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कोडरमा के झुमरी तिलैया में विजय कुमार और उनकी पत्नी सरिता ने अपनी छत पर 100 से अधिक पौधे लगाए हैं. गमले चोरी होने के बाद उन्हें रूफटॉप गार्डनिंग का आइडिया आया. इस बगीचे में फूलों और फलों के अलावा बरगद और पीपल भी शामिल हैं. वे पौधों में केवल जैविक और घरेलू खाद का उपयोग करते हैं.
कोडरमा: झुमरी तिलैया शहर के ब्लॉक रोड निवासी विजय कुमार और उनकी धर्मपत्नी सरिता विजय ने अपनी छत को हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य का ऐसा केंद्र बना दिया है. जिसे देखकर हर कोई उनकी मेहनत, लगन और प्रकृति प्रेम की सराहना करता है. दोनों ने मिलकर अपने घर की छत पर 100 से अधिक फलदार, फूलदार और सजावटी पौधों का एक आकर्षक रूफटॉप गार्डन तैयार किया है.
घर की छत से चारों ओर फैल रही है सुगंध
विजय कुमार ने बताया कि वर्ष 1976 में जब उन्होंने अपने घर का निर्माण कराया था. तभी से उन्हें बागवानी का शौक था. शुरुआत में उन्होंने घर के मुख्य द्वार के पास बाउंड्री के भीतर कई गमलों में फूलों के पौधे लगाए थे. लेकिन एक रात अचानक उनके 11 गमले चोरी हो गए. इस घटना के बाद उन्होंने पौधों को सुरक्षित रखने के लिए घर के भीतर और बाद में छत पर स्थानांतरित कर दिया. तभी से उनकी छत पर बागवानी का सफर लगातार आगे बढ़ता गया. आज उनकी छत पर जैस्मीन, गुलाब, बोगनविलिया, मधुमालती, लिली, सदाबहार, रजनीगंधा, कनेर, गेंदा और उड़हुल समेत कई प्रजातियों के फूलों के पौधे लहलहा रहे हैं. वहीं फलदार पौधों में अनार, अमरूद, आम और नींबू जैसे पौधे भी शामिल हैं. इन पौधों की देखभाल पति-पत्नी स्वयं करते हैं.
सुखा गोबर और पत्तियों के राख के बनाते खाद
उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी के दिनों में भी वे और उनकी पत्नी सुबह-शाम नियमित रूप से पौधों की सिंचाई करते हैं. पौधों को स्वस्थ रखने के लिए वे किसी प्रकार के रासायनिक उर्वरक का उपयोग नहीं करते. इसके बजाय वे पूरी तरह जैविक तरीके अपनाते हैं. दूध लेने के दौरान स्थानीय खटाल से गोबर लाकर उसे अच्छी तरह सुखाते हैं और फिर खाद के रूप में गमलों में इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा पौधों से झड़ने वाली सूखी पत्तियों को भी वे फेंकते नहीं हैं. इन पत्तियों को एकत्रित कर सुखाया जाता है और बाद में जलाकर उसकी राख तैयार की जाती है. यह राख भी पौधों के लिए प्राकृतिक खाद का काम करती है. उनका मानना है कि जैविक खाद के उपयोग से पौधे अधिक स्वस्थ और लंबे समय तक हरे-भरे बने रहते हैं.
छत पर ही बरगद और पीपल भी
उन्होंने बताया कि हर पौधे की जरूरत अलग होती है. कुछ पौधों को अधिक धूप चाहिए तो कुछ को कम, वहीं पानी की मात्रा भी पौधे के अनुसार निर्धारित की जाती है. इसी कारण सभी पौधे अच्छी तरह विकसित हो रहे हैं. रूफटॉप गार्डन की सबसे खास बात यह है कि यहां बरगद और पीपल जैसे पौधे भी गमलों में लगाए गए हैं. सीमित मिट्टी होने के कारण इनकी वृद्धि नियंत्रित रहती है और समय-समय पर उनकी कटिंग कर दी जाती है. हाल ही में सरिता विजय ने छत पर लगे बरगद के पौधे के पास ही वट सावित्री पूजा भी संपन्न की थी.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.