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झारखंड में फिलहाल सस्ता बालू मिलने की उम्मीद नहीं है। आनन-फानन में 17 घाटों की लीज डीड फाइनल की गई। ताकि 10 जून को एनजीटी की रोक लगने से पहले करीब दो करोड़ सीएफटी बालू का स्टॉक किया जा सके। लेकिन इन घाटों की फाइल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास अटकी हुई

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  • संकट – सस्ता बालू मिलने की उम्मीद नहीं

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष राजीव लोचन बक्शी ने कहा कि उनके स्तर पर कोई सीटीओ लंबित नहीं है। वैसे आवेदन देने के 120 दिन के भीतर सीटीओ जारी करने का प्रावधान है। इधर, राज्यभर में बालू संकट बरकरार है। माफिया बालू का स्टॉक कर रहे हैं। लगभग हर घाट से बालू का अवैध खनन किया जा रहा है। रोजाना हजारों ट्रैक्टर से बालू ढोया जा रहा है। ताकि एनजीटी की रोक लगने के बाद वे महंगे दाम पर बालू बेच सकें। गौरतलब है कि राज्य में कैटेगरी-2 के कुल 444 घाट हैं। इनमें से 299 घाटों का टेंडर हुआ है, जबकि 35 घाटों को पर्यावरण स्वीकृति मिली है। इनमें अब तक 17 घाटों की ही लीज फाइनल हो पाई है।

टेंडर से बालू खनन तक की क्या है प्रक्रिया

नई व्यवस्था में सबसे पहले जिला प्रशासन बालू घाटों का टेंडर करता है। जिसके नाम टेंडर फाइनल होता है, उसे राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) से पर्यावरण स्वीकृति लेनी पड़ती है। पेसा कानून के तहत शेड्यूल एरिया वाले क्षेत्र में ग्राम सभा की अनु​मति भी जरूरी है। फिर माइनिंग प्लान के तहत लीज डीज फाइनल होता है। फिर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सीटीओ लेना पड़ता है। इसके बाद ही बालू का खनन किया जा सकता है।

जानिए… इस बार कैसे मिलेगा वैध बालू

जिन्हें बालू घाटों का टेंडर मिले है, वे संबंधित घाटों से बालू का उठाव कर उसे स्टॉक यार्ड में जमा करेंगे। फिर उसकी बिक्री के लिए ठेकेदार छोटे-छोटे डीलर बनाएंगे। उस डीलर के माध्यम से ही लोगों को बालू मिलेगा। जिन्हें बालू की जरूरत है, वे डीलर सं संपर्क करेंगे। डीलर डिमांड के अनुरूप खनन विभाग के जेम पोर्टल पर पैसे जमा करेंगे। इसके बाद चालान मिलेगा। फिर डीलर संबंधित उपभोक्ता को सरकारी दर पर बालू उपलब्ध कराएगा।

कई जिलों में तीन माह तक ग्राम सभा की बैठक नहीं, इसलिए टेंडर में देरी

कुल 444 घाटों में से अभी तक 299 घाटों का ही टेंडर हुआ है। दरअसल शेड्यूल एरिया में टेंडर से पहले ग्राम सभा की अनुमति लेनी होती है। हाईकोर्ट ने 15 जनवरी को बालू घाटों की नीलामी पर लगी रोक हटा ली। लेकिन डीसी की अनुमति न मिलने के कारण कई जिलों में तीन महीने तक ग्राम सभा की बैठक ही नहीं हुई। इससे बालू घाटों की टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और 199 घाटों का टेंडर नहीं हो सका। उधर लीज डीड का प्रारूप भी तय नहीं था। 15 मई को लीज डीड का प्रारूप तैयार हुआ। उसके बाद अब तक 17 लीज डीड फाइनल की गई।

यहां भी गड़बड़झाला… जेएसएमडीसी के 9 माह पुराने चालान पर हो रहा बालू का अवैध कारोबार

जमशेदपुर में नए तरीके की गड़बड़ी सामने आई है। यहां झारखंड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जेएसएमडीसी) के 15 अगस्त 2025 से पहले जारी किए गए चालान पर अब भी बालू का अवैध कारोबार हो रहा है। जबकि जेएसएमडीसी की ​गतिविधियां नौ महीने से बंद है। इससे पहले लाइसेंसी स्टॉक यार्ड संचालकों ने बड़ी संख्या में चालान हासिल कर कागजों पर बालू खरीद और भंडारण दिखाया। अब उन्हीं पुराने चालान पर बालू की अवैध ढुलाई कर रहे हैं। बालू तस्कर पश्चिम बंगाल और गुमला के घाटों के चालान का इस्तेमाल करते हैं।

देखिए…कैसे ट्रैक्टरों से अवैध ढंग से ढोए जा रहे बालू

तस्वीर कोडरमा के मरकच्चो प्रखंड के सकरी नदी की है। यहां करीब 100 ट्रैक्टर से रोज खुलेआम बालू का अवैध ढंग से उठाव किया जा रहा है। जबकि इस घाट का अब तक टेंडर भी नहीं हुआ है। यहां डीसी के नेतृत्व में टास्क फोर्स भी है, लेकिन कोई असर नहीं दिख रहा। कोई कार्रवाई नहीं हो रही।



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