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डॉक्टरों ने छोड़ दी थी उम्मीद, पेड़-पौधों की हरियाली बनी थेरेपी… कोडरमा...


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Koderma Arun Mishra Meenakshi Garden: कोडरमा में डॉ. अरुण मिश्रा ने कबाड़ से मीनाक्षी गार्डन नाम से गार्डन बनाया है. इस गार्डन ने पर्यावरण संरक्षण की मिसाल दी है. वह कैंसर से उबरने में बगीचे की हरियाली को थेरेपी मानते हैं. जहां हर नागरिक से पौधारोपण की अपील कर रहे हैं.

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कोडरमा: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां पूरे विश्व में पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्धन को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. वहीं, झुमरी तिलैया के देवी मंडप रोड निवासी 71 वर्षीय शिक्षाविद् डॉ. अरुण मिश्रा अपने अनूठे प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश कर रहे हैं. उन्होंने अपने आवास परिसर में बेकार और अनुपयोगी वस्तुओं को नया जीवन देते हुए एक आकर्षक एवं हराभरा मीनाक्षी गार्डन तैयार किया है. जो लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है.

अनुपयोगी वस्तुओं का कर रहे हैं इस्तेमाल

डॉ. अरुण मिश्रा ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व वह चंडीगढ़ घूमने गए थे. वहां उन्होंने प्रसिद्ध रॉक गार्डन का भ्रमण किया. जहां कबाड़ और बेकार वस्तुओं को कलात्मक रूप देकर सुंदर उद्यान का निर्माण किया गया है. रॉक गार्डन की इसी अवधारणा ने उन्हें प्रेरित किया कि घर में पड़ी अनुपयोगी वस्तुओं को फेंकने की बजाय उनका रचनात्मक उपयोग किया जाए और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ हरियाली को बढ़ावा दिया जाए. इसके बाद उन्होंने अपने घर में पड़ी पुरानी प्लास्टिक की बोतलें, पानी के जार, गाड़ियों के पुराने टायर, क्षतिग्रस्त बाथ टब, अनुपयोगी हैंड बेसिन, पुराने शौचालय कमोड और फ्लश बॉक्स जैसी वस्तुओं को पौधारोपण और बगीचे की सजावट के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया. आज यही कबाड़ सामग्री उनके गार्डन की खूबसूरती बढ़ा रही है. उनका यह प्रयास वेस्ट को बेस्ट बनाने का उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर रही है.

पेड़-पौधों की हरियाली ने किया थेरेपी का काम

डॉ. मिश्रा ने अपने जीवन के एक कठिन दौर को याद करते हुए बताया कि उन्हें कैंसर की चौथी स्टेज का सामना करना पड़ा था. उस समय चिकित्सकों ने उनके स्वस्थ होने की संभावना काफी कम बताई थी. इसके बाद उन्होंने प्रकृति के बीच अधिक समय बिताना शुरू किया. वे रोजाना अपने बगीचे में समय देने लगे और पेड़-पौधों की देखभाल करने लगे. उन्होंने कहा कि बगीचे में लगे दर्जनों किस्म के गुलाब, रंग-बिरंगे फूल और हरे-भरे पौधों ने उन्हें हमेशा सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की. फूलों की सुगंध और प्रकृति की शांति उनके लिए किसी थेरेपी से कम नहीं रही. उनका मानना है कि प्रकृति के साथ बिताया गया समय मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी होता है. उन्होंने बताया कि आज वे कैंसर से उबर चुके हैं और इसका एक बड़ा श्रेय प्रकृति के साथ उनके जुड़ाव को जाता है.

सहभागिता से खड़े हो सकते हैं करोड़ों पेड़

पर्यावरण संरक्षण को लेकर डॉ. मिश्रा ने लोगों से भी आगे आने की अपील की. उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में हर व्यक्ति पेड़ों की छांव तलाशता है और अपनी गाड़ियां भी पेड़ों के नीचे खड़ी करना पसंद करता है, लेकिन पौधारोपण के प्रति उतनी गंभीरता नहीं दिखाता. उन्होंने कहा कि देश की आबादी लगभग 140 करोड़ है. यदि प्रत्येक व्यक्ति केवल एक पौधा भी लगाए और उसकी देखभाल करे, तो देश में 140 करोड़ नए पेड़ खड़े हो सकते हैं, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि होगी.

जिम्मेदारी से भागते हैं लोग

उन्होंने कहा कि आज अधिकांश लोग चाहते हैं कि पर्यावरण संरक्षण का काम कोई दूसरा करे, जबकि इसकी जिम्मेदारी हर नागरिक की है. यदि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है. डॉ. मिश्रा ने बताया कि उनके गार्डन में लगे पौधों के लिए रासायनिक खाद का उपयोग नहीं किया जाता. पौधों को आवश्यक पोषण देने के लिए गौशाला से प्राप्त गोबर की जैविक खाद का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और पर्यावरण भी प्रदूषण मुक्त बना रहता है.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें



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