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भास्कर न्यूज|लोहरदगा लगभग तीन महीने से अधिक समय से मानदेय नहीं मिलने और वेतनमान से व्यथित लोहरदगा जिले के मनरेगा कर्मचारी लगातार तीन माह से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे है। शनिवार को भी सभी 66 पंचायत के कर्मी अलग-अलग जगहों पर हड़ताल पर रहते हुए असंगत कार्य परिस्थितियों पर भी विरोध जताया। मनरेगा कर्मियों के हड़ताल पर रहने से 15 से अधिक योजनाएं प्रभावित है। ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव को ज्ञापन प्रेषित कर मनरेगा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मंगल दास तिर्की ने बताया है कि सभी कर्मचारी हड़ताल पर आगे भी बने रहेंगे। मांगों पर सरकार तब भी कोई कार्रवाई नहीं करती तो आगे अलग रणनीति बनाई जाएगी। इधर कर्मियों के हड़ताल पर रहने से निकटतम बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए कूप निर्माण योजना अधिक प्रभावित नजर आ रही है। इस वर्ष कूप निर्माण के नए योजनाएं तो नहीं मिली। परंतु गत वर्ष के लंबित जिलेभर के 200 से अधिक कूप निर्माण के योजनाएं आधी-अधूरी अवस्था में पड़ी है। उच्च अधिकारियों द्वारा मनरेगा से संचालित कुछ योजनाओं को जल्द पूरा करने का जोर भी दिया जा रहा है क्योंकि 1 जुलाई से मनरेगा के स्थान बीवी राम जी लागू हो जाएगी। जिससे खासकर दीदी बाड़ी, फील्ड बंद, टीसीबी योजना बंद हो जाएगी। वहीं अबुआ आवास योजना के लाभुक को नरेगा से मिलने वाला लाभ 1 जुलाई के बाद से मिलना वर्जित रह जाएगा। इधर शनिवार को भी बीपीओ, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, अकाउंटेंट, रोजगार सेवक सहित तमाम मनरेगा कर्मी हड़ताल पर बैठे रहे। संघ के नेताओं ने कहा कि झारखण्ड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ द्वारा विगत कई वर्षों से मनरेगा कर्मियों की सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण नीति निर्माण, वेतन संरचना में समानता, समयबद्ध मानदेय भुगतान तथा कार्य परिस्थितियों में सुधार के लिए राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया जाता रहा है। अनेक ज्ञापन, प्रतिनिधिमंडल वार्ता एवं लिखित अनुरोधों के बावजूद आज तक कोई ठोस एवं परिणामकारी निर्णय नहीं लिया गया है। वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक एवं अस्वीकार्य है। राज्य के कई जिलों में मनरेगा कर्मियों का मानदेय बकाया है। वहीं ग्रेड पे जैसे लाभ नहीं दिए जा रहे है। जिसमे उनके समक्ष परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट उत्पन्न हो गई है।बिना अतिरिक्त संसाधन व पारिश्रमिक के लगातार कृत्रिम और असंगत कार्य थोपा जा रहा है। मौके पर अरविंद, सुदर्शन, मृणाल, मंगल, सुरवाला, झुनिया, रविंद्र, दीपक, राजकिशोर, संजय, प्रदीप, सुकरा, रामधनी, विजय, सान्ता, नंदलाल, अंजु, सुरबाला, सतीश, रेखा, सोनम, निमई, योगेन्द्र, शिवदयाल, कृष्णा, गोविन्द, संजीव, सहजादा सैफ, अनुप, देवेन्द्र, प्रीति, जमशेद, गीता, तबरेज, लालदेव, सोमनाथ, रवि, बीरबल, उमेश, संदीप, श्रीवास्तव, रजनी, तुकेश, नूतन सहित सभी 66 पंचायत के मनरेगा कर्मी शामिल है। जिले में मनरेगा के तहत चल रहे 15 से अधिक योजनाओं के तहत चल रहे कार्यों में 15 से 20 लाख रुपए का कार्य प्रतिदिन प्रभावित है। जिले में मनरेगा के तहत प्रतिदिन 6 से 7 हजार मजदूर कार्य करते हैं जो अभी कर्मियों के हड़ताल पर रहने के कारण ठप पड़ा है। बिरसा हरित आम बागवानी योजना, संवर्धन कूप निर्माण योजना, आवास सहित अन्य योजनाएं पूर्ण रूप से प्रभावित हो गई है। मनरेगा के बीबी राम जी में परिवर्तित होने के बाद कई योजनाएं बंद भी हो जाएंगी। मामले पर डीडीसी राज महेश्वरम ने कहा कि मनरेगा कर्मियों के हड़ताल पर रहने से कार्य प्रभावित हो रही है। जल्द ही इस दिशा में पहल करते हुए पुनः कर्मियों के वापस लाने का कार्य किया जाएगा। कहा कि फिलहाल पंचायत सचिव और वीएल डब्ल्यू को प्रभार दिया गया है, जिनके द्वारा योजनाओं को पूरा करने की दिशा में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कार्य किया जा रहा है।
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