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आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 9308098272 पर सिर्फ मैसेज करें। भास्कर न्यूज | जामताड़ा जिले में बदलते जलवायु परिदृश्य और अनियमित वर्षा को देखते हुए किसानों के लिए गरमा जुताई एक प्रभावी कृषि तकनीक के रूप में उभर रही है। जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार ने बताया कि गरमा जुताई खरीफ फसल की बुवाई से पहले गर्मी के मौसम में खेत की गहरी जुताई करने की प्रक्रिया है। यह कार्य जून के बीच तेज धूप में मिट्टी पलटने वाले हल या ट्रैक्टर से किया जाता है। उन्होंने बताया कि गरमा जुताई करने से मिट्टी में छिपे कीट, रोगजनक और खरपतवारों के बीज तेज धूप के संपर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं। इससे फसल में रोग और कीटों का प्रकोप कम होता है तथा रासायनिक दवाओं पर निर्भरता घटती है। साथ ही, मिट्टी भुरभुरी बनती है, उसकी जल धारण क्षमता बढ़ती है और वर्षा जल का बेहतर संचयन संभव हो पाता है। खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे सूखे की स्थिति में भी फसल को लाभ मिलता है। कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में गरमा जुताई लोचदार कृषि का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह तकनीक मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, जल संरक्षण बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक है। किसान गरमा जुताई, मेढ़बंदी, वर्षा जल संचयन, सूखा सहनशील किस्मों का चयन तथा मल्चिंग जैसी तकनीकों को अपनाकर नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
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