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इस निवेश गुरु की दुनिया दीवानी! एक सेशन की फीस 24 लाख...


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AI Guru Fee : एआई का स्‍वरूप धीरे-धीरे विराट होता जा रहा है. अब यह इनवेस्‍टमेंट कंपनियों और बैंकों को भी अपनी सर्विस देने लगा है. आलम ये है कि एक सेशन की ट्रेनिंग के लिए बैंक 24 लाख रुपये तक का भुगतान कर रहे हैं. इस एआई कंपनी को बनाने वाले फाउंडर का कहना है कि जो काम करने में घंटों लग जाते हैं, उसे यह एआई मॉडल महज 90 सेकंड में पूरा कर देता है.

इस निवेश गुरु की दुनिया दीवानी! एक सेशन की फीस 24 लाख रुपयेZoom

बैंकों के लिए एआई निवेश को लेकर सलाह देता है.

नई दिल्‍ली. अमेरिका के वॉल स्‍ट्रीट पर इन दिनों एक नया सितारा उभरकर सामने आया है. यह न तो कोई इनवेस्‍टमेंट बैंकर है, न हेज फंड मैनेजर और न ही कोई ट्रेडर. फिर भी इस निवेश गुरु का एक सुझाव पाने के लिए कंपनियों की लाइन लगी हुई है. यह एक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस है, जिससे टिप्‍स लेने के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियां भी लगी हुई हैं, वह भी तब जबकि इसके एक सेशन की फीस करीब 24 लाख रुपये है. दुनिया के तमाम दिग्‍गज बैंक्‍स इसकी सर्विस पाने के लिए यह कीमत चुकाने को तैयार हैं.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सॉफ्टबैंक के दो पूर्व निवेशक फेलिपे सिनिस्टर्रा और डेव वांग बैंकरों, फंड मैनेजर्स और एनालिस्ट्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स जैसे चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनी का इस्तेमाल करना सिखाकर भारी कमाई कर रहे हैं. ये टूल्स फाइनेंस सेक्टर में तेजी से काम करने, कंपनियों का बेहतर विश्लेषण करने और एआई के बढ़ते प्रभाव में टिके रहने में मदद करते हैं. इसी टूल्‍स में यह एआई गुरु भी शामिल है, जिसके एक सेशन की कीमत 24 लाख रुपये बताई जाती है.

कैसे काम करती है यह कंपनी
इस कंपनी का नाम है वॉल स्‍ट्रीट प्रॉम्‍प्‍ट, जो एक सेशन के लिए 25 हजार डॉलर यानी करीब 24 लाख रुपये की फीस वसूली जाती है. यह फीस एक दिन के वर्कशॉप की है, बावजूद इसके कंपनी के पास अगले 2 महीने की बुकिंग फुल है. यह डिमांड बताती है कि कैसे ग्‍लोबल बैंकिंग और फाइनेंशियल इंडस्‍ट्री में एआई की जरूरत बढ़ती जा रही है. हालांकि, यह सिर्फ समय बचाने के लिए तकनीक का इस्‍तेमाल नहीं है, बल्कि सही फैसला लेने के लिए तकनीक की मदद लेना है.

क्‍या होगा इस बदलाव का असर
बैंक नौकरियों का स्‍वरूप बदलने, कर्मचारियों की संख्‍या घटाने और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए इस एआई टूल का इस्‍तेमाल लगातार बढ़ रहा है. जोखिम ये है कि बैंक एआई ट्रेनिंग पर हद से ज्‍यादा खर्चे न बढ़ा दें. ब्‍लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बैंक व अन्‍य निवेश संस्‍थान अभी यही सोच रहे हैं कि एआई का इस्‍तेमाल भविष्‍य को बेहतर बनाने के लिए वर्तमान में किया गया निवेश है. यही वजह है कि ज्‍यादातर बड़े बैंकों ने नौकरियों की संख्‍या घटाना शुरू भी कर दिया है. स्‍टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने अगले 4 साल में हजारों छंटनी करने का मन बनाया है, जबकि सिटी ग्रुप, वेल्‍स फार्गो और बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 की पहली तिमाही में 5 हजार छंटनी करने की बात कही है. बैंक ऑफ अमेरिका ने कहा है कि एआई टूल्‍स का इस्‍तेमाल करने से उनकी प्रोडक्टिविटी 25 फीसदी तक बढ़ गई है.

आखिर क्‍या सिखाता है एआई गुरु
यह वर्कशॉप पारंपरिक कोडिंग क्‍लास सिखाने जैसा नहीं है. ब्‍लूमबर्ग का कहना है कि न्‍यूयॉर्क में एक ट्रेनिंग सेशन के दौरान एआई मॉडल ने स्‍टार्टअप फाउंडर को पिच वीडियो बनाकर दिया और स्‍पीच भी तैयार की, जबकि बॉडी लैंग्‍वेज सहित अन्‍य छोटी-मोटी चीजों पर भी बारीकी से ध्‍यान दिया. अगर इस काम को मैन्‍युअली किया जाए तो एक कंपनी को एनालाइज करने में घंटों लगते हैं, जबकि एआई इसे 90 सेकंड में कर देता है.

About the Author

Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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