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Miyazaki Mango Craze In West Champaran: जापान के मियाजाकी आम, जिसे सूरज का अंडा भी कहते हैं. अभी चम्पारण में इस आम की खूब चर्चा है. यहां लोगों ने एक आम के लिए 15-18 हजार रु तक की बोली लगाई है. लेकिन मालिक ने बेचने से इनकार किया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह आम ढाई लाख रु किलो बिकता है. आइए जानते हैं इसकी खासियत.
पश्चिम चम्पारण: जिले में इन दिनों मियाजाकी आम की चर्चा खूब हो रही है. जापान के मियाजाकी से निकला यह आम फिलहाल चम्पारण के लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है. अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में करीब ढाई लाख रुपए किलो तक बिकने वाले इस चर्चित आम की खरीदारी के लिए लोग बोली तक लगा रहे हैं. पश्चिम चम्पारण जिले के मुख्यालय बेतिया से एक ऐसा ही रोचक मामला सामने आया है. जिसमें मियाजाकी किस्म के सिर्फ एक आम की खरीदारी के लिए शौकीनों ने 15 से 18 हजार रुपए तक की बोली लगा दी है.
घर की छत पर मियाजाकी आम की बागवानी
बताते चलें कि इस आम का फलन बेतिया के प्रसिद्ध स्वर्ण व्यवसायी मुनेश्वर कुमार के घर पर हुआ है. मुनेश्वर अपने बड़े भाई योगेश के साथ मिलकर नंदनी ज्वेलर्स नामक दुकान का संचालन करते हैं. उन्होंने वर्ष 2025 के सितंबर महीने में घर की छत पर प्लास्टिक बैग में मियाज़ाकी आम के पौधे को लगाया था. जिसमें फिलहाल आम का फलन बड़ी ही खूबसूरती से हुआ है. दुर्लभ और एग्जॉटिक किस्म होने की वजह से उन्होंने इसकी चर्चा कृषि–बागवानी विशेषज्ञ रविकांत पांडे से की. रविकांत पिछले 10 वर्षों से कृषि बागवानी पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट का काम करते हैं और कई कृषक समूहों का संचालन भी करते हैं.
एक आम के लिए 18 हज़ार रु तक की बोली
उन्होंने इस आम की तस्वीर को सभी समूहों में साझा किया. जिसके बाद कुछ किसानों ने इसकी खरीदारी की इच्छा जताई. बकौल रविकांत, इस दौरान आश्चर्य की बात यह रही कि लोग इसे खरीदने के लिए 15 से 18 हजार रुपए तक देने को तैयार हो गए. हालांकि मुनेश्वर ने इसे बेचने से इनकार कर दिया और कहा कि वो इसे अपने परिवार के साथ ही सर्व करना चाहते हैं. घर की गृहिणियों ने पौधे को बड़े ही चाव से लगाया है, इसलिए इसपर सबसे पहला अधिकार उनका ही है.
मियाजाकी के अन्य नाम
विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी बहुत देख भाल से चम्पारण सहित पूरे बिहार में मियाजाकी की बागवानी की जा सकती है. जापान के मियाज़ाकी शहर से संबंधित होने की वजह से इसे मियाज़ाकी नाम से ही जाना जाता है. इसका रंग लालीमा के साथ उगने वाले सूर्य की तरह होता है, इसलिए इसे ‘एग ऑफ सन’ यानी सूरज का अंडा भी कहा जाता है.
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