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जून में मूंगफली की बुवाई करना सबसे बेहतर है. कृषि वैज्ञानिकों ने ‘कादरी 06’ और ‘TG 51’ उन्नत किस्में सुझाई हैं. ये कम पानी में तगड़ा उत्पादन देती हैं. बुवाई से पहले बीजों का उपचार जरूर करें. यह खेती कम लागत में किसानों को बंपर मुनाफा देगी.
देवघरः जून का महीना मूंगफली की खेती के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. खासकर झारखंड जैसे इलाकों में जहां बारिश की शुरुआत होने लगती है, वहां किसान इस समय मूंगफली की बुवाई कर अच्छा उत्पादन हासिल कर सकते हैं. खेती से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान सही किस्म का चयन करें और वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो कम लागत में भी शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है. यही वजह है कि अब कई किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मूंगफली की खेती की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं. बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है और खाने-पीने की चीजों से लेकर तेल बनाने तक इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है.
क्या कहते है कृषि वैज्ञानिक?
देवघर के सीनियर कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा ने लोकल 18 को बताया कि जून के महीने में मूंगफली की बुवाई करना सबसे उत्तम माना जाता है. इस दौरान मिट्टी में नमी अच्छी रहती है और पौधों का विकास तेजी से होता है. उन्होंने कहा कि वैसे तो मूंगफली की कई उन्नत किस्में मौजूद हैं, लेकिन झारखंड की मिट्टी और मौसम के हिसाब से कादरी 06 और TG 51 किस्म सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है. इन दोनों किस्मों की खासियत यह है कि कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देती हैं और किसानों को बेहतर कमाई का मौका मिलता है. साथ ही इनकी बाजार में मांग भी काफी ज्यादा रहती है.
मूंगफली लगाने से पहले जरूर करें ये काम
कृषि वैज्ञानिक के अनुसार मूंगफली की बुवाई हमेशा सीधी लाइन में करनी चाहिए. इससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और खेत की निराई-गुड़ाई करने में भी आसानी होती है. उन्होंने बताया कि किसान अगर बुवाई से पहले खेत की 3 से 4 बार अच्छी तरह जुताई कर लें और मिट्टी में गोबर की सड़ी हुई खाद मिला दें, तो उत्पादन कई गुना तक बढ़ सकता है. गोबर की खाद मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का काम करती है और पौधों को जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं.
बीज बोने से पहले करें उपचार
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बीज बोने से पहले उसका उपचार जरूर करें. कई बार बीजों में फफूंद रोग लग जाते हैं, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और उत्पादन पर असर पड़ता है. इसलिए बीजों को फफूंदनाशक दवा से उपचारित करना बेहद जरूरी है. इससे फसल रोगों से सुरक्षित रहती है और पौधों की वृद्धि भी अच्छी होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान खेती के शुरुआती चरण में थोड़ी सावधानी बरतें, तो बाद में उन्हें ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता.
इन दो किस्म हैं खास
कादरी 06 और TG 51 किस्म की एक और बड़ी खासियत यह है कि ये पत्ती धब्बा रोग के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी मानी जाती हैं. इस वजह से किसानों को दवाइयों पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता और खेती की लागत कम हो जाती है. वहीं दूसरी तरफ उत्पादन अच्छा होने से किसानों को बाजार में बेहतर दाम भी मिल जाते हैं. यही कारण है कि अब झारखंड के कई जिलों में किसान इन उन्नत किस्मों की खेती को तेजी से अपना रहे हैं.
कम लागत और जबरदस्त मुनाफा
अगर मौसम सामान्य रहा और किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो एक सीजन में ही शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है. कम लागत, कम पानी और बेहतर उत्पादन की वजह से मूंगफली की यह खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बनती जा रही है. यही वजह है कि अब गांवों में युवा किसान भी पारंपरिक खेती छोड़ नई तकनीक और उन्नत किस्मों की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.