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Jharkhand Rajya Sabha election: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एक ओर महागठबंधन के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है, वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख घटक दल कांग्रेस और जेएमएम के बीच अब तक अंतिम सहमति नहीं बन पाई है. इसी सिलसिले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ कांग्रेस नेताओं की महत्वपूर्ण बैठकें जारी हैं.
हेमंत सोरेन से कांग्रेस नेताओं की मैराथन बैठक, राज्यसभा सीट पर जल्द हो सकता है फैसला
रांची. झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर उम्मीदवारों के चयन और राजनीतिक गणित को लेकर पेंच पूरी तरह फंस गया है. सीटों के तालमेल और जीत के समीकरण को सुलझाने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी है, लेकिन अब तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है. संकट को सुलझाने के लिए कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क विशेष रूप से रांची में डेरा डाले हुए हैं. इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवास पर मुलाकात कर लंबी चर्चा की है, लेकिन सीटों के दावों को लेकर गतिरोध अभी भी बरकरार है.
जीत के लिए चाहिए 28 वोट, कांग्रेस के पास केवल 16
झारखंड विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार, राज्यसभा की एक सीट पर सीधे जीत दर्ज करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कुल 28 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है. इस समय कांग्रेस के पास अपने केवल 16 विधायक हैं. ऐसे में कांग्रेस को अपने उम्मीदवार की वैतरणी पार लगाने के लिए पूरी तरह से सहयोगी दलों- जेएमएम, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भाकपा माले (CPIML) के वोटों की सख्त जरूरत है. कांग्रेस अपने स्तर पर वोटों का जुगाड़ करने के लिए गठबंधन के अन्य सहयोगियों पर डोरे डाल रही है. इसी सिलसिले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य से भी सीधा संपर्क साधा है, ताकि उनके विधायकों का समर्थन हासिल किया जा सके.
जेएमएम के पास 6 ‘सरप्लस’ वोट, क्या कांग्रेस को मिलेगी मदद?
इस चुनाव में सबसे मजबूत स्थिति में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम है. महागठबंधन के भीतर विधानसभा सीटों का मौजूदा गणित इस प्रकार है:- झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM): 34 विधायक (यानी जेएमएम को अपने एक उम्मीदवार को जिताने के लिए जरूरी 28 वोटों के बाद भी उसके पास 6 अतिरिक्त (Surplus) वोट बच रहे हैं). कांग्रेस: 16 विधायक, राष्ट्रीय जनता दल (RJD): 04 विधायक और भाकपा माले (CPIML): 02 विधायक. यदि जेएमएम अपने 6 अतिरिक्त वोट कांग्रेस को ट्रांसफर कर देती है, और आरजेडी (4) एवं माले (2) के विधायक भी कांग्रेस के पक्ष में मतदान करते हैं, तो कांग्रेस का कुल आंकड़ा (16 + 6 + 4 + 2 = 28) बिल्कुल जादुई आंकड़े तक पहुंच जाएगा.
यहां फंसा हुआ है पेंच
लेकिन पेंच इसी बात पर फंसा है कि क्या जेएमएम अपनी सहयोगी कांग्रेस को यह सीट देने के लिए तैयार है, या वह खुद दोनों सीटों पर दावा ठोक रही है. दूसरी तरफ, विपक्ष में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का गणित भी मजबूत है, जहां बीजेपी के पास 21, आजसू (AJSU) के पास 1, एलजेपी (रामविलास) के पास 1 और जेडीयू के पास 1 सीट है. इसके अलावा जयराम महतो की पार्टी (JLKM) के पास भी 1 सीट है.
कांग्रेस के भीतर भी टिकट के लिए अंतर्कलह तेज
एक तरफ जहां जेएमएम के साथ गठबंधन का पेंच फंसा है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के भीतर भी इस इकलौती संभावित सीट के लिए दावेदारों की लंबी फेहरिस्त तैयार हो गई है. कांग्रेस के भीतर इस समय मुख्य रूप से तीन कद्दावर नेताओं- पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू और वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी की ओर से मजबूत दावेदारी पेश की जा रही है. तीनों गुटों के नेता आलाकमान पर टिकट के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं, जिससे प्रदेश कमान की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अंतिम फैसले और दिल्ली से मिलने वाले निर्देशों के बाद ही इस राज्यसभा सीट की धुंध पूरी तरह साफ हो पाएगी.
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