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दुनियाभर में तिलचट्टों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स बनाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल अमेरिकन कॉकरोच का होता है. ये कॉकरोच भारत में खूब होता है, तो ये जान लें कि जो मॉस्चराइजर और ब्यूटी प्रोडक्ट्स आप आराम से लगाते हैं, उसमें तिलचट्टे से निकलने वाले प्रोटीन और अन्य तत्वों का इस्तेमाल खूब होता है.
तिलचट्टे से बनने वाले कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स की लिस्ट और उनमें इसका क्या काम है, ये समझना थोड़ा रोचक है. जैसे स्किनकेयर प्रोड्क्ट्स में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. तिलचट्टे के अर्क का इस्तेमाल ज्यादातर त्वचा से जुड़े प्रोडक्ट्स में किया जाता है, क्योंकि इसमें रिपेयर, हाइड्रेशन और एंटी-एजिंग के गुण होते हैं. (ai image)
एक पेटेंट के अनुसार, भारत में मिलने वाला कॉकरोच, जिसे अमेरिकन कॉकरोच प्रजाति भी कहते हैं, उसका एक्सट्रैक्ट वाला फेस वॉश त्वचा को मॉइस्चराइज़ और रिपेयर करने में मदद करता है. फेशियल मास्क और टोनर भी इससे बनाए जाते हैं, जो त्वचा के रंग को निखारने, रोमछिद्रों को कम करने और त्वचा की बनावट को सुधारने का काम करता है. मॉइस्चराइज़र और हैंड क्रीम तो हम अक्सर ही लगाते हैं, ये हमारी त्वचा को गहराई से नमी (हाइड्रेशन) प्रदान करता है और फटने से बचाता है. (open ai image)
तिलचट्टे में पाए जाने वाले पेप्टाइड्स और एमिनो एसिड्स कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देते हैं. इससे त्वचा को जवां रखने और झुर्रियों को कम करने में मदद मिलती है. जिससे एंटी एजिंग क्रीम और सीरम बनते हैं. कुछ रिसर्च में ये पाया गया कि इसके अर्क में सन-स्क्रीन जैसे गुण भी हो सकते हैं. कॉकरोच एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल बालों के लिए भी होता है. इसका मुख्य फोकस स्कैल्प की सेहत और बालों की ग्रोथ पर होता है. (google ai image)
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हैरानी की बात है लेकिन तिलचट्टे से निकला एक तत्व आपके मेकअप में भी छुपा हो सकता है. कई बड़े ब्रांड्स के फाउंडेशन में इसे एक कंडीशनर और ह्यूमेक्टेंट के तौर पर मिलाया जाता है. अब हम आपको बताते हैं कि तिलचट्टे में मौजूद चिटिन और चिटोसन नाम के तत्व बहुत फायदेमंद होते हैं. ये त्वचा की मरम्मत भी करते हैं. साथ ही घाव भरने में तेजी लाता है. डैमेज्ड स्किन को रिपेयर करता है. साथ ही जब ये एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी के रूप में काम करता है तो त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाता है और सूजन को कम करता है. (ai image)
कॉस्मेटिक्स में जिस तिलचट्टे का इस्तेमाल होता है, वह गंदगी वाला घरेलू तिलचट्टा नहीं होता. इसे फार्मों में बेहद साफ और नियंत्रित वातावरण में खासतौर पर पाला जाता है. इसके बाद इनसे केमिकल प्रोसेस के जरिए सिर्फ जरूरी तत्व जैसे चिटोसन निकाले जाते हैं और कई बार परीक्षणों के बाद ही प्रोडक्ट्स में मिलाया जाता है. चीन जैसे देशों में ये FDA (US) और अन्य एजेंसियों से सेफ्टी परमिशन लेकर ही बाजार में आता है. (ai image)
अगर आप अपने प्रोडक्ट के इंग्रीडिएंट्स लिस्ट में Chitin (चिटिन), Chitosan (चिटोसन), या Deacetylated Chitin देखते हैं, तो हो सकता है कि यह तिलचट्टे से आया हो, हालांकि ये तत्व झींगा और केकड़े के छिलकों से भी निकाले जाते हैं. बहुत कम लोगों को यह पता है, लेकिन साइंस की दुनिया में अमेरिकन कॉकरोच वास्तव में एक “जैविक खजाना” माना जाता है, जिसका इस्तेमाल दवाइयों से लेकर हाई-एंड स्किनकेयर तक में हो रहा है. (ai image)
महिलाओं के फेशियल मास्क, रिपेयरिंग सीरम, एंटी-एजिंग क्रीम, हैंड क्रीम, लिप बाम में इससे निकलने वाले तत्वों का इस्तेमाल होता है. हेयर केयर में भी शैम्पू, हेयर टॉनिक, कंडीशनर में इसका इस्तेमाल बालों की सेहत और ग्रोथ को बेहतर करने में होता है. मेकअप में लिक्विड फाउंडेशन, लिपस्टिक जैसी प्रोड्क्ट्स में कॉक्रोच से निकलने वाले तत्व यूज किए जाते हैं. (ai image)
प्रोडक्ट्स के लिए जिन तिलचट्टों को पाला जाता है, उन्हें बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया, कीटनाशकों और गंदगी से दूर, पूरी तरह से नियंत्रित और स्टेराइल वातावरण में रखा जाता है. इन्हें सीधे पीसकर प्रोडक्ट में नहीं मिलाया जाता. वैज्ञानिक प्रक्रियाओं द्वारा इनसे केवल जरूरी केमिकल को निकाला जाता है, जिसे बाद में कई बार शुद्ध किया जाता है. (ai image)