Last Updated:
Hyderabad News : हैदराबाद के पाटनचेरु में काकतीय दौर का माने जाने वाला प्राचीन पत्थर मंडप आधुनिक इमारतों के बीच खड़ा, इतिहास प्रेमी संरक्षण और पुरातत्व जांच की मांग कर रहे हैं. शहरी चकाचौंध और संकरी गलियों के बीच छिपे इस मंडप पर आमतौर पर राहगीरों की नजर नहीं पड़ती. हालांकि इसकी नक्काशीदार बनावट, मजबूत खंभे और विशाल काले पत्थर इसके गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं.
हैदराबाद. तेजी से कंक्रीट के जंगल में बदलते शहरी इलाकों के बीच अक्सर हमारा इतिहास कहीं न कहीं दबकर रह जाता है. ऐसा ही एक मामला हैदराबाद के बाहरी क्षेत्र पाटनचेरु से सामने आया है, जहां आधुनिक बहुमंजिला इमारतों और व्यावसायिक निर्माणों के बीच एक प्राचीन पत्थर का मंडप आज भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है. इस ऐतिहासिक संरचना को देखने के बाद स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों की दिलचस्पी भी बढ़ी है, वहीं इसके संरक्षण को लेकर चिंता भी जताई जा रही है.
शहर की भागदौड़ और आधुनिक विकास के बीच खड़ा यह मंडप बीते समय की वास्तुकला और शिल्पकला की झलक पेश करता है. आसपास तेजी से बदलते परिवेश के बावजूद इसकी मजबूत संरचना अब भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. इतिहास से जुड़े लोगों का मानना है कि ऐसी धरोहरें केवल पत्थरों का ढांचा नहीं होतीं, बल्कि किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और विरासत की कहानी भी अपने भीतर समेटे रहती हैं.
प्राचीन वास्तुकला की झलक दिखाता है मंडप
शहरी चकाचौंध और संकरी गलियों के बीच छिपे इस मंडप पर आमतौर पर राहगीरों की नजर नहीं पड़ती. हालांकि इसकी नक्काशीदार बनावट, मजबूत खंभे और विशाल काले पत्थर इसके गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं. इसकी वास्तुकला को देखकर कई इतिहास प्रेमी और जानकार मानते हैं कि यह संरचना काकतीय राजवंश के दौर की हो सकती है, जो अपनी उत्कृष्ट पत्थर कला और स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध रहा है. स्थानीय स्तर पर यह भी माना जाता है कि यह किसी बड़े प्राचीन मंदिर परिसर का हिस्सा रहा होगा. समय के साथ मुख्य मंदिर नष्ट हो गया, लेकिन यह मंडप आज भी सुरक्षित खड़ा है. कुछ लोग इसे श्री राम वसंत मंडपम के नाम से भी जोड़कर देखते हैं.
संरक्षण की मांग हुई तेज
इस ऐतिहासिक संरचना की स्थिति ने एक बार फिर विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. इतिहास प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते इस धरोहर की ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो बढ़ते शहरी विस्तार और अतिक्रमण के कारण इसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है. उनका मानना है कि पुरातत्व विभाग को इसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता की जांच करानी चाहिए और इसके वास्तविक इतिहास को सामने लाना चाहिए. साथ ही इसे संरक्षित धरोहर घोषित कर इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक विरासत को देख और समझ सकें.
About the Author
आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें