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पिता चलाते हैं पोकलेन, 17 साल के बेटे ने 17,400 फीट की...


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कोडरमा के 17 वर्षीय एनसीसी कैडेट आकाश कुमार ने इतिहास रचा है. उन्होंने 17,400 फीट ऊंची बर्फीली चोटी पर तिरंगा लहराया. आकाश के पिता तमिलनाडु में पोकलेन ड्राइवर हैं. वे एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स पूरा करने वाले झारखंड के पहले कैडेट बने हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने राज्य का मान बढ़ाया है.




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कोडरमा: जिले के कोरियाडीह गांव निवासी एवं सीएच स्कूल के एनसीसी कैडेट आकाश कुमार ने अपने साहस, मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर ऐसी उपलब्धि हासिल की है. जिस पर पूरा झारखंड गर्व कर रहा है. महज 17 वर्ष की आयु में आकाश ने अरुणाचल प्रदेश स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स , दिरांग से एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर अरुणाचल प्रदेश की बर्फीली चोटियों 17 हजार 400 फीट की ऊंचाई पर भारतीय तिरंगा फहराकर जिले और राज्य का नाम रोशन किया है.

एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स को पूरा करने वाले झारखंड के पहले एनसीसी कैडेट 
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, देश के प्रतिष्ठित पर्वतारोहण एवं साहसिक प्रशिक्षण संस्थानों में गिना जाता है. जहां कठिन परिस्थितियों में प्रशिक्षण देकर युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया जाता है. आकाश कुमार झारखंड के पहले ऐसे एनसीसी कैडेट बन गए हैं जिन्होंने इस एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा किया. आकाश जब इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद वे कोडरमा लौटे तो रेलवे स्टेशन पर उनका भव्य स्वागत किया गया. स्टेशन परिसर में परिजनों, मित्रों, एनसीसी अधिकारियों, बटालियन स्टाफ और सैकड़ों एनसीसी कैडेटों ने फूल-मालाएं पहनाकर, मिठाई खिलाकर और जोरदार नारों के साथ उनका अभिनंदन किया.

एनसीसी के अधिकारियों ने किया स्वागत 
स्वागत समारोह में 45 झारखंड बटालियन के सूबेदार मेजर जीके चौधरी, ट्रेनिंग जेसीओ बलविंदर, सुधीर मिश्रा, एएनओ लेफ्टिनेंट राधिका, फर्स्ट ऑफिसर अरुण कुमार पाल और सेकंड ऑफिसर नवीन चौधरी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे. सीएच स्कूल के प्रिंसिपल कृष्णकांत तिवारी ने भी आकाश को शुभकामनाएं भेजते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि जिले के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी. उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि मेहनत और लगन हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता.

पिता चलाते हैं पोकलेन 
आकाश कुमार साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता तमिलनाडु में पोकलेन मशीन चालक के रूप में कार्य करते हैं. आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद आकाश ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया और लगातार मेहनत करते रहे. इस उपलब्धि के दौरान एक भावुक पल भी सामने आया, जब आकाश ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि दूरी अधिक होने के कारण वे उनकी खुशी में शामिल नहीं हो सके. आकाश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, कमांडिंग ऑफिसर विजय कुमार (सेना मेडल), सीएच स्कूल के एएनओ लेफ्टिनेंट राधिका, सेकंड ऑफिसर नवीन चौधरी और समस्त बटालियन स्टाफ को दिया.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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