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रांची के नगरी स्थित ‘रानी चुआ’ कुएं से सावन में कांवड़िये पवित्र जल भरते हैं. यह कुआं स्वर्णरेखा नदी का उद्गम स्थल है. जो भक्त सुल्तानगंज नहीं जा पाते, वे यहां से जल उठाकर 25 किमी पैदल यात्रा करते हैं. इसके बाद श्रद्धालु रांची के प्रसिद्ध पहाड़ी बाबा का जलाभिषेक करते हैं.
रांचीः क्या आप जानते हैं कि झारखंड की राजधानी रांची में एक ऐसा चमत्कारिक कुआं है, जिसे विशाल स्वर्णरेखा नदी की जन्मदाता माना जाता है. सावन के महीने में इस कुएं का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. जो श्रद्धालु सुल्तानगंज नहीं जा पाते, वे इसी पवित्र कुएं से जल भरकर कांवड़ यात्रा शुरू करते हैं और पहाड़ी बाबा का जलाभिषेक करते हैं.
महाभारत काल से जुड़ी है पौराणिक मान्यता
रांची के नगरी स्थित ‘रानी चुआ’ कुएं को स्वर्णरेखा नदी का उद्गम स्थल माना जाता है. स्थानीय पुजारी देवेंद्र बताते हैं कि अज्ञातवास के दौरान पांडव इस गांव में आए थे. तब माता द्रौपदी को रोजमर्रा के कामों के लिए पानी की सख्त जरूरत थी. माता द्रौपदी की जरूरत पूरी करने के लिए अर्जुन ने जमीन पर बाण चलाकर पानी की धारा निकाली थी. माता द्रौपदी ने यहां विशेष पूजा और अनुष्ठान किए थे, इसी कारण इस जगह का नाम ‘रानी चुआ’ पड़ा.
स्वर्णरेखा नदी की है जन्मदाता
मान्यता है कि इस नदी से पहले सोना निकलता था, इसलिए इसका नाम स्वर्णरेखा पड़ा। एक छोटा सा कुआं किस तरह एक विशाल नदी को जन्म देता है, यह अपने आप में अद्भुत है. स्थानीय लोग इस कुएं को जन्मदाता के रूप में पूजते हैं. यहां का पानी बेहद पवित्र माना जाता है. लोग अपने घरों के धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और खेतों की सिंचाई में इसी कुएं के पानी का इस्तेमाल करते हैं.
सावन में जुटती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़
सावन के महीने में रानी चुआं पर भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है. हर सोमवार को यहां से कांवड़ियों का बड़ा जत्था जल उठाकर निकलता है. यहां से पहाड़ी बाबा के मंदिर की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है. भक्त 25 किमी पैदल चलकर पहाड़ी मंदिर पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.
कठिन राह भी नहीं रोक पाती कांवड़ियों के कदम
इस पवित्र कुएं तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है. कुएं तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को चार खेतों को पार करना पड़ता है. सावन में धान की रोपनी का समय होता है, जिससे खेतों में चारों तरफ कीचड़ और गीली मिट्टी होती है. इसके बावजूद भक्तों की अटूट आस्था के आगे यह चुनौती छोटी पड़ जाती है. श्रद्धालु नंगे पांव, कीचड़ से लथपथ होकर भी खुशी-खुशी कुएं तक पहुंचते हैं, जल भरते हैं और पहाड़ी बाबा के जयकारों के साथ अपनी यात्रा शुरू करते हैं.
पूरी होती है हर मनोकामना
पुजारी देवेंद्र के अनुसार, अगर कोई भक्त सच्चे मन और सच्ची श्रद्धा से इस कुएं का जल भगवान शिव पर अर्पित करता है, तो उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि हर साल सावन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु रानी चुआं जल भरने पहुंचते हैं.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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