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PM Narendra Modi Legacy: पीएम मोदी देश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना लिया है. बुधवार को दिल्ली के भारत मंडपम में एनडीए नेताओं के जुटान हुआ. एक-एक कर एनडीए नेताओं ने पीएम मोदी के इस उपल्बधि पर सम्मानति किया. पीएम मोदी के ऐतिहासिक सम्मान के बीच देश की राजनीति में सबसे बड़ा उलटफेर भी हो गया है. बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत और संसद में टीएमसी के 20 से ज्यादा सांसदों की बगावत के बाद बीजेपी केंद्र की सत्ता अगले 8 साल के लिए एक तरह से फिक्स कर ली है. जानिए 2029 के लोकसभा चुनाव में किंगमेकर कैसे बेअसर हो जाएंगे.
पीएम मोदी और कितने साल तक देश के प्रधानमंत्री रह सकते हैं?
PM Narendra Modi Legacy- देश की राजधानी में स्थित भारत मंडपम बुधवार को एक ऐतिहासिक पल का गवाह बन गया. दिल्ली में एनडीए के तमाम दिग्गज नेताओं का महाजुटान हुआ. इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का पंडित जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ने पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया. लेकिन इस जश्न और सम्मान के शोर के बीच, भारत मंडपम के गलियारों से देश की राजनीति को अगले 8 सालों के लिए पूरी तरह बदलने वाली एक इनसाइड स्टोरी भी निकल कर बाहर आई. बेशक, बीजेपी अपने साथी दलों का सम्मान करती है, लेकिन लोकसभा चुनाव 2029 की कहानी 2026 में ही साफ हो गई. जानिए बीजेपी ने कैसे पीएम मोदी को अगले आठ साल तक और प्रधानमंत्री रहने का रास्ता साफ कर दिया है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत और उसके बाद संसद में हुए भारी उलटफेर ने केंद्र सरकार का पूरा समीकरण बदल दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का साफ मानना है कि बंगाल जीतकर भारतीय जनता पार्टी ने कम से कम अगले 8 साल के लिए केंद्र की सत्ता को पूरी तरह सुरक्षित और फिक्स कर लिया है. इस नए गणित का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यह है कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बैसाखी वाली सरकार चलाने के लिए न तो नीतीश कुमार की जरूरत बची है और न ही चंद्रबाबू नायडू की.
टीएमसी के 20 सांसदों के आने से बदल गया लोकसभा का गेम
संसद के भीतर इस वक्त सबसे बड़ा भूचाल आया हुआ है. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की करारी हार के बाद, दिल्ली में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 से ज्यादा लोकसभा सांसदों ने डॉ. काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में विद्रोह कर दिया है.
बंगाल की जीत केवल एक राज्य की सत्ता का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह 2029 और उसके आगे के लोकसभा चुनावों का ब्लूप्रिंट है.
नीतीश-नायडू का ‘किंगमेकर’ टैग खत्म
टीएमसी के तकरीबन 20 बागी सांसदों ने टीएमसी से नाता तोड़कर संसद में एक अलग गुट बना लिया है और बिना शर्त नरेंद्र मोदी सरकार को अपना समर्थन घोषित कर दिया है. अब तक केंद्र की एनडीए सरकार नीतीश कुमार की जेडीयू की 12 सीटें और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी की 16 सीटें के समर्थन के भरोसे टिकी हुई थी, जिससे इन्हें ‘किंगमेकर’ कहा जा रहा था. लेकिन बंगाल से आए तकरीबन 20 सांसदों के समर्थन के बाद भाजपा का अपना संख्या बल और एनडीए का आंकड़ा बहुमत के जादुई आंकड़े से बहुत आगे निकल गया है. अब यदि नीतीश या नायडू कोई दबाव बनाने की कोशिश भी करते हैं, तो सरकार की स्थिरता पर कोई आंच नहीं आने वाली.
अगले 8 साल के लिए सत्ता कैसे हो गई सुरक्षित?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बंगाल की जीत केवल एक राज्य की सत्ता का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह 2029 और उसके आगे के लोकसभा चुनावों का ब्लूप्रिंट है. वर्तमान में बंगाल विधानसभा सीटों पर भाजपा के प्रचंड प्रदर्शन को अगर लोकसभा वार देखा जाए, तो आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा अकेले दम पर पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से कम से कम 35 सीटें जीतने की स्थिति में आ चुकी है. अब यूपी या अन्य हिंदी बेल्ट में कुछ सीटों के नुकसान की भरपाई भाजपा अकेले पश्चिम बंगाल से कर सकती है. बंगाल की यह बढ़त भाजपा को बैसाखियों से मुक्त कर अपने दम पर 300 से अधिक सीटों के आंकड़े की ओर ले जा रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्मविश्वास बंगाल जीत के बाद बढ़ गया.
भारत मंडपम में बदला हुआ बॉडी लैंग्वेज
यही कारण है कि बुधवार को भारत मंडपम में जब एनडीए के नेता जुटे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्मविश्वास देखने लायक था. जहां पहले सहयोगियों को साधने की एक कूटनीतिक मजबूरी दिखती थी, वहीं अब बंगाल की जीत ने भाजपा को ड्राइविंग सीट पर ला दिया है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो राजनीति में अंकगणित ही सब कुछ होता है. बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों और टीएमसी सांसदों के एनडीए खेमे में आने के बाद नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की मोलभाव करने की शक्ति पूरी तरह समाप्त हो चुकी है. पीएम मोदी अब बिना किसी क्षेत्रीय दबाव के अपने बड़े और कड़े फैसले ले सकेंगे. यह जीत 2034 तक के सियासी परिदृश्य को तय कर चुकी है.
जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रचने वाले पीएम मोदी अब एक ऐसी मजबूत पिच पर खेल रहे हैं, जहां विपक्ष तो बिखरा हुआ है ही, साथ ही गठबंधन के भीतर की शर्तें भी अब खुद प्रधानमंत्री तय करेंगे. बंगाल की एक जीत ने दिल्ली सल्तनत के समीकरणों को हमेशा के लिए बदल दिया है.
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I am an alumnus of Bharatiya Vidya Bhavan, Delhi with a career in journalism that spans across several prestigious newsrooms. Over the years, I have honed my craft at Sahara Samay, Tehelka, P7 and Live India, a…और पढ़ें