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मानव-हाथी संघर्ष पर देश का पहला अत्याधुनिक शोध केंद्र पलामू में बना,...


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Palamu Tiger Reserve Elephants: पलामू टाइगर रिजर्व में करीब 180 एशियाई हाथी हैं. यहां देश का पहला मानव हाथी संघर्ष अनुसंधान केंद्र बन रहा है. इसकी एआई और ‘हमार हाथी’ एप से निगरानी की जाती है.

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पलामू: झारखंड का पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) आज सिर्फ बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि हाथियों के संरक्षण और शोध के लिए भी देशभर में अपनी अलग पहचान बना रहा है. कभी यह इलाका बाघों की भूमि के रूप में प्रसिद्ध था, लेकिन समय के साथ यहां हाथियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. आज पलामू टाइगर रिजर्व में करीब 180 एशियाई हाथी निवास करते हैं, जो अपने व्यवहार और स्वभाव के कारण देश के अन्य क्षेत्रों के हाथियों से अलग मानी जाती हैं.

पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने लोकल 18 को बताया कि यहां के हाथी अपेक्षाकृत शांत स्वभाव के होते हैं. आमतौर पर ये इंसानों पर बिना कारण हमला नहीं करते और अन्य क्षेत्रों की तुलना में मानव बस्तियों को कम नुकसान पहुंचाते हैं. यही वजह है कि इन हाथियों के व्यवहार और उनकी प्रजातिगत विशेषताओं पर लगातार शोध किया जा रहा है. इनके अध्ययन के निष्कर्ष देश के अन्य टाइगर रिजर्व और वन्यजीव संरक्षण संस्थानों के साथ भी साझा किए जाते हैं.

यहां है देश का पहला मानव-हाथी संघर्ष अनुसंधान केंद्र

पलामू टाइगर रिजर्व की सबसे बड़ी उपलब्धि देश का पहला आधुनिक तकनीक वाला मानव-हाथी संघर्ष अनुसंधान केंद्र (Human-Elephant Conflict Research Centre) है. इसे अत्याधुनिक तरीके से बनाया जाएगा. इस केंद्र की स्थापना मानव और हाथी के बीच होने वाले संघर्ष को कम करने तथा हाथियों के व्यवहार को बेहतर तरीके से समझने के उद्देश्य से की गई है. यहां आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है. इससे हाथियों के मूवमेंट, उनके प्रवास मार्ग और व्यवहार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जा रही हैं.

जानें कैसे होती है हाथी की निगरानी

उन्होंने कहा कि हाथियों की निगरानी के लिए ‘हमार हाथी’ एप्लीकेशन का भी उपयोग किया जा रहा है. इसके माध्यम से वन विभाग और स्थानीय लोग हाथियों की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही क्षेत्र में एलिफेंट ऑब्जर्वेटरी विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है. इसके जरिए हाथियों के झुंड, उनके रहन-सहन और संरक्षण संबंधी गतिविधियों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा.

मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए पीटीआर प्रबंधन कई स्थानीय उपाय भी अपना रहा है. चिली स्मोकिंग, मोबिल ऑयल से तैयार जूट बैग और ‘हाथी मित्र’ जैसी पहलें लोगों को सुरक्षित रखने में मदद कर रही हैं. इसके अलावा हाथियों के प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाने के लिए घास के मैदान विकसित किए जा रहे हैं, बांस रोपण किया जा रहा है और पानी की स्थायी व्यवस्था की जा रही है. इन प्रयासों के कारण पलामू आज हाथी संरक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें



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