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Kangra Trains: हिमाचल प्रदेश में करीब चार साल बाद मंगलवार को पठानकोट–जोगिंदरनगर रेलवे लाइन पर रेल सेवा फिर शुरू हो गई.अगस्त 2022 में बाढ़ के दौरान हिमाचल-पंजाब सीमा पर चक्की रेलवे पुल बह जाने से रेल सेवाएं प्रभावित हुई थीं. केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय के प्रयासों से लगभग 70 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक तकनीक के जरिए नए पुल का निर्माण किया गया, जिससे रेल सेवाओं की बहाली संभव हो सकी.
इस रेल रूट पर अगस्त 2023 से ट्रेनें बंद थीं.
धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश में करीब चार साल बाद मंगलवार को पठानकोट–जोगिंदरनगर रेलवे लाइन पर रेल सेवा फिर शुरू हो गई, जिससे कांगड़ा और आसपास के इलाकों के हजारों लोगों के लिए जरूरी ट्रांसपोर्ट कनेक्शन वापस मिल गया है.
अधिकारियों ने बताया कि रेल सेवा शुरू होने पर पूरे इलाके में खुशी का माहौल था और यात्रियों ने इसका स्वागत किया. कई यात्रियों ने बताया कि ट्रेन से सफर करने पर काफी पैसे बचते हैं, क्योंकि जोगिंदरनगर तक बस का किराया करीब 392 रुपये है, जबकि ट्रेन का किराया सिर्फ 40 रुपये है. मंगलवार को इस रूट पर करीब 60 लोगों ने सफर किया.
मंगलवार सुबह पठानकोट सिटी नैरो गेज रेलवे स्टेशन से सात-सात डिब्बों वाली दो ट्रेनें चलीं. ट्रेन नंबर 62465 सुबह पांच बजे चली, और ट्रेन नंबर 52467 सुबह सात बजे रवाना हुई.
हिमाचल प्रदेश की तरफ से सेवा सुबह 8:30 बजे कांगड़ा रेलवे स्टेशन से शुरू हुई. पंजाब-हिमाचल प्रदेश सीमा पर चक्की रेलवे पुल का बड़ा हिस्सा बाढ़ में टूट गया था, जिससे इस रेल रूट पर अगस्त 2023 से ट्रेनें बंद थीं. रेल कनेक्शन बहाल करने के लिए रेल मंत्रालय ने तेजी से काम शुरू किया और करीब 70 करोड़ रुपये खर्च करके नया रेलवे पुल बनाया. रेलवे के सीनियर अधिकारियों ने ट्रैक का पूरा निरीक्षण और सफल ट्रायल के बाद अब नियमित सेवा फिर शुरू कर दी है.
हमीरपुर के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर सेवा शुरू की. ठाकुर ने कहा कि रेल सेवा बहाल होने में उम्मीद से ज्यादा वक्त लगा, लेकिन इस मुद्दे को लगातार केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय के सामने रखा गया. उन्होंने कहा, ‘यह रेलवे लाइन पहाड़ी इलाकों के लोगों के लिए सिर्फ ट्रांसपोर्ट नहीं, बल्कि उनकी लाइफलाइन है.’ उन्होंने बताया कि इसे जल्दी शुरू करने के लिए लगातार कोशिश की गई.
164 किमी लंबा सफर
गौर रहे कि पंजाब के पठानकोट से हिमाचल के जोगिंदरनगर तक 164 किमी लंबी ऐतिहासिक नैरो-गेज रेल लाइन है. धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं और हरी-भरी वादियों से गुजरने वाला यह मार्ग यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल है.
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Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें