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लोहरदगा|विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन धर्म में गंगा दशहरा का पर्व अत्यंत पावन, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा 25 मई को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। उन्होंने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार हुईं, लेकिन उनके प्रचंड वेग को संभालना असंभव था। तब भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण कर उनके वेग को नियंत्रित किया और पृथ्वी पर अवतरित किया। इसी दिव्य घटना की स्मृति में गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है। संजय सर्राफ ने कहा कि गंगा दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सेवा, दान, सदाचार, संयम और प्रकृति संरक्षण का संदेश देने वाला पर्व भी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन गंगा स्नान, पूजा-अर्चना, दीपदान एवं दान-पुण्य करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है।
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