2. आखिर क्यों बिखर रही हैं दूसरी पार्टियां?
विपक्ष के विधायकों के लगातार इस्तीफे और पाला बदलने के पीछे तीन मुख्य राजनीतिक और रणनीतिक कारण हैं:
एंटी-डिफेक्शन लॉ यानी दलबदल कानून का तोड़: अगर विपक्षी विधायक सीधे तौर पर पाला बदलते, तो उनकी सदस्यता रद्द हो जाती। इसलिए वे पहले विधायकी से इस्तीफा दे रहे हैं और फिर TVK ज्वाइन कर रहे हैं। इससे वे कानून के फंदे से बच जा रहे हैं और खाली सीटों पर उपचुनाव का रास्ता साफ हो रहा है।
AIADMK के भीतर की लड़ाई: चुनाव में करारी हार के बाद AIADMK दो धड़ों में बंट चुकी है। एक धड़ा पलानीस्वामी (EPS) के साथ है, तो दूसरा बागी गुट सीवी षणमुगम और एसपी वेलुमणि का है। इसी बागी गुट के विधायकों ने 13 मई को विधानसभा में विजय सरकार के विश्वास मत के दौरान व्हिप का उल्लंघन करते हुए विजय के पक्ष में वोट किया था। अब वे खुलकर बाहर आ रहे हैं।
भविष्य विजय के साथ: विधायकों को लग रहा है कि तमिलनाडु में अब द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) और AIADMK का दौर खत्म हो चुका है। राज्य की जनता बदलाव चाहती थी और वह बदलाव ‘विजय’ हैं। ऐसे में अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने के लिए विपक्ष के नेता सत्ताधारी दल का रुख कर रहे हैं।
3. क्या विजय राजनीति के लंबे खिलाड़ी बनेंगे?
तमिलनाडु में फिल्म अभिनेताओं का राजनीति में लंबा इतिहास है. MGR और जयललिता सफल रहे, लेकिन सिवाजी गणेशन, विजयकांत और कमल हासन जैसे बड़े नाम ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सके। विजय का नाम इसी सूची में है और उनकी परीक्षा अभी शुरू ही हुई है। तमिलनाडु की एक उभरती हुई महिला नेता ने कल TVK में शामिल होने के बाद कहा, “विजय ‘अम्मा’ यानी जयललिता की छवि में सरकार चला रहे हैं।” यह बयान बताता है कि विजय महिला मतदाताओं और AIADMK के पुराने वोटरों को अपनी तरफ खींचने में सफल हो रहे हैं। लेकिन आगे की राह आसान नहीं। उपचुनाव उनकी पहली बड़ी परीक्षा होगी। अगर TVK इन बागी नेताओं को उनकी पुरानी सीटों पर दोबारा जिता पाई तो यह साबित होगा कि विजय की लोकप्रियता सरकार चलाने के बाद भी बरकरार है।
4. विपक्ष के नेता क्या कह रहे हैं?
विपक्ष के नेता पलानीस्वामी (EPS) ने सत्यभामा और अन्य बागी विधायकों को ‘पीठ में छुरा घोंपने वाला’ कहा और आरोप लगाया कि यह सब विजय की पार्टी द्वारा की जा रही विधायकों की खरीद-फरोख्त का हिस्सा है।
डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने इस इस्तीफे पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि जो लोग खुद को ‘पवित्रता की ताकत’ कहते थे, वे सचिवालय के भीतर ही विधायकों का सौदा कर रहे हैं।
5. क्या विजय राजनीति में लंबी रेस के खिलाड़ी साबित होंगे?
करिश्माई फैन बेस और सोशल जस्टिस: ये सच है कि विजय तमिलनाडु के सुपरस्टार हैं. और वो कितने बड़े हैं इसका सबूत जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर दे दिया है. विजय की विचारधारा सेक्युलरिज्म, समानता और सामाजिक न्याय पर टिकी है। एमजीआर (MGR) और जयललिता के बाद तमिलनाडु के सिनेमाई फैंस ने विजय को ‘भगवान’ की तरह स्वीकार किया है। उनका जमीनी नेटवर्क बहुत मजबूत है।
AI-ड्रिवेन गवर्नेंस: 26 मई 2026 को ही सीएम विजय की सरकार ने राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित गवर्नेंस की शुरुआत की। चिकित्सा, कृषि, और तमिल भाषा की तकनीकों के लिए AI सेंटर बनाए जा रहे हैं और ‘अरिवगम’ यानी AI सिटी की बन हो रही है। यह दिखाता है कि वे पुरानी लीक से हटकर नए जमाने की राजनीति कर रहे हैं।
महिला सुरक्षा और ‘अम्मा कैंटीन’ को बढ़ावा: इस्तीफा देने वाली महिला विधायक मरगथम कुमारवेल ने साफ कहा कि वे विजय से इसलिए प्रभावित हुईं क्योंकि उन्होंने जयललिता की तरह महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है और गरीबों के लिए ‘अम्मा उनावगम’ यानी अम्मा कैंटीन को और बेहतर बनाने का वादा किया है।
6. अब आगे क्या होगा?
इन इस्तीफों के बाद अब तमिलनाडु को 4 से 5 सीटों पर तुरंत उपचुनावों का सामना करना पड़ेगा जिसमें त्रिची ईस्ट सीट भी शामिल है जिसे सीएम विजय ने खाली किया है। क्या विजय इन उपचुनावों में अपने दम पर इन बागी नेताओं को दोबारा जिता पाएंगे? यह उनकी लोकप्रियता की असली परीक्षा होगी। एक थ्योरी ये भी है कि एमके स्टालिन और उदयनिधि स्टालिन इस पूरे मामले में विजय सरकार को ‘धोखेबाज’ तो कह रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर DMK खुश है क्योंकि उसका धुर-विरोधी दल AIADMK पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है।