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If the name is not in the 2003 voter list, then the...


झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत अब तक 80% से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। प्रक्रिया को और तेज करने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर मैप्ड और अनमैप्ड मतदाताओं की सूची प्रकाशित कर दी गई है।

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ऐसे में मतदाताओं के मन में कई सवाल हैं—2003 की मतदाता सूची से मैपिंग क्या है, किन लोगों को दस्तावेज जमा करने होंगे, अनमैप्ड मतदाता किसे माना जाएगा और क्या उनका नाम वोटर लिस्ट से हट सकता है? इन सभी सवालों और एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े भ्रम को दूर करने के लिए भास्कर ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार से बातचीत कर पूरी प्रक्रिया को समझा।

भास्कर एक्सप्लेनर: पिछले SIR से नाम नहीं जोड़ पाए तो अनमैप्ड वोटर माने जाएंगे

सवाल: 2003 की मतदाता सूची से वोटर कार्ड की मैपिंग का क्या मतलब है? जवाब: झारखंड में पिछला विशेष गहन पुनरीक्षण 2003 में हुआ था। यदि किसी मतदाता का नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज है, तो उनकी नागरिकता स्थापित मानी जाएगी। ऐसे मतदाताओं को हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र के अलावा कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा नहीं करना होगा।

सवाल: 2003 की मतदाता सूची में अपना नाम कैसे खोज सकते हैं? जवाब: सीईओ झारखंड की वेबसाइट पर उपलब्ध ‘Search Your Name in ERoll Published in 2003’ लिंक के माध्यम से नाम खोजा जा सकता है। इसके अलावा voters.eci.gov.in पर भी पिछली एसआईआर सूची देखी जा सकती है। इसकी हार्ड कॉपी संबंधित बीएलओ (BLO) के पास भी उपलब्ध है।

सवाल: अनमैप्ड मतदाता कौन हैं? जवाब: जो मतदाता अपना नाम या अपने माता-पिता, दादा-दादी अथवा नाना-नानी का नाम पिछली एसआईआर सूची से नहीं जोड़ पाते हैं, वे ‘अनमैप्ड मतदाता’ माने जाएंगे।

सवाल: क्या अनमैप्ड मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा? जवाब: नहीं। ऐसे मतदाताओं को पहले नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद उन्हें निर्धारित 11 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया जाएगा।

सवाल: क्या अनमैप्ड वोटर को भी गणना पत्र मिलेगा? जवाब: हां। वर्तमान 2026 की मतदाता सूची में शामिल प्रत्येक मतदाता, चाहे वह मैप्ड हो या अनमैप्ड, उसे बीएलओ की ओर से दो गणना प्रपत्र दिए जाएंगे। इनमें से एक फॉर्म भरकर जमा करना होगा, जबकि दूसरा आपके पास रहेगा।

सवाल: क्या कोई मतदाता खुद ऑनलाइन मैपिंग कर सकता है? जवाब: नहीं। निर्वाचन विभाग के अनुसार मैपिंग केवल बीएलओ के माध्यम से ही की जाएगी। मतदाता को आवश्यक जानकारी बीएलओ को उपलब्ध करानी होगी।

सवाल: कैसे जानेंगे कि नाम मैप हुआ है या नहीं? जवाब: इसकी जानकारी बीएलओ से प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा अनमैप्ड मतदाताओं की सूची मतदान केंद्रों के सूचना पट्ट (Notice Board) और सीईओ झारखंड की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।

सवाल: माता-पिता का नाम 2003 की सूची में नहीं है, लेकिन दादा-दादी का नाम है; तो क्या मैपिंग हो जाएगी? जवाब: हां। ऐसी स्थिति में माता-पिता का नाम न होने पर भी दादा-दादी या नाना-नानी के नाम के आधार पर मैपिंग की जा सकती है।

सवाल: माता-पिता और दादा-दादी का निधन हो चुका है, नाम भी सूची में नहीं है और कोई दस्तावेज भी नहीं है, तब क्या होगा? जवाब: ऐसे मामलों में नोटिस के जवाब में घोषणा-पत्र के साथ 11 निर्धारित दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज जमा करना होगा। यदि कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होता है, तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के तहत निर्णय लिया जाएगा।

सवाल: जिन विवाहित महिलाओं का मायके से संपर्क नहीं है, उनके लिए क्या व्यवस्था है? जवाब: महिला मतदाताओं की मैपिंग पति या ससुराल के आधार पर नहीं होगी। उन्हें अपने माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी के आधार पर ही मैपिंग करानी होगी या आवश्यक मायके के दस्तावेज जमा करने होंगे। इस प्रक्रिया में पति या ससुराल पक्ष के दस्तावेज मान्य नहीं होंगे।

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“प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाया जा रहा है ताकि कोई भी वैध मतदाता छूट न जाए।” > — के. रवि कुमार, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड

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