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UPSC vs NTA Paper Leak: नीट पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए के कायाकल्प का खाका मांगा है. आखिर यूपीएससी में कभी कोई पेपर लीक क्यों नहीं होता, जबकि एनटीए में धांधली रुकने का नाम नहीं ले रही? समझिए इसकी वजह.
UPSC vs NTA Exams: यूपीएससी और एनटीए के वर्किंग सिस्टम में कई अंतर हैं
नई दिल्ली (UPSC vs NTA Paper Leak). देश में नीट यूजी 2026 पेपर लीक और डिजिटल ‘गेस पेपर’ बिक्री कांड के बाद मचे हाहाकार के बीच सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा कि स्थिति बेहद संवेदनशील है और NTA के पूरे कायाकल्प का खाका अदालत के सामने पेश किया जाए. सुप्रीम कोर्ट की इन तल्ख टिप्पणियों के बीच अब इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि आखिर देश का परीक्षा सिस्टम कहां फेल हो रहा है.
यूपीएससी वर्सेस एनटीए: वो 7 बड़े कारण जिसने दोनों का ढर्रा बदला
यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग और एनटीए यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के काम करने के तरीके और उनकी बनावट में 7 बुनियादी अंतर हैं, जो एक को अभेद्य दीवार बनाते हैं और दूसरे को असुरक्षित:
- संवैधानिक स्वायत्तता बनाम गैर-संवैधानिक ढांचा: यूपीएससी संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत एक स्वायत्त संस्था है, जिसमें बाहरी राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप 0 होता है. दूसरी तरफ, एनटीए महज सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत संस्था है, जिसके पास वैधानिक शक्तियों की कमी है.
- स्थायी कैडर की कमी: यूपीएससी के पास अपना समर्पित और स्थायी प्रशासनिक ढांचा है जो सालों से गोपनीयता की संस्कृति को बनाए रखता है. इसके उलट, एनटीए में स्थायी कैडर की कमी है और यह पूरी तरह आउटसोर्स और प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आए कर्मचारियों के भरोसे चलती है.
- ब्लाइंड पेपर सेटिंग: यूपीएससी में प्रश्नपत्र तैयार करने वाले एक्सपर्ट को अंतिम समय तक नहीं पता होता कि उनका सेट किया हुआ पेपर चुना जाएगा या नहीं. NTA में वेंडर-बेस्ड आउटसोर्सिंग के कारण छपाई और टेक्निकल मैनेजमेंट के लिए अक्सर प्राइवेट थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर निर्भर रहना पड़ता है.
- इन-हाउस सीक्रेट प्रिंटिंग: यूपीएससी के पेपर की छपाई बहुत सुरक्षित, चुनिंदा और बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए ‘आइसोलेटेड प्रिंटिंग प्रेस’ में होती है. एनटीए के केस में दूर-दराज के अनवेरिफाइड निजी स्कूलों और केंद्रों को भी एग्जाम सेंटर बना दिया जाता है, जिससे सुरक्षा में सेंध आसान होती है.
- कमजोर लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन: यूपीएससी के पेपर के लिए किसी निजी कूरियर के बजाय सीधे राज्य पुलिस और सरकारी मजबूत कमरों (स्ट्रॉन्ग रूम) का उपयोग होता है, जबकि एनटीए में कई बार निजी कूरियर सेवाओं का सहारा लिया जाता है, जिससे रास्ते में पेपर लीक का खतरा रहता है.
- ओएमआर बेस्ड फॉर्मेट: एनटीए की नीट जैसी परीक्षाओं में ऑब्जेक्टिव (OMR) पैटर्न होता है, जिसे सॉल्वर गैंग के लिए उत्तर कुंजी के जरिए लीक करना आसान होता है. इसके उलट यूपीएससी मुख्य परीक्षा का फॉर्मेट सब्जेक्टिव और एनालिटिकल होता है, जिसे रटकर या लीक से पास नहीं कर सकते.
- सिंगल-पॉइंट फेलियर मॉडल: एनटीए के मेगा-एग्जाम में देश के किसी भी एक कोने में सुरक्षा चक्र टूटने पर पूरी राष्ट्रीय परीक्षा पर असर पड़ता है. साथ ही, परीक्षा कराने में कई कमेटियां और वेंडर्स बिखरे हुए हैं, जिससे लीक होने पर हर कोई एक-दूसरे पर उंगली उठाता है.
एनटीए की परीक्षाओं का लीक इतिहास: कब-कब दागदार हुआ सिस्टम?
एनटीए के गठन (2017) के बाद से कई बार इसकी परीक्षाओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं:
- नीट यूजी 2021 और 2024 विवाद: साल 2021 में ओएमआर शीट लीक और सॉल्वर गैंग के एक्टिव होने की खबरें आईं. इसके बाद 2024 में नीट यूजी परीक्षा के दौरान ओएसिस स्कूल (हजारीबाग) और पटना में पेपर लीक का मामला सामने आया, जिसकी जांच अभी भी सीबीआई कर रही है.
- नीट यूजी 2026 महा-संकट: मई 2026 में हुए एग्जाम में डिजिटल माध्यमों और WhatsApp ग्रुप्स पर बकायदा हूबहू ‘गेस पेपर’ (जिसमें 180 में से 120 सवाल मैच कर गए) वायरल होने के बाद सरकार को परीक्षा रद्द कर री-नीट का आदेश देना पड़ा.
- UGC NET परीक्षाओं पर संकट: साल 2022 (अक्टूबर) में इतिहास के पेपर लीक के दावे और हाल के वर्षों में डार्क नेट पर यूजीसी नेट के इनपुट मिलने के बाद परीक्षाओं की शुचिता बार-बार प्रभावित हुई है, जिससे एनटीए के डिजिटल और फिजिकल सुरक्षा चक्रों पर सवालिया निशान लग गया है.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें