमाल कर दिखाया. इस बार, हुगली नदी के 30 मीटर नीचे. जानिए, भारत की पहली अंडरवॉटर मेट्रो कैसे बनी…
कोलकाता ने एक बार फिर इतिहास रच दिया. जिस शहर ने 1984 में देश को पहली मेट्रो दी थी, उसी शहर ने मार्च 2024 में भारत की पहली अंडरवॉटर मेट्रो चलाकर नया अध्याय लिख दिया. हावड़ा मैदान-एस्प्लेनेड मेट्रो सेक्शन के शुरू होते ही हजारों लोग हुगली नदी के नीचे से गुजरने वाली इस अनोखी यात्रा का हिस्सा बने. पहले ही दिन 70 हजार से ज्यादा यात्रियों ने इस मेट्रो में सफर किया और 53 साल पुराना सपना आखिरकार पूरा हो गया.
पीढ़ियों से हुगली नदी कोलकाता और हावड़ा को अलग करती रही है. दोनों शहरों के बीच आने-जाने के लिए लोगों को हावड़ा ब्रिज, फेरी या भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता था. लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. करीब 520 मीटर लंबी मेट्रो सुरंग नदी के तल से लगभग 30 मीटर नीचे बनाई गई है. इस अंडरवॉटर टनल से हावड़ा और कोलकाता के बीच का सफर एक मिनट से भी कम समय में पूरा हो जाता है. जो दूरी पहले फेरी से 20 मिनट और सड़क से लगभग एक घंटे में तय होती थी, अब वह कुछ सेकंड में पूरी हो रही है.
बहती हुई नदी के नीचे सुरंग बनाना आसान नहीं था. इस परियोजना के तहत दो अलग-अलग टनल बनाई गईं, जिनमें एक अप और दूसरी डाउन लाइन के लिए है. सुरंग नदी के तल से करीब 13 मीटर नीचे और जमीन से लगभग 30 मीटर अंदर बनाई गई.
Add News18 as
Preferred Source on Google
इस काम में बड़े पैमाने पर चट्टानों की खुदाई, भारी कंक्रीट निर्माण और वर्षों की इंजीनियरिंग मेहनत शामिल रही. आखिरकार जब सुरंग पूरी हुई, तो भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया जहां अंडरवॉटर मेट्रो टनल मौजूद है. इस परियोजना की एक और खास बात है हावड़ा मेट्रो स्टेशन. यह स्टेशन जमीन से 33 मीटर नीचे बना है, जो इसे भारत का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन बनाता है.
अगर इसकी गहराई को समझें तो यह लगभग 11 मंजिला इमारत के बराबर है, फर्क सिर्फ इतना है कि यह पूरी तरह जमीन के नीचे स्थित है. देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक हावड़ा स्टेशन के नीचे बना यह स्टेशन अपने आप में इंजीनियरिंग का चमत्कार माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 मार्च 2024 को इस लाइन का उद्घाटन किया था, जबकि 15 मार्च से आम लोगों के लिए सेवाएं शुरू हुईं. पहले ही दिन लोगों में अंडरवॉटर मेट्रो को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. करीब 70 हजार यात्रियों ने इस मेट्रो में सफर किया. सिर्फ हावड़ा मैदान स्टेशन से 23,444 यात्रियों ने यात्रा शुरू की, जबकि हावड़ा स्टेशन से 20,923 लोग मेट्रो में सवार हुए.
यह अंडरवॉटर मेट्रो सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि कोलकाता और हावड़ा के लाखों लोगों के लिए लाइफलाइन बन चुकी है. पूरा ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर 16.6 किलोमीटर लंबा है, जो हावड़ा मैदान को साल्ट लेक सेक्टर-5 यानी कोलकाता के आईटी हब से जोड़ता है. इससे रोजाना सफर करने वाले कर्मचारियों, छात्रों और आम यात्रियों का समय बचेगा, ट्रैफिक कम होगा और यात्रा पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी.