चंदौली: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन जिले के मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र के हिनौली गांव में यह योजना धरातल पर पूरी तरह विफल नजर आ रही है. गांव में लाखों रुपये की लागत से बनाई गई पानी की टंकी आज भी केवल शोपीस बनकर खड़ी है. ग्रामीणों का आरोप है कि टंकी बने लगभग डेढ़ से दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक किसी भी घर में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है. भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
भीषण गर्मी में हो रही पानी की गंभीर समस्या
लोकल18 के संवाददाता ने जब हिनौली गांव पहुंचकर जमीनी हकीकत की पड़ताल की, तो ग्रामीणों ने जल जीवन मिशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए. गांव के निवासी संतोष कुमार पंकज ने बताया कि ग्राम सभा हिनौली में केंद्र सरकार के फंड से जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था. उन्होंने कहा कि टंकी का निर्माण हुए लगभग डेढ़ वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक इसमें पानी भरकर गांव में सप्लाई नहीं की गई.
संतोष कुमार पंकज ने आरोप लगाया कि गांव में पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन अधिकांश घरों में कनेक्शन तक नहीं दिया गया. उन्होंने स्वयं को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि उनके घर में भी आज तक कनेक्शन नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि टंकी बनने के बाद से न तो उसमें पानी भरा गया और न ही किसी घर तक पानी पहुंचाया गया, ऐसे में ग्रामीण इस भीषण गर्मी में पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं.
लोगों को पीने के लिए खरीदना पड़ रहा पानी
उन्होंने निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि इस पूरी व्यवस्था के लिए संबंधित ठेकेदार, जूनियर इंजीनियर (जेई) और अन्य जिम्मेदार अधिकारी उत्तरदायी हैं. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा खर्च किए गए धन का सही उपयोग नहीं हुआ और योजना का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पाया. उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और जिलाधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
उन्होंने कहा कि गांव में पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि जिन लोगों के घरों में हैंडपंप हैं, वे किसी तरह अपना काम चला रहे हैं, जिनके पास आर्थिक संसाधन हैं, उन्होंने निजी समर्सिबल पंप लगवा लिए हैं. वहीं, गरीब परिवारों को दूसरों के घरों से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं. कई लोगों को पीने के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है.
जमीन के अंदर दबे हुए हैं पानी के सभी पाइप
गांव के एक अन्य निवासी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि टंकी बनने के बाद एक-दो बार तकनीकी जांच हुई थी, लेकिन उसके बाद कभी पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई. उन्होंने बताया कि टंकी संचालन के लिए आवश्यक बिजली लाइन या सोलर सिस्टम की भी समुचित व्यवस्था नहीं दिखाई देती. उन्होंने कहा लगभग 500 मीटर दूर सोलर प्लेट लगाने की बात कही गई थी, लेकिन वहां भी व्यवस्था पूरी नहीं की गई. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि घरों तक पाइपलाइन तो पहुंचा दी गई है, लेकिन न तो टोटी लगाई गई है और न ही पानी की कोई व्यवस्था शुरू हुई है. जमीन के अंदर पाइप दबे हुए हैं, लेकिन उनमें आज तक पानी नहीं आया. उन्होंने कहा कि ग्रामीण केवल इंतजार कर रहे हैं कि आखिर यह योजना कब शुरू होगी और कब उन्हें इसका लाभ मिलेगा.
इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया ग्राम प्रधान
वहीं, ग्रामीण कन्हैया लाल ने बताया कि उनके मोहल्ले तक भी पानी नहीं पहुंचा है. उन्होंने कहा कि लगभग दो वर्ष का समय बीत गया, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं. गर्मी के मौसम में पानी की समस्या और भी गंभीर हो जाती है. उन्होंने बताया कि कई परिवार बाजार से पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं. कन्हैया लाल ने ग्राम प्रधान की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान ने अब तक इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया. ग्रामीणों के अनुसार आज तक किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर टंकी चालू क्यों नहीं हो रही है और गांव को पानी कब मिलेगा?
सफेद हाथी साबित हो रही है यह पानी की टंकी
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने हर घर जल पहुंचाने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की थी, लेकिन हिनौली गांव में यह योजना केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है. गांव में बनी विशाल पानी की टंकी लोगों को रोज दिखाई देती है, लेकिन उससे मिलने वाला पानी आज तक किसी को नसीब नहीं हुआ. स्थानीय लोगों का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई यह टंकी अब सफेद हाथी साबित हो रही है. ग्रामीणों के अनुसार यदि समय रहते इस परियोजना को चालू नहीं किया गया, तो सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा और लोगों का विश्वास भी कमजोर होगा.
ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन कब लेता है संज्ञान
ग्राउंड जीरो पर की गई पड़ताल में यह साफ दिखाई दिया कि गांव में पानी की समस्या वास्तविक और गंभीर है. कहीं पाइपलाइन होने के बावजूद पानी नहीं पहुंच रहा है, तो कहीं कनेक्शन ही नहीं दिए गए हैं, ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल मामले की जांच कराए, परियोजना की खामियों को दूर करे और दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे. अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की शिकायतों पर प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है और जल जीवन मिशन के तहत बनी यह टंकी आखिर कब गांव के लोगों की प्यास बुझाने का काम शुरू कर पाती है.