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झारखंड में बुधवार से बालू खनन पर एनजीटी की रोक लग जाएगी। यह रोक 15 अक्टूबर तक जारी रहेगी। इस रोक को देखते हुए राज्यभर में बालू कारोबारियों में बालू स्टॉक बढ़ाने की होड़ मची रही। मंगलवार को रांची के सिल्ली, सोनाहातू व बुंडू समेत खूंटी, गुमला, लोहरदगा, रामगढ़ व जमशेदपुर आदि जिलो में देर रात तक नदियों से बालू निकाला गया। इस रोक को देखते हुए बालू कारोबारी मुनाफाखोरी में भी जुट गए हैं। इससे बुधवार से बालू 20 प्रतिशत से ज्यादा महंगा होने की संभावना बन गई है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में पता चला कि सरकार ने सिर्फ 14 घाटों से बालू निकालने की विधिवत छूट दी थी। लेकिन 15 जिलों में 82 स्टॉकिस्ट को बालू स्टॉक करने का लाइसेंस दे दिया गया। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक इन स्टॉकिस्टों के पास 230 लाख सीएफटी से अधिक बालू का स्टॉक है। स्टॉकिस्ट का दावा है कि मानसून में किसी भी हाल में बालू की किल्लत नहीं होगी। क्योंकि एक सप्ताह बाद बिहार, बंगाल और ओडिशा से पर्याप्त मात्रा में बालू मिलेगा। भास्कर टीम से बात करते हुए 20 से ज्यादा बालू कारोबारियों ने कहा कि एनजीटी की रोक से पहले 5500 रुपए प्रति 100 सीएफटी मिलने वाले बालू की कीमत बुधवार से कम से कम 6500 रुपए हो जाएगी। एक ओर बालू कारोबारी ऊंची कीमत में बालू बेचने की जुगत लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खनन विभाग इस पर लगाम लगाने में जुट गया है। इसलिए मानसून में खनन पर लगती है रोक रांची में बिहार से वैध चालान पर बालू मंगाकर बेचना बेहतर
रांची के बालू स्टॉकिस्टों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब रांची के बालू पर निर्भरता पहले की तरह नहीं है। क्किों, जितना बालू चाहिए, वह बिहार से मिल जाएगा। 18 चक्का ट्रक में एक हजार सीएफटी बालू आ रहा है। इसकी कीमत 40 से 45 हजार रुपए है। जबकि, गुमला या लोहरदगा से आने वाला 700 सीएफटी बालू के लिए भी 27 हजार रुपए लग रहा है। ऐसे में अवैध बालू मंगाने के बजाय बिहार से चालान पर एक नंबर बालू मंगाकर बेचना बेहतर है। चालान वाले बालू में पुलिस और स्थानीय नेताओं का डर भी नहीं रहता है। बिहार का बालू मिलने पर बड़े प्रोजेक्ट पर कोई खास असर नहीं दिखेगा।
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