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एजेंसी नहीं दे रही एक बूंद पानी:सदर अस्पताल में बिना पानी पिलाए...




सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों को भोजन तो मिल रहा है, लेकिन उनके हिस्से का पानी सिस्टम गटक रहा है। मरीजों के भोजन और पानी के नाम पर हर दिन लूट मची है। राज्य सरकार मरीजों को भोजन के साथ स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए नियमित भुगतान कर रही है, लेकिन मरीजों के हलक तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच रही। अस्पताल प्रबंधन और कैंटीन एजेंसी गठजोड़ करके मरीजों के हिस्से का पानी सिर्फ कागजों पर पिला रहे हैं। ऐसा करके हर साल करीब 26 लाख रुपए सीधे जेब में डाले जा रहे हैं, जबकि बेबस मरीज अपने पैसे से पानी खरीदकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। भास्कर ने जब मरीज का परिजन बनकर इस पूरे मामले का स्टिंग किया, तो सिस्टम की बेशर्मी खुलकर सामने आ गई। पानी मांगने पर एजेंसी के कर्मियों ने साफ इनकार कर दिया। हद तो तब हो गई जब कर्मियों ने ताल ठोकते हुए कहा कि अस्पताल के अफसरों से पानी मांग लो। फरवरी में हुए सदर अस्पताल के विशेष ऑडिट में भी कैंटीन की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे। ऑडिट टीम ने प्रबंधन से शिकायत कर आवश्यक सुधार की अनुशंसा की थी, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। हैरानी की बात यह है कि अधिकारी नियमित रूप से कैंटीन का निरीक्षण भी करते हैं।

करार के दस्तावेज में स्पष्ट लिखा है… पानी भी देना है सदर अस्पताल प्रबंधन ने 31 जुलाई 2024 को ‘राहुल एंटरप्राइजेज’ के साथ मरीजों के भोजन और पेयजल के लिए तीन साल का अनुबंध किया था। भास्कर के पास मौजूद करार के दस्तावेजों में स्पष्ट लिखा है कि एजेंसी को अस्पताल में भर्ती प्रत्येक मरीज को भोजन के साथ पीने का स्वच्छ पानी भी उपलब्ध कराना है। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन प्रतिदिन प्रति मरीज 97 रुपए का भुगतान एजेंसी को करता है। घोटाले का गणित: एक मरीज पर नौ रु. की बचत, ऐसे जेब में डाले जा रहे हर साल 25.92 लाख रु. सदर अस्पताल में लगभग 800 बेड की क्षमता है। कैंटीन संचालक के अनुसार, यदि भर्ती मरीजों को भोजन के साथ पानी दिया जाए, तो एक मरीज पर प्रतिदिन कम से कम नौ रुपए सिर्फ पानी पर खर्च होंगे। एजेंसी पैसे बचाकर मुनाफा कमा रही है। एजेंसी की बेशर्मी… महंगाई का रोना रोकर झाड़ रहे पल्ला: पानी चुराने वाली एजेंसी के संचालक मुकेश कुमार अपनी सफाई में महंगाई का तर्क देते हैं। उनका कहना है कि करार के बाद महंगाई काफी बढ़ गई है। 97 रुपए में दो समय का भोजन और एक समय का नाश्ता देना है। अगर तीनों समय 250 एमएल भी पानी दें, तो नौ रुपए सिर्फ पानी पर खर्च होंगे। भास्कर स्टिंग – भास्कर रिपोर्टर मरीज का परिजन बनकर अस्पताल में रहा। जब एजेंसी के कर्मी भोजन वितरण करने आए, तो रिपोर्टर ने उनसे पानी की मांग की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश… पानी चाहिए… डीएस से बात कीजिए (नोट: कर्मी ने डीएस का मतलब डिप्टी सुपरिंटेंडेंट बताया) हम सिर्फ खाना देते हैं, आज तक पानी नहीं दिया



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