भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

न सीमेंट, न बालू, न सरिया…100 साल से जस का तस खड़ा...


Last Updated:

Jamshedpur Cementless Home: पूर्वी सिंहभूम के बाटालुका गांव में 100 साल पुराना तीन मंजिला कोठा घर है जिसकी खासियत जानकर हैरान हो जाएंगे. यह घर बिना सीमेंट, बालू, सरिया के केवल पत्थर और मिट्टी से बना है. इसमें चार पीढ़िया रह चुकी हैं और आज भी घर सही-सलामत है बल्कि अंदर से ठंडा रहता है.

ख़बरें फटाफट

जमशेदपुर. झारखंड को उसकी संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति से जोड़कर देखा जाता है. आधुनिकता के इस दौर में, जहां शहरों में ऊंची-ऊंची इमारतें और आधुनिक घर तेजी से बन रहे हैं, वहीं राज्य के कई गांव आज भी अपनी पुरानी पहचान और जीवनशैली को संजोए हुए हैं. इन्हीं में से एक अनोखी मिसाल पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम क्षेत्र के बाटालुका गांव में देखने को मिलती है, जहां आज भी एक ऐसा पारंपरिक घर मौजूद है, जो करीब 100 साल पुरानी वास्तुकला और ग्रामीण समझ की कहानी बयां करता है.

ना सीमेंट, ना बालू, ना सरिया
यह घर देखने में किसी पुराने किले से कम नहीं लगता, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने में न सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है, न बालू, न सरिया और न ही ढलाई की गई है. इसके बावजूद यह तीन मंजिला घर आज भी पूरी मजबूती के साथ खड़ा है और इसमें करीब 12 लोगों के परिवार का जीवन चल रहा है.

चार पीढ़ियां इसी घर में
घर के मुखिया सतीश चंद्र महतो बताते हैं कि यह घर उनके परिवार की चार पीढ़ियों से मौजूद है और आज भी उसी मजबूती के साथ लोगों को आश्रय दे रहा है. स्थानीय भाषा और संस्कृति में इस तरह के घर को ‘कोठा घर’ कहा जाता है. इसकी बनावट पूरी तरह पारंपरिक तकनीक पर आधारित है.

उन्होंने बताया कि घर बनाने में सामान्य ईंटों का उपयोग नहीं किया गया है. इसके लिए पहाड़ों से पत्थर काटकर विशेष तरीके से आकार दिया गया और फिर उसे मिट्टी, गोबर और लाल मिट्टी के मिश्रण से जोड़ा गया. यही कारण है कि तेज आंधी, बारिश या मौसम की मार का इस घर पर खास असर नहीं पड़ता.

हर मंजिल का अलग इस्तेमाल
इस घर की संरचना भी बेहद अनोखी है. तीनों मंजिलों का उपयोग अलग-अलग उद्देश्य के लिए किया जाता है. सबसे नीचे वाले हिस्से में परिवार के लोग रहते और सोते हैं. बीच वाली मंजिल में साग-सब्जियां, फल और अन्य खाद्य सामग्री रखी जाती है. यह हिस्सा प्राकृतिक रूप से इतना ठंडा रहता है कि किसी कोल्ड स्टोरेज जैसा अनुभव देता है. वहीं, सबसे ऊपरी मंजिल पर लकड़ियां रखी जाती हैं, जो गर्मी और धूप को सीधे नीचे आने से रोकती हैं.

बाहर से ठंडा रहता है घर
घर के लोगों का कहना है कि गर्मियों के मौसम में बाहर जहां तेज गर्मी महसूस होती है, वहीं इस घर के अंदर तापमान करीब 4 से 5 डिग्री तक कम महसूस होता है. यही वजह है कि मौसम कोई भी हो, घर के अंदर हमेशा ठंडक बनी रहती है. यह केवल एक घर नहीं, बल्कि झारखंड की पारंपरिक वास्तुकला, ग्रामीण ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है, जिसे आज भी परिवार ने संभालकर रखा है.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top