आज से 58 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब वेनेजुएला की राजधानी कराकस की ऐतिहासिक यात्रा की थी, तब शायद ही किसी ने नहीं सोचा होगा कि भविष्य में यही देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए इतना महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है. अमेरिका और ईरान के बीच जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी ने दुनियाभर में तेल की सप्लाई को प्रभावित किया है, तब दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश वेनेजुएला की ओर भारत की नजरें फिर से टिक गई हैं. ऐसे समय में वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की भारत यात्रा को रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है.
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब जनवरी में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिगेज ने कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद संभाला है. भारत ने आधिकारिक रूप से उन्हें ‘एक्टिंग प्रेसिडेंट’ के रूप में मान्यता दी है.
होर्मुज संकट और भारत की ऊर्जा चिंता
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं.
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. अगर यहां लंबे समय तक संकट बना रहता है तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए तेल की उपलब्धता और कीमतें दोनों प्रभावित हो सकती हैं. ऐसे में वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोत भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं.
दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार
एक समय वेनेजुएला भारत के प्रमुख तेल सप्लायर में शामिल था. वर्ष 2019 में वह भारत का पांचवां सबसे बड़ा तेल सप्लायर था. उस समय भारत ने लगभग 1.6 करोड़ टन वेनेजुएलाई कच्चा तेल आयात किया था. तब दोनों देशों के बीच व्यापार 6.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जिसमें अधिकांश हिस्सा तेल आयात का था.
1968 में इंदिरा गांधी ने रखी थी रिश्तों की नींव
10 अक्टूबर 1968 को जब इंदिरा गांधी का विमान कराकस के सिमोन बोलिवार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, तब उनका भव्य स्वागत किया गया था. वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति राउल लियोनी खुद अपने मंत्रिमंडल के साथ उनकी अगवानी के लिए मौजूद थे. भारतीय और वेनेजुएलाई झंडों के बीच दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए गए और इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में मील का पत्थर माना गया.
हालांकि इंदिरा गांधी का यह दौरा केवल 18 घंटे का था, लेकिन उसने दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास और आर्थिक सहयोग की मजबूत नींव रखी.
भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा?
डेल्सी रोड्रिगेज की यात्रा केवल एक औपचारिक राजनयिक दौरा नहीं मानी जा रही. ऐसे समय में जब भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए नए सप्लायर देशों पर मंथन कर रहा है, वेनेजुएला एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर सकता है.
भारत पहले ही रूस, सऊदी अरब और इराक जैसे देशों से तेल खरीदता रहा है. लेकिन रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध और पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए नए सप्लायर देशों पर मंथन कर रहा है. ऐसे समय वेनेजुएला एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर सकता है. इसके अलावा दोनों देश ऊर्जा निवेश, रिफाइनिंग, फार्मास्यूटिकल्स और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.
रणनीतिक रिश्तों का नया अध्याय
डेल्सी रोड्रिगेज की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब जियो पॉलिटिक्स तेजी से बदल रही है. एक ओर पश्चिम एशिया में युद्ध के कराण ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, तो दूसरी ओर भारत अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने की नीति पर काम कर रहा है. ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश के साथ संबंधों को नई मजबूती देना भारत की रणनीतिक जरूरत भी है और आर्थिक प्राथमिकता भी.
58 साल पहले इंदिरा गांधी ने जिस रिश्ते की नींव रखी थी, वह अब एक नए दौर में प्रवेश करता दिख रहा है. होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएला भारत के लिए सिर्फ एक मित्र देश नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण सहारा भी बन सकता है.