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Ajmer News : अजमेर के गुलाब बाड़ी में स्थित शालिग्राम मंदिर में 5508 शालिग्राम के छोटे-बड़े स्वरूप हैं. ये सभी 36 प्रकार के हैं. सवा ग्राम से 121 किलो तक के स्वरूप हैं. शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं के लिए यह बड़ा आकर्षण का केंद्र हैं. पुजारी आगे बताते हैं कि उनके पिताजी भगवान विष्णु के परम भक्त थे और प्रतिदिन तीनों संध्याओं में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया करते थे. उनके मन में भगवान विष्णु के एक हजार मंदिरों के दर्शन करने का संकल्प था, लेकिन परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं हो सका.
अजमेर. अजमेर के गुलाब बाड़ी क्षेत्र में भगवान शालिग्राम का एक ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां एक ही परिसर में 5508 शालिग्राम विराजमान हैं. इनके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर के पुजारी सुनीत झा बताते हैं कि सनातन परंपरा में शालिग्राम को भगवान विष्णु का साक्षात स्वरूप माना गया है. यही वजह है कि इस धाम की विशेषता केवल शालिग्रामों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी दुर्लभता और आध्यात्मिक महत्व भी है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक साथ हजारों शालिग्रामों के दर्शन करने का अवसर मिलता है, जो अपने आप में एक अनूठा अनुभव माना जाता है.
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि यहां शालिग्राम के सभी 36 प्रकार स्थापित हैं. पुजारी सुनीत झा बताते हैं कि शास्त्रों में वर्णित प्रत्येक प्रकार का शालिग्राम यहां विराजमान है, जिससे यह स्थान शोधकर्ताओं, धर्माचार्यों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है. मंदिर में मौजूद शालिग्रामों का आकार भी विविध है. यहां सवा ग्राम वजन वाले छोटे शालिग्राम से लेकर 121 किलो तक के विशाल शालिग्राम दर्शनार्थ रखे गए हैं. इतनी बड़ी संख्या और विविधता में शालिग्रामों का एक साथ होना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है, जिसके कारण यह धाम अपनी अलग पहचान बना चुका है.
पिता के संकल्प से शुरू हुई यात्रा
पुजारी आगे बताते हैं कि उनके पिताजी भगवान विष्णु के परम भक्त थे और प्रतिदिन तीनों संध्याओं में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया करते थे. उनके मन में भगवान विष्णु के एक हजार मंदिरों के दर्शन करने का संकल्प था, लेकिन परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं हो सका. तब परिवार ने विचार किया कि जब शालिग्राम को स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है, तो उनके पूजन और दर्शन से भी वही पुण्य प्राप्त हो सकता है. इसी भावना के साथ लगभग एक हजार शालिग्राम एकत्रित कर पूजा का क्रम शुरू किया गया. समय के साथ यह संख्या बढ़ती गई और आज यहां 5508 शालिग्राम स्थापित हैं. श्रद्धा, भक्ति और संकल्प से शुरू हुई यह यात्रा अब हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुकी है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें