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परमा एकादशी कल, 15 को अमावस्या और 20 जून को जमाई षष्ठी



पुरुषोत्तम मास के अंतिम पांच दिन और शुद्ध ज्येष्ठ मास के शुरू के पांच दिन व्रत, पूजा और साधना के लिए खास होंगे। 11 जून से 20 जून तक भक्ति का योग बन रहा है। लगातार अलग-अलग देवताओं की आराधना का फल मिलेगा। इस धार्मिक सिलसिले की शुरुआत 11 जून को परमा एकादशी से होगी। 12 जून को प्रदोष व्रत, 13 जून को मास शिवरात्रि, 14 व 15 जून को अमावस्या, 16 जून को करवीर व्रत, 17 जून को रंभा व्रत, 18 जून को गुरु पुष्य योग व उमावतार, 19 जून को महादेव पंचमी और 20 जून को जमाई षष्ठी का संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य प्रणव मिश्रा के अनुसार, परमा एकादशी को कमला व पुरुषोत्तमी एकादशी भी कहा गया है। परमा एकादशी अत्यंत विशेष और दुर्लभ एकादशी मानी जाती है। यह एकादशी हर तीन साल में एक बार अधिकमास के दौरान आती है। इस बार परमा एकादशी पर शोभन योग का संयोग बन रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस एकादशी का उपवास रखने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है। परमा एकादशी पर श्याम मंदिर में श्याम प्रभु का विशेष पूजन किया जाएगा। एकादशी के अगले दो दिन पूरी तरह भगवान भोलेनाथ की भक्ति को समर्पित रहेंगे। 12 जून को ज्येष्ठ माह का प्रदोष व्रत और 13 जून को मास शिवरात्रि रहेगी। इन दो दिनों में भक्त महादेव की आराधना करेंगे। कई शिव मंदिरों में विशेष पूजा होगी। बाबा का शृंगार पूजन किया जाएगा। ज्योतिष शालिनी वैद्य के अनुसार इस बार अमावस्या तिथि दो दिन (14 व 15 जून) रहेगी। 14 जून को दिन के 11:14 बजे अमावस्या तिथि आरंभ होगी और 15 जून को सुबह 8:46 बजे तक रहेगी। 15 जून को सोमवार है। सोमवार के दिन अमावस्या रहने पर सोमवती अमावस्या होती है। 15 जून को साल की पहली सोमवती अमावस्या का महासंयोग बन रहा है। पवित्र नदियों में स्नान का अनंत गुना फल मिलता है। इस दिन गंगा व अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। जो तीर्थ स्थल नहीं जा पाएंगे, वे घर में ही गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर दान करें। 16 से 20 जून के बीच भी पर्व व व्रत का विशेष योग बन रहा है। 16 जून को करवीर व्रत है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। यह व्रत प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को किया जाता है। इस व्रत में कनेर वृक्ष की पूजा का विधान है। 17 जून को रंभा व्रत है। मान्यता है कि सुहागिनें संतान प्राप्ति, अखंड सौभाग्य व सुख-समृद्धि की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। 18 को उमावतार, 19 को महादेव पंचमी और 20 जून को जमाई षष्ठी पूजा रहेगी।



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