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झारखंड कैबिनेट की बैठक में 39 प्रस्तावों को दी गई मंजूरी; आयुष्मान आरोग्य मंदिर में संचालित होंगे ये 745 दवाखाने झारखंड सरकार ने राज्य की करीब चार करोड़ की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग राज्य के सभी 24 जिलों में 745 ‘अबुआ दवाखाने’ खोलेगा। ये दवाखाने आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) में संचालित होंगे। यह पहली बार होगा, जब एकीकृत मॉडल लागू करते हुए एलोपैथी, आयुर्वेदिक, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा पद्धति की दवाइयां एक ही जगह मिलेंगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में कुल 39 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है। राज्य में अभी एलोपैथी और आयुष दवाओं के लिए अलग-अलग केंद्र हैं। सरकार का मानना है कि मरीजों को कई बार इलाज की सही पद्धति चुनने में समस्या आती है और दवाओं की उपलब्धता में भी परेशानी होती है। यह नया मॉडल मरीजों को एक ही केंद्र पर सभी विकल्प उपलब्ध कराएगा। इससे शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी इलाज की प्रक्रिया सरल होगी। विभाग द्वारा ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी कि किसी भी स्तर पर दवाओं की उपलब्धता में कोई समस्या न रहे। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है… मॉडल फार्मेसी आउटलेट की तरह विकसित होंगे ये दवाखाने ये दवाखाने मॉडल फार्मेसी आउटलेट की तरह विकसित किए जाएंगे। अबुआ दवाखाने को एकीकृत औषधि केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए एक सुदृढ़ संरचनात्मक और संचालन प्रणाली तैयार की जाएगी। हर केंद्र का डिजाइन प्रोटोटाइप राज्य स्तर पर निर्धारित मॉडल फार्मेसी आउटलेट की तरह होगा, जो सभी जिलों में समान रूप से लागू किया जाएगा। इस मॉडल में ग्राहक सेवा काउंटर और श्रेणी के अनुसार औषधियों को रखने के लिए अलग-अलग रैक होंगे। जिला व प्रखंड स्तर पर बनेगी निगरानी समिति, जरूरत के आधार पर तैयार होगी दवाओं की सूची जिला स्तर: जिला स्तर पर उपायुक्त (डीसी) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनेगी। इसमें सिविल सर्जन सदस्य और जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी सदस्य सचिव होंगे। यह समिति स्थानीय जरूरतों के आधार पर दवाओं की सूची तैयार करेगी। प्रखंड स्तर: प्रखंड स्तर पर बीडीओ की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी, जिसमें चिकित्सा पदाधिकारी और सीएचओ (CHO) सदस्य होंगे। ये समितियां दवाखानों के नियमित निरीक्षण, प्रबंधन और रिपोर्टिंग का काम करेंगी। इस योजना की सफलता का मुख्य आधार प्रभावी और सतत औषधि आपूर्ति प्रणाली होगी। आधारभूत संरचना के लिए मिलेंगे 5 लाख, रखरखाव के लिए हर महीने 1 लाख रुपए इस योजना की एकमुश्त (शुरुआती) लागत 37.35 करोड़ रुपए अनुमानित है, जबकि प्रतिवर्ष 7.45 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। संचालन, इंटरनेट, रजिस्टर और अन्य खर्चों के लिए हर दवाखाने को एक लाख रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे। वहीं, आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को तैयार करने के लिए पांच लाख रुपए मिलेंगे। सभी दवाखानों के संचालन के लिए अलग से एक बैंक खाता खोला जाएगा। वहीं, आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कार्यरत योग प्रशिक्षकों को इन दवाखानों के संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिसके बदले उन्हें हर महीने 3,000 रुपए प्रोत्साहन राशि मिलेगी। ग्रामीण इलाकों में दवाओं की उपलब्धता बड़ी चुनौती, इस पहल से सुधरेगी व्यवस्था राज्य में वर्तमान में 3,958 स्वास्थ्य उपकेंद्र, 3,973 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 330 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 188 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 24 सदर अस्पताल हैं। इसके बावजूद 76% आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में एलोपैथी और आयुष दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। चूंकि अधिकांश ग्रामीण जनसंख्या अनुसूचित जनजाति समुदाय की है, जिनमें आयुष पद्धतियों की गहरी जड़ें हैं, इसलिए अबुआ दवाखाना मॉडल से ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। दो अन्य बड़े फैसले भी… राज्यकर्मियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता 2% बढ़ा: सातवां वेतनमान पा रहे राज्यकर्मियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता (डीए) 2% बढ़ा दिया गया है। अभी इन्हें 58% डीए मिल रहा था, जो 1 जनवरी 2026 के प्रभाव से बढ़कर 60% हो जाएगा। इसके साथ ही पांचवां और छठा वेतनमान पा रहे सरकारी कर्मियों और पेंशनरों के डीए में भी वृद्धि की गई है। छठे वेतनमान वाले कर्मियों का डीए 257% से बढ़ाकर 262% किया गया है, जबकि पांचवां वेतनमान वाले कर्मियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते को 474% से बढ़ाकर 483% किया गया है। वृद्ध व बीमार कलाकारों को अब 4,000 रुपए पेंशन: वृद्ध, गंभीर रूप से बीमार और स्थायी रूप से दिव्यांग कलाकारों की मदद के लिए उनकी पेंशन योजना में संशोधन किया गया है। अब ऐसे कलाकारों को हर महीने 4,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना के लिए सामान्य आयु सीमा 60 वर्ष तय की गई है, लेकिन गंभीर रूप से बीमार या स्थायी रूप से दिव्यांग कलाकारों के लिए उम्र का यह बंधन हटा दिया गया है। इस योजना का लाभ केवल उन कलाकारों को मिलेगा, जिनकी मासिक आय 8,000 रुपए से कम है।
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