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बीते दिनों रांची के गोंदा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार हुए साइबर अपराधियों ने पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे किए. इनके ठगी का तरीका आपको चौंका देगा. ये लोगों को झांसे में फंसाकर उनके नाम पर म्यूल अकाउंट खोलते हैं. अकाउंट खुलवाने के बदले उन लोगों को कुछ पैसा देते हैं.
रांची: साइबर अपराध का नेटवर्क लगातार नए रूप में फैलता जा रहा है. साइबर फ्रॉड के लिए बदनाम जामताड़ा का साइबर मॉड्यूल अब रांची में भी तेजी से पांव पसार रहा है. इस गिरोह के निशाने पर नीचे तबके के लोगों के साथ ही व्यवसाई वर्ग भी होता है. ये दोनों को अपने जाल में फंसा रहे हैं. लोगों को फंसाने के लिए अपराधी राहुल सिंह, राहुल दुबे, प्रिंस खान और पीएलएफआई जैसे संगठन और गैंगस्टर के नाम का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं.
जामताड़ा से शुरू हुआ साइबर फ्रॉड का काला धंधा अब झारखंड राज्य की राजधानी रांची में भी फल फूल रहा है. जामताड़ा से जुड़े साइबर अपराधी नए युवाओं को ट्रेंड कर साइबर अपराध करवा रहे हैं. बीते दिनों रांची के गोंदा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार हुए साइबर अपराधियों ने पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे किए. इनके ठगी का तरीका आपको चौंका देगा. ये लोगों को झांसे में फंसाकर उनके नाम पर म्यूल अकाउंट खोलते हैं. अकाउंट खुलवाने के बदले उन लोगों को कुछ पैसा देते हैं. यही वजह है कि ये लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को झांसे में लेते हैं और उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर बैंक खाता खुलवाते हैं. इसके बाद उनकी बैंक पासबुक और एटीम साइबर अजराधी खुद अपने पास रख लेते हैं. जिनका आधार कार्ड इस्तेमाल किया जाता है उन्हें मात्र 2 हजार रुपया ही दिया जाता था. एक-एक व्यक्ति के 5-6 बैंक खाते खुलवाए जाते थे. इसके साथ ही बैंक खातों का एड्रेस भी चेंज किया जाता था.
साइबर अपराधी नया पैंतरा अपनाते हुए बड़े गैंगस्टर राहुल सिंह, राहुल दुबे और पीएलएफआई के नाम पर वसूली करते थे. असली आधार कार्ड को सबसे पहले साइबर अपराधी नकली बनाते हैं. उसके बाद उसे लेकर वह बैंक में फर्जी पते पर बैंक अकाउंट खुलवाते थे. इसके बाद लोगों से उनकी बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड लेकर उन्हें वो हजार रुपए बतौर कमीशन दिया करते थे.
शहर में रहकर व्यवसायियों के नंबर का भी जुगाड़ करते थे. गोंदा थाना क्षेत्र के रॉक व्यू अपार्टमेंट में रेड में कई सामना मिले हैं जिसमें बैंक पासबुक, एटीएम सहित कई समान शामिल हैं. ये साइबर अपराधी रांची में रहकर बड़े व्यवसायियों के नंबर का जुगाड़ करते थे. उन व्यवसायियों को गैंगस्टर के नाम पर धमकी भरे कॉल और मैसेज किए जाते थे. ये पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया था. मामले में सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि ये अपराधी व्यवसायियों से कैश रिसीव कर उसे आसानी से विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करते थे.
ठगी का ये तरीका पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था. ये समाज में ईमानदारी से रहने और कमाने वाले लोगों के लिए भय जैसा माहौल भी था. ऐसे में यह पुलिस के लिए बड़ी सफलता है.
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