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स्वास्थ्य विभाग में अनियमितताओं की हो सीबीआई जांच:बाबूलाल मरांडी ने उठाए एंबुलेंस...




नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में कथित घोटालों को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दवा बर्बादी, एंबुलेंस खरीद में अनियमितता और नियमों के विपरीत कंसलटेंट सेवा विस्तार जैसे मामलों को गंभीर बताते हुए पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है। कहा कि विभाग में बनाए गए कॉरपोरेशन का उपयोग लूट और टेंडर मैनेजमेंट के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के बजाय उसे बढ़ावा दे रही है। सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पिछले छह वर्षों में राज्य की स्थिति बदतर हुई है। कानून-व्यवस्था कमजोर हुई है। विकास कार्य ठप पड़े हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें रोजाना राज्यभर से भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती हैं, लेकिन सरकार इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन गया है। इस पर बोलने के लिए शब्द भी कम पड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक दोषी अधिकारी पदों पर बने रहेंगे, तब तक व्यवस्था में सुधार कैसे संभव है। कंसलटेंट नियुक्ति और एंबुलेंस खरीद पर सवाल नेता प्रतिपक्ष ने JMHIDPCL में कंसलटेंट नियुक्ति को नियमों के खिलाफ बताते हुए कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारी को तीन साल से अधिक सेवा विस्तार देने के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी जरूरी है, लेकिन बिना स्वीकृति के ही चौथे और पांचवें वर्ष तक नियुक्ति जारी रखी गई। उन्होंने एंबुलेंस खरीद घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि 55 करोड़ से खरीदी गई 206 एंबुलेंस एक साल तक निष्क्रिय रहीं, जबकि अब फिर से 80 करोड़ की नई निविदा निकाली गई है। साथ ही गोदामों में करोड़ों की दवाएं एक्सपायर होने और ऑक्सीजन टैंक परियोजना में अनियमितता के भी आरोप लगाए। ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की उन्होंने कहा कि ऑडिट में सामने आई अनियमितताएं बेहद गंभीर हैं, लेकिन सरकार इसे छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने JMHIDPCL का पुनः ऑडिट कराने और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही कैग रिपोर्ट के आधार पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नियुक्तियों में सत्ता का दुरुपयोग हुआ है। इसमें उच्च स्तर तक मिलीभगत हो सकती है।



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