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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद राजधानी रांची के बाहरी इलाकों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। हाल ही में पुलिस अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि शहर के भीतर तो निगरानी मजबूत है, लेकिन आउटर एरिया में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर अपराधी वारदात के बाद आसानी से फरार हो जाते हैं। ऐसे में अब एंट्री और एक्जिट रूट्स को पूरी तरह कैमरों की जद में लाया जाएगा। फिलहाल रांची शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील इलाकों में 750 से अधिक हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, जो स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत संचालित हो रहे हैं। इनमें ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन और रेड लाइट वॉयलेशन डिटेक्शन जैसी तकनीकें शामिल हैं, जो वाहनों की पहचान और ट्रैकिंग में मदद करती हैं। इसके बावजूद पुलिस की समीक्षा में यह सामने आया है कि अपराधी शहर के भीतर वारदात के बाद रिंग रोड और राष्ट्रीय राजमार्गों के जरिए बाहर निकल जाते हैं, जहां निगरानी अपेक्षाकृत कमजोर है। शहर के 20 से अधिक एंट्री व एक्जिट पॉइंट्स को प्राथमिकता : इसी कमी को दूर करने के लिए अब पुलिस प्रशासन ने रांची के बाहरी कॉरिडोर पर फोकस बढ़ा दिया है। शहर के 20 से अधिक एंट्री और एक्जिट पॉइंट्स को प्राथमिकता सूची में रखा जाएगा। रिंग रोड, कांके- पिठोरिया मार्ग, ओरमांझी -मेसरा (एनएच-33), नामकुम- टाटीसिलवे, तुपुदाना-खूंटी रोड और नगड़ी-इटकी मोड़ जैसे इलाके प्रमुख एक्जिट रूट हैं।
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