Last Updated:
Ancestral Heritage in Ballia: बलिया के द्वाबा क्षेत्र के गोंहिया छपरा गांव निवासी आत्मानंद तिवारी ने बताया कि उनके घर में प्राचीन पांडुलिपियां सुरक्षित हैं. ये सभी हस्तलिखित है और उनके पितामह पं. राधामाधव शास्त्री तथा बाबा पं. दीनदयाल तिवारी द्वारा लिखित संस्कृत के विविध ग्रंथ भी यहां संरक्षित है. आत्मानंद तिवारी के अनुसार इन पांडुलिपियों को व्यवस्थित रूप से रखा गया है और शोधकार्य के लिए विद्वान और शोधार्थी लगातार यहां आते रहते है.
बलिया: पूर्वजों की धरोहर और पहचान को जीवित रखने के लिए लोग कई तरह के प्रयास करते हैं. इसी कड़ी में बलिया जनपद की कुछ दुर्लभ तस्वीरें और दस्तावेज सामने आए हैं, जहां बाबा-दादा के समय की पांडुलिपियां आज भी पूरी तरह सुरक्षित है. इन पांडुलिपियों को न सिर्फ शोधकर्ता, बल्कि इतिहासकार भी देखने आते है. ये वही हस्तलिखित पांडुलिपियां है. जिन्हें पूर्वजों ने अपने हाथों से लिखा था और जिन्हें उनकी आने वाली पीढ़ियां अपनी अमूल्य धरोहर मानकर सहेज रही है.
यह मामला उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद की बैरिया तहसील के गोंहिया छपरा गांव का है. यहां के एक घर में कई विद्वान हुए, जिनकी हस्तलिखित धरोहर आज भी संरक्षित है. इस घर में आज भी अनेक भाषाओं में लिखे गए विविध ग्रंथ सुरक्षित रखे हैं, जो उस दौर की अलग-अलग विषयों पर आधारित रचनाएं है. आइए विस्तार से समझते है…
प्रख्यात इतिहासकार और राष्ट्रीय पांडुलिपि संघ, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के जिला समन्वयक (बलिया) डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय का कहना है कि जितनी भी पांडुलिपियां, धरोहरें और अभिलेख है वे हमारे देश की अमानत है. इन्हें संरक्षित और सुरक्षित रखना हर नागरिक का दायित्व है. हमारा इतिहास बचाना हमारा कर्तव्य है. डॉ. कौशिकेय के अनुसार जब दुश्मन देश पर आक्रमण करे और स्वतंत्रता तथा इतिहास, दोनों ही संकट में हों तो देश की चिंता से पहले इतिहास को बचाना चाहिए.
उन्होंने बताया कि हमारे पास जो ज्ञान का विशाल भंडार पांडुलिपियों और अभिलेखों के रूप में मौजूद है. उन्हें संरक्षित करने का काम भारत सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम्’ योजना के तहत चलाया जा रहा है. इस योजना के पहले चरण में 15 जून तक देशभर में जहां-जहां भी पांडुलिपियां है. उनकी पहचान और चिन्हांकन का कार्य जारी है.
इसी योजना के अंतर्गत बलिया जिले के बैरिया क्षेत्र के अंतर्गत गोंहिया छपरा गांव सहित अन्य स्थानों पर जाकर ऐसी पांडुलिपियों को चिन्हित और संरक्षित किया जा रहा है. गोंहिया छपरा गांव में हस्तलिखित पांडुलिपियां मिली हैं, जो कागज और हिरण की खाल पर लिखी गई हैं. बलिया के अन्य कई स्थानों पर भी भोजपत्र, ताड़पत्र और पीपल पत्र पर लिखी पांडुलिपियां पाई गई है. फिलहाल इन पांडुलिपियों को सरकार की वेबसाइट पर अपलोड करने का काम चल रहा है. अनुमान लगाया जा रहा है कि धरोहरों को संभालकर रखने के मामले में बलिया देश में प्रथम स्थान पर आ सकता है.
बलिया के द्वाबा क्षेत्र के गोंहिया छपरा गांव निवासी आत्मानंद तिवारी ने बताया कि उनके घर में प्राचीन पांडुलिपियां सुरक्षित हैं. ये सभी हस्तलिखित है और उनके पितामह पं. राधामाधव शास्त्री तथा बाबा पं. दीनदयाल तिवारी द्वारा लिखित संस्कृत के विविध ग्रंथ भी यहां संरक्षित है. आत्मानंद तिवारी के अनुसार इन पांडुलिपियों को व्यवस्थित रूप से रखा गया है और शोधकार्य के लिए विद्वान और शोधार्थी लगातार यहां आते रहते है.
About the Author
काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें