भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Author name: scsmdos@gmail.com

ताज़ा खबर

miyazaki mango craze in west champaran bid of 18 thousand for one...

होमताजा खबरकृषि OMG! इस एक आम के लिए लगी 18 हजार तक की बोली, नाम है सूरज का अंडा, आपने देखा? Last Updated:May 28, 2026, 19:50 IST Miyazaki Mango Craze In West Champaran: जापान के मियाजाकी आम, जिसे सूरज का अंडा भी कहते हैं. अभी चम्पारण में इस आम की खूब चर्चा है. यहां लोगों ने एक आम के लिए 15-18 हजार रु तक की बोली लगाई है. लेकिन मालिक ने बेचने से इनकार किया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह आम ढाई लाख रु किलो बिकता है. आइए जानते हैं इसकी खासियत. पश्चिम चम्पारण: जिले में इन दिनों मियाजाकी आम की चर्चा खूब हो रही है. जापान के मियाजाकी से निकला यह आम फिलहाल चम्पारण के लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है. अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में करीब ढाई लाख रुपए किलो तक बिकने वाले इस चर्चित आम की खरीदारी के लिए लोग बोली तक लगा रहे हैं. पश्चिम चम्पारण जिले के मुख्यालय बेतिया से एक ऐसा ही रोचक मामला सामने आया है. जिसमें मियाजाकी किस्म के सिर्फ एक आम की खरीदारी के लिए शौकीनों ने 15 से 18 हजार रुपए तक की बोली लगा दी है. घर की छत पर मियाजाकी आम की बागवानीबताते चलें कि इस आम का फलन बेतिया के प्रसिद्ध स्वर्ण व्यवसायी मुनेश्वर कुमार के घर पर हुआ है. मुनेश्वर अपने बड़े भाई योगेश के साथ मिलकर नंदनी ज्वेलर्स नामक दुकान का संचालन करते हैं. उन्होंने वर्ष 2025 के सितंबर महीने में घर की छत पर प्लास्टिक बैग में मियाज़ाकी आम के पौधे को लगाया था. जिसमें फिलहाल आम का फलन बड़ी ही खूबसूरती से हुआ है. दुर्लभ और एग्जॉटिक किस्म होने की वजह से उन्होंने इसकी चर्चा कृषि–बागवानी विशेषज्ञ रविकांत पांडे से की. रविकांत पिछले 10 वर्षों से कृषि बागवानी पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट का काम करते हैं और कई कृषक समूहों का संचालन भी करते हैं. एक आम के लिए 18 हज़ार रु तक की बोलीउन्होंने इस आम की तस्वीर को सभी समूहों में साझा किया. जिसके बाद कुछ किसानों ने इसकी खरीदारी की इच्छा जताई. बकौल रविकांत, इस दौरान आश्चर्य की बात यह रही कि लोग इसे खरीदने के लिए 15 से 18 हजार रुपए तक देने को तैयार हो गए. हालांकि मुनेश्वर ने इसे बेचने से इनकार कर दिया और कहा कि वो इसे अपने परिवार के साथ ही सर्व करना चाहते हैं. घर की गृहिणियों ने पौधे को बड़े ही चाव से लगाया है, इसलिए इसपर सबसे पहला अधिकार उनका ही है. मियाजाकी के अन्य नामविशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी बहुत देख भाल से चम्पारण सहित पूरे बिहार में मियाजाकी की बागवानी की जा सकती है. जापान के मियाज़ाकी शहर से संबंधित होने की वजह से इसे मियाज़ाकी नाम से ही जाना जाता है. इसका रंग लालीमा के साथ उगने वाले सूर्य की तरह होता है, इसलिए इसे ‘एग ऑफ सन’ यानी सूरज का अंडा भी कहा जाता है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bettiah,Pashchim Champaran,Bihar Source link

झारखंड

जून में करें मूंगफली की इन 2 उन्नत किस्मों की खेती, कम...

होमताजा खबरकृषि जून में करें मूंगफली की इन 2 किस्मों की खेती, कम पानी में होगा बंपर मुनाफा Last Updated:May 28, 2026, 07:30 IST जून में मूंगफली की बुवाई करना सबसे बेहतर है. कृषि वैज्ञानिकों ने ‘कादरी 06’ और ‘TG 51’ उन्नत किस्में सुझाई हैं. ये कम पानी में तगड़ा उत्पादन देती हैं. बुवाई से पहले बीजों का उपचार जरूर करें. यह खेती कम लागत में किसानों को बंपर मुनाफा देगी. ख़बरें फटाफट देवघरः जून का महीना मूंगफली की खेती के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. खासकर झारखंड जैसे इलाकों में जहां बारिश की शुरुआत होने लगती है, वहां किसान इस समय मूंगफली की बुवाई कर अच्छा उत्पादन हासिल कर सकते हैं. खेती से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान सही किस्म का चयन करें और वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो कम लागत में भी शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है. यही वजह है कि अब कई किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मूंगफली की खेती की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं. बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है और खाने-पीने की चीजों से लेकर तेल बनाने तक इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है. क्या कहते है कृषि वैज्ञानिक?देवघर के सीनियर कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा ने लोकल 18 को बताया कि जून के महीने में मूंगफली की बुवाई करना सबसे उत्तम माना जाता है. इस दौरान मिट्टी में नमी अच्छी रहती है और पौधों का विकास तेजी से होता है. उन्होंने कहा कि वैसे तो मूंगफली की कई उन्नत किस्में मौजूद हैं, लेकिन झारखंड की मिट्टी और मौसम के हिसाब से कादरी 06 और TG 51 किस्म सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है. इन दोनों किस्मों की खासियत यह है कि कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देती हैं और किसानों को बेहतर कमाई का मौका मिलता है. साथ ही इनकी बाजार में मांग भी काफी ज्यादा रहती है. मूंगफली लगाने से पहले जरूर करें ये काम कृषि वैज्ञानिक के अनुसार मूंगफली की बुवाई हमेशा सीधी लाइन में करनी चाहिए. इससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और खेत की निराई-गुड़ाई करने में भी आसानी होती है. उन्होंने बताया कि किसान अगर बुवाई से पहले खेत की 3 से 4 बार अच्छी तरह जुताई कर लें और मिट्टी में गोबर की सड़ी हुई खाद मिला दें, तो उत्पादन कई गुना तक बढ़ सकता है. गोबर की खाद मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का काम करती है और पौधों को जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं. बीज बोने से पहले करें उपचार उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बीज बोने से पहले उसका उपचार जरूर करें. कई बार बीजों में फफूंद रोग लग जाते हैं, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और उत्पादन पर असर पड़ता है. इसलिए बीजों को फफूंदनाशक दवा से उपचारित करना बेहद जरूरी है. इससे फसल रोगों से सुरक्षित रहती है और पौधों की वृद्धि भी अच्छी होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान खेती के शुरुआती चरण में थोड़ी सावधानी बरतें, तो बाद में उन्हें ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. इन दो किस्म हैं खासकादरी 06 और TG 51 किस्म की एक और बड़ी खासियत यह है कि ये पत्ती धब्बा रोग के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी मानी जाती हैं. इस वजह से किसानों को दवाइयों पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता और खेती की लागत कम हो जाती है. वहीं दूसरी तरफ उत्पादन अच्छा होने से किसानों को बाजार में बेहतर दाम भी मिल जाते हैं. यही कारण है कि अब झारखंड के कई जिलों में किसान इन उन्नत किस्मों की खेती को तेजी से अपना रहे हैं. कम लागत और जबरदस्त मुनाफा अगर मौसम सामान्य रहा और किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो एक सीजन में ही शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है. कम लागत, कम पानी और बेहतर उत्पादन की वजह से मूंगफली की यह खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बनती जा रही है. यही वजह है कि अब गांवों में युवा किसान भी पारंपरिक खेती छोड़ नई तकनीक और उन्नत किस्मों की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. About the Author Prashun Singh मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

झारखंड

मजदूरी करने वाले राजेश ने पशु मित्र का प्रशिक्षण लेकर बनाई अलग...

भास्कर न्यूज| लोहरदगा कभी परिवार का पेट पालने के लिए दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर लोहरदगा प्रखंड अंतर्गत भटखीजरी गांव निवासी राजेश उरांव अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में पशु डॉक्टर के नाम से पहचाने जाते हैं। मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त करने वाले राजेश उरांव की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। घर की जिम्मेदारियों ने उन्हें हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में मजदूरी करने के लिए मजबूर कर दिया था। परिवार से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में काम करना उनकी मजबूरी थी लेकिन उनके मन में हमेशा यह इच्छा थी कि वे अपने गांव में रहकर कुछ ऐसा करें जिससे सम्मान के साथ परिवार का पालन-पोषण कर सकें। इस क्रम में उन्हें बैंक ऑफ इंडिया ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित पशु मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी मिली। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग लिया और पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, कृमिनाशन, पोषण प्रबंधन, रोगों की पहचान व रोकथाम का प्रशिक्षण प्राप्त की। वहीं प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में पशु मित्र के रूप में कार्य शुरू किया। आज वे गांव-गांव जाकर पशुपालकों के पशुओं का इलाज करते हैं। उनके मेहनत का परिणाम यह है कि आज वे प्रतिमाह लगभग चालीस हजार रुपए प्रति माह आय अर्जित कर रहे हैं। वहीं उनका कहना है कि अगर सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिले तो गांव के युवा आत्मनिर्भर बन सकता है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और सही प्रशिक्षण इंसान की जिंदगी बदल सकता है। आज राजेश न केवल अपने परिवार के लिए उम्मीद की नई किरण बने हैं बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा और आत्मनिर्भर भारत की सच्ची मिसाल भी बन चुके हैं। Source link

शिक्षा

SC Probe CBSE 3-Language Rule

Hindi News Career SC Probe CBSE 3 Language Rule | Student Pressure Hearing July 1, 2026 56 मिनट पहले कॉपी लिंक 27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने CBSE 9वीं क्लास में थ्री-लैंग्वेज रूल पर अपनी सुनवाई में कहा कि थ्री-लैंग्वेज रूल लागू करने के फैसले पर जांच की जाएगी। साथ ही SC ने कहा कि ये देखना होगा कि CBSE के थ्री-लैंग्वेज रूल की वजह से छात्रों और संसाधनों पर बेमतलब का दबाव तो नहीं पड़ रहा। CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि इस पॉलिसी को लागू करने में आने वाली जमीनी और व्यवस्थागत दिक्कतों को समझना होगा, खासकर तब जब शिक्षकों और किताबों दोनों की ही कमी है। CBSE और NCERT से जवाब मांगा कोर्ट ने थ्री लैंग्वेज रूल को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार, CBSE और नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी NCERT को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। CBSE थ्री-लैंग्वेज रूल पर अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी। पहले 15 जून की तारीख तय की गई थी, लेकिन एडिशनल सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के अनुरोध पर इस जुलाई में रखा गया है। 22 मई को कुछ याचिकाकर्ताओं ने थ्री-लैंग्वेज रूल के इस सत्र से लागू करने के खिलाफ PIL दाखिल की थी। CBSE ने इस सत्र से 9वीं में थर्ड-लैंग्वेज रूल लागू किया CBSE ने कक्षा 9वीं लिए इसी सत्र से थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने का फैसला किया है। इसके लिए CBSE ने 15 मई को सर्कुलर जारी कर इसकी जानकारी दी थी। सर्कुलर के मुताबिक, ये कक्षा 9वीं के लिए 1 जुलाई से लागू होना है। इसके लिए नोटिफिकेशन 1 जुलाई से लागू होगा और स्टूडेंट्स को 31 मई तक तीसरी लैंग्वेज चुनने का समय दिया गया है। CBSE बोला- थर्ड-लैंग्वेज के लिए बोर्ड एग्जाम नहीं होगा 15 मई को जारी सर्कुलर में कहा गया था कि तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी हैं। ये नियम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी यानी NEP-2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 का हिस्सा है। हालांकि, CBSE ने यह भी स्पष्ट किया कि कक्षा 10 में थर्ड लैंग्वेज के लिए कोई बोर्ड एग्जाम नहीं होगी। बोर्ड ने सर्कुलर में कहा, ‘R3 (तीसरी भाषा) का पूरा मूल्यांकन स्कूल स्तर पर और आंतरिक रूप से किया जाएगा। छात्रों के प्रदर्शन को CBSE सर्टिफिकेट में दर्ज किया जाएगा।’ ‘थर्ड-लैंग्वेज में फेल तो 10वीं का सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा’ CJI ने पूछा कि क्या इस नीति के तहत कक्षा 10वीं में कोई परीक्षा देनी होगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि इसके लिए ‘आंतरिक मूल्यांकन’ होगा। रोहतगी ने कहा, ‘यह आपके फाइनल सर्टिफिकेट में दिखेगा। आपको साबित करना होगा कि आपने इसे पास किया है। जब तक आप इस पेपर में पास नहीं करेंगे, तब तक कक्षा 10वीं का सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा।’ CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में 19 लोगों के एक ग्रुप ने चुनौती दी। इनमें स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स शामिल हैं। ये याचिका क्लास 9वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू किए जाने के विरोध दायर की गई। इसके खिलाफ SC अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। इसका नोटिफिकेशन 1 जुलाई से लागू होगा और स्टूडेंट्स को 31 मई तक तीसरी लैंग्वेज चुनने का समय दिया गया है। जस्टिस जॉयमाल्या और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच करेगी सुनवाई सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने इस मामले में पेरेंट्स की तरफ से पक्ष रखा। जस्टिस जॉयमाल्या और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बैच इस पर सुनवाई करेगी। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनावई कर सकता है। इस फैसले से 9वीं, 10वीं वलास के लगभग 50 लाख बच्चे प्रभावित होंगे। याचिकाकर्ताओं का आरोप CBSE बात से पलटा याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये फैसला CBSE के पहले के फैसले से बिल्कुल उलट है। सीबीएसई ने 9 अप्रैल को साफ कहा था कि तीसरी भाषा वाला नियम (R3) 9वीं क्लास के छात्रों पर 2029-30 सत्र तक लागू नहीं होगा। याचिका में CBSE और NCERT पर आरोप लगाया है कि ये मनमाना फैसला है। पेरेंट्स और टीचर्स का कहना है कि CBSE पहले खुद मान चुका है कि ट्रेंड टीचर्स और टेक्स्टबुक की कमी है, फिर भी स्कूलों पर इसे लागू करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी और सार्थक शिक्षा का मतलब सिर्फ एक नया विषय थोप देना नहीं होता, खासकर तब जब उसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेंड टीचर्स और पढ़ाने का सिस्टम ही मौजूद न हो। याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि यह सर्कुलर नई शिक्षा नीति 2020 की भावना के खिलाफ है। NEP में साफ कहा गया है कि किसी भी राज्य या छात्र पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी। 9वीं, 10वीं क्लास के लिए थ्री लैंग्‍वेज पॉलिसी अनिवार्य 15 मई को जारी सर्कुलर में CBSE ने अपने सभी स्‍कूलों में कक्षा 9वीं और 10वीं में थ्री लैंग्‍वेज पॉलिसी अनिवार्य किया था। इसके तहत 9वीं और 10वीं के बच्‍चों को तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी। इनमें से 2 भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। CBSC का नोटिफिकेशन 1 जुलाई से लागू होगा। इस फैसले से 9वीं और 10वीं के मिलाकर लगभग 50 लाख बच्‍चे प्रभावित होंगे। साथ ही इस साल 10 वीं के बच्चों को तीसरी भाषा का पेपर नहीं देना होगा। स्‍कूल 30 जून तक थर्ड लैंग्‍वेज चुनेंगे थ्री लैंग्‍वेज पॉलिसी के तहत, एक भारतीय और एक विदेशी भाषा के साथ एक क्षेत्रीय भाषा पढ़ाई जानी है। CBSE ने स्‍पष्‍ट किया है कि स्‍कूल, छात्रों की पसंद के अनुसार थर्ड लैंग्‍वेज चुन सकते हैं। सभी स्‍कूलों को अपनी चुनी हुई लैंग्‍वेज की जानकारी 30 जून तक बोर्ड को देनी होगी। बोर्ड ने कहा कि लैंग्वेज को लेकर ये डिसीजन हाल ही में 2026-27 के लिए रिलीज किए गए NCERT सिलेबस को देखकर लिया गया है। इस सेशन की शुरुआत अप्रैल 2026 से हो चुकी है। लेकिन स्‍कूलों को 1 जुलाई से थर्ड लैंग्‍वेज की पढ़ाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है। 10वीं में थर्ड लैंग्‍वेज का पेपर नहीं होगा CBSE ने साफ किया है कि इस साल 10वीं बोर्ड परीक्षा में

झारखंड

रीति-रिवाज व भाषा के संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय

भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिला राजी पड़हा व्यवस्था लोहरदगा द्वारा आयोजित पारंपरिक बिशु सेंदरा कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद बुधवार को समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम की व्यवस्थाओं, सहभागिता एवं आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों व समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिशु सेंदरा आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से संपन्न कराने में सभी पड़हा प्रतिनिधियों, युवाओं और समाज के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समीक्षा बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। तय किया गया कि आने वाले समय में समाज की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज व भाषा के संरक्षण को लेकर गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के लिए नियमित बैठक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रत्येक गांव में पौधरोपण अभियान चलाने और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया गया। समाज में आपसी भाईचारा व एकता बनाए रखने के लिए विभिन्न पड़हा स्तर पर संवाद कार्यक्रम आयोजित करने पर भी सहमति बनी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अगला बिशु सेंदरा कार्यक्रम और अधिक व्यवस्थित व भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा, जिसके लिए अभी से तैयारी शुरू की जाएगी। साथ ही कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक नियमों एवं सामाजिक अनुशासन का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक में विभिन्न पड़हा के पाहन, पुजार, महतो, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग उपस्थित थे। बैठक में मुख्य रूप से जिला राजी पड़हा व्यवस्था के जिला बेल लक्ष्मी नारायण भगत, देवान वीरेंद्र उरांव, कोटवार डोमना उरांव, भंडारी गोसाई भगत, उप बेल बुद्धेश्वर उरांव, उप देवान बजरंग कुमार उरांव, उप भंडारी नारायण कुमार उरांव, उप कोटवार सुखदेव कुमार उरांव, जोंक बेल मंजन उरांव, मीडिया प्रभारी जगदीप कुमार भगत, सुरेंद्र कुमार उरांव, सुखदेव कुमार उरांव, राजू कुमार बाखला, मधुसूदन टाना भगत, बिरी टाना भगत, रंजन कुमार उरांव सहित काफी संख्या में जिला राजी पड़हा व्यवस्था के पदाधिकारी एवं समाज के लोग शामिल थे। Source link

ताज़ा खबर

महाभारत: युधिष्ठिर क्यों बार – बार रोए और कुंती की हैरान करने...

अगर ये सवाल पूछा जाए कि महाभारत में पांडव भाइयों में कौन सबसे ज्यादा मौकों पर रोता देखा गया. वह बार बार बार-बार भावुक होकर विलाप करने लगते थे. वह अपने पांडव भाइयों में और शायद महाभारत के सभी पुरुष पात्रों में सबसे ज्यादा रोने वाले और दुखी रहने वाले चरित्र थे. हालांकि कुंती का दहाड मारकर रोना भी सबको चकित कर गया. महाभारत में युधिष्ठिर ने कई बार रोये. कभी अपनी स्थिति के कारण तो कभी सगे संबंधियों, भाइयों और प्रियजनों की मृत्यु पर. युद्ध के दौरान और उसके बाद उनकी पीड़ा कई बार जाहिर हुई. वैसे केवल युधिष्ठिर ही क्यों महाभारत में तो धृतराष्ट्र, कर्ण, दुर्योधन सभी रोए. लेकिन सबसे ज्यादा दहाड़कर मारकर रोने वाली कुंती थीं. वो जिस तरह रोईं तो हर कोई हिल गया. पहले ये जानेंगे कि युधिष्ठिर की पीड़ा कब रोने के रूप में बाहर निकली. पांडव जब वनवास काट रहे थे. तो वो कभी कभी अपनी जगह बदलते थे. उस समय पांडव वन में निवास कर रहे थे. अर्जुन द्वियास्त्र हासिल करने के लिए इंद्र के पास चले गए थे. उनके बगैर भीम युधिष्ठिर से लगातार झगड़ते रहते थे. जरूरत से ज्यादा सहिष्णु और धैर्यवान होने के लिए युधिष्ठिर की आलोचना करते रहते थे. द्रौपदी अपने भाग्य पर रोती रहती थी, जिसने उन सभी को ये दिन दिखाए थे. तब युधिष्ठिर फफक पड़े इसी दौरान महान ऋषि वृहदश्व उनसे मिलने आए. युधिष्ठिर जो दुख और आत्मनिंदा से भरे हुए थे, ऋषि के सामने फूट-फूटकर रो पड़े. क्या आपने मुझसे अधिक दुर्भाग्यशाली को देखा या सुना है, कहकर वह सुबकने लगे. खैर ऋषि ने युधिष्ठिर को ढांढस बंधाया. अच्छे दिनों का आश्वासन दिया. कम से कम तीन बार रोए हालांकि ये युधिष्ठर का पहली बार रोना नहीं था. वह इसके बाद भी कई बार रोए. कम से कम तीन बार इसका जिक्र महाभारत में मिलता ही है. युद्ध के दौरान जब युधिष्ठिर को लगा कि अर्जुन मारा गया है, तो वह रोने लगे. यह स्थिति तब आई जब उन्होंने श्री कृष्ण की भयंकर शंखध्वनि सुनी, लेकिन गांडीव की टंकार नहीं सुनाई दी, जिससे उन्हें लगा कि अर्जुन की मृत्यु हो गई है. युद्ध में अपने भाइयों और सगे संबंधियों की मृत्यु से भी युधिष्ठिर को गहरा दुख और आत्मग्लानि हुई. इस पर भी उन्होंने विलाप किया. वे इसके चलते मनोवैज्ञानिक तौर पर बेचैन और व्याकुल हो गए. सपनों में युद्ध के दृश्य देखते थे. इस व्यथा को श्री कृष्ण के सामने भी जाहिर किया. युद्धस्थल में जब पांडवों की मां कुंती कर्ण के शव को गोद में लेकर दहाड़ मारकर रोईं तो हरकोई विचलित हो गया. (News18 AI) तब कुंती दहाड़कर मारकर रोईं जब युद्ध खत्म हुआ. कुंती कर्ण के मृत शरीर को गोद में लेकर रो रही थीं, तब युधिष्ठिर को यह पता चला कि कर्ण भी उनके भाई थे. इस तथ्य को जानकर वो भी भावुक हुए, रोए. गुस्से में आकर उन्होंने महिलाओं को श्राप दिया कि वे अपने मन की बात छिपा नहीं पाएंगी. युद्ध के बाद भी युधिष्ठिर ने अपने परिवार और संबंधियों के विनाश पर गहरा शोक व्यक्त किया, जो कई बार उनके रोने और विलाप के रूप में सामने आया. कहा जाता है कि सबसे जबरदस्त विलाप कुंती ने किया था. वह कर्ण की मृत्यु के बाद उसके शव को गोद में लेकर दहाड़ें मारकर रोने लगीं. ये महाभारत का बहुत भावुक क्षण था. कुंती के विलाप को देखकर युधिष्ठिर भी भावुक हुए थे. हर कोई इसलिए भी तब हैरान था कि कुंती भला कर्ण के लिए क्यों इतना विलाप कर रही हैं. बाद में पता लगा कि कर्ण भी कुंती के बेटे थे. महाभारत में द्रौपदी कई बार रोईं. कभी सभा में सबसे सामने अपने अपमान पर तो कभी पुत्रों की मृत्यु पर (News18 AI) अर्जुन क्यों रोए महाभारत के पुरुष पात्रों में कई बार भावुक और रोने के प्रसंग आते हैं. अर्जुन ने तब विलाप किया और बहुत दुखी हो गए जबकि अभिमन्यु की मृत्यु के बारे में जाना. अर्जुन तब भी फफकर रो पड़े जब उन्होंने महाभारत युद्ध की शुरुआत अपने सगे संबंधियों को सामने देखा. तब वह श्रीकृष्ण के सामने भावुक होकर रो पड़े. युद्ध करने से मना कर दिया. भीम की आंखों में आंसू भीम की आंखों में तब आंसू आ गये जब द्रौपदी के चीरहरण के समय सबके सामने पांडवों को अपमानित होना पड़ा, तब भीम की आंखों में भी आंसू आ गए थे. महाभारत युद्ध के दौरान धृतराष्ट्र पुत्रों की मृत्यु के समाचार पर कई बार रोए. गांधारी भी दुर्योधन व अन्य पुत्रों की मृत्यु पर रोईं. जब उन्होंने श्रीकृष्ण को श्राप दिया, उससे पहले भी युद्धस्थल में जाकर वह रोईं थीं. अपने भाइयों और मित्रों की मृत्यु के बाद दुर्योधन ने भी युद्धभूमि में आंसू बहाए. कर्ण कब रोए कर्ण तब श्रीकृष्ण के सामने रो पड़े, जब उन्होंने कर्ण को पहली बार ये बताया कि वो पांडवों के भाई और कुंती के सबसे बड़े पुत्र हैं. ये रहस्य अब तक छिपा हुआ था लेकिन जब ये पता लगा तो कर्ण ने भावनात्मक तौर पर खुद को ऐसी स्थिति में पाया कि वो रोने लगे. सबसे ज्यादा बार द्रौपदी रोईं वैसे महाभारत के महिला पात्रों में सबसे ज्यादा रोने वालों में द्रौपदी हैं. वह पहली बार तब रोईं जब युधिष्ठर ने उन्हें दांव पर लगाया. सभा में उनका सबके सामने अपमान हुआ. तब भी वह फफक उठीं जब अभिमन्यु की मृत्यु की सूचना मिली. अपने पाचों पुत्रों (उपपांडवों) की अश्वतथामा द्वारा हत्या के बाद भी वह खूब रोईं. उनके आंसू थमने का नाम नहीं लेते थे. अगर पूरे महाभारत की बात करें, तो सबसे ज्यादा विलाप धृतराष्ट्र और गांधारी का है. धृतराष्ट्र अपने पुत्र-मोह में और गांधारी अपने 100 पुत्रों की मृत्यु के शोक में युद्ध के अंत में सबसे ज्यादा रोने वाले पात्रों में गिने जाते हैं. Source link

झारखंड

झारखंड की देसी नेनुआ चटनी के सामने फेल है फास्ट फूड, जानिए...

X झारखंड की देसी नेनुआ चटनी के सामने फेल है फास्ट फूड, जानिए बनाने का आसान तरीका   झारखंड के गांवों में गर्मियों के मौसम में आज भी देसी और पौष्टिक भोजन को ज्यादा महत्व दिया जाता है. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में नेनुआ की चटनी काफी पसंद की जाती है. गर्मियों में यह चटनी लगभग हर घर में बनाई जाती है. इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे गर्मी में शरीर को राहत मिलती है और पाचन भी बेहतर रहता है. नेनुआ की चटनी बनाना काफी आसान है. पहले नेनुआ को छीलकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. इसके बाद प्याज, हरी मिर्च और लहसुन के साथ इसे मिलाकर तैयार किया जाता है. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नमक और ऊपर से शुद्ध सरसों तेल डाला जाता है. गांवों में आज भी कई लोग इसे सिलबट्टे पर पीसकर बनाना पसंद करते हैं. Source link

झारखंड

टारगेट के प्रेशर में एमआर ने की आत्महत्या:धनबाद में किराए के मकान...

धनबाद के चिरागोड़ा स्थित एक किराए के मकान में गुरुवार को 31 वर्षीय एमआर चिराग लक्ष्मी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेज दिया। वह धनबाद में अकेले रहकर नौकरी करता था। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। पिता बोले – टारगेट के दबाव में उठाया कदम धनबाद थाना के एएसआई हरि प्रसाद नारायण ने बताया कि आत्महत्या के कारणों का फिलहाल स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। वहीं, मृतक के पिता कुंदन कुमार ने कंपनी और उसके अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि नौकरी शुरू करने के बाद से ही चिराग पर लगातार काम और टारगेट पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा था। कंपनी के मैनेजर और कलेक्शन से जुड़े लोग उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे, जिसके कारण वह काफी तनाव में रहने लगा था। परिजनों के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से मानसिक दबाव झेल रहा था। पटना जाने की थी तैयारी, कमरे में लटका मिला शव कुंदन कुमार ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ पटना जाने की तैयारी कर रहे थे, जहां उनकी किडनी ट्रांसप्लांट होनी थी। इसी बीच जब वे बेटे के कमरे में खाना देने पहुंचे, तो दरवाजा बंद मिला। दरवाजा खोलने पर चिराग फंदे से लटका मिला। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने बताया कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। Source link

झारखंड

धनबाद में रेलवे के दो कर्मचारियों ने की शादी:भूली शिव मंदिर में...

धनबाद में गुरुवार को प्रेम प्रसंग का एक अनोखा मामला सामने आया, जहां रेलवे के दो कर्मचारियों ने सामाजिक स्वीकृति के साथ शादी कर ली। भूली थाना के पास स्थित शिव मंदिर में युवक और युवती ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार सात फेरे लिए। विवाह समारोह में पांडरपल्ला बस्ती के लोग और स्थानीय निवासी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। नवविवाहित जोड़े के गवाह बने। जानकारी के अनुसार, दोनों ने कोर्ट मैरिज के लिए थाना में बॉन्ड भी भरा है। जिससे उनके रिश्ते को कानूनी मान्यता भी मिल सके। मंदिर परिसर में आयोजित इस सादे लेकिन भावनात्मक समारोह ने आसपास के लोगों का ध्यान आकर्षित किया। लंबे समय से चल रहा था प्रेम संबंध बताया जा रहा है कि पांडरपल्ला निवासी रानी कुमारी और बैंकमोड़ निवासी अमित कुमार दोनों रेलवे में कार्यरत हैं। लंबे समय से एक-दूसरे के संपर्क में थे। दोनों के बीच प्रेम संबंध काफी समय से चल रहा था। अमित अक्सर रानी से मिलने पांडरपल्ला आते थे, जिससे बस्ती के लोगों को उनके रिश्ते की जानकारी हो गई थी। धीरे-धीरे यह बात पूरे इलाके में फैल गई। इसके बाद स्थानीय लोगों और बस्तीवासियों ने दोनों को सामाजिक रूप से विवाह करने की सलाह दी, ताकि उनके रिश्ते को समाज में मान्यता मिल सके। लोगों की पहल पर ही दोनों ने परिवार और समाज के सामने शादी करने का निर्णय लिया। नवदंपती ने जताई खुशी, लोगों ने दी शुभकामनाएं तय कार्यक्रम के अनुसार शिव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों का विवाह संपन्न हुआ। शादी के दौरान माहौल पूरी तरह उत्सवमय रहा और उपस्थित लोगों ने फूल-मालाओं के साथ नवदंपती को आशीर्वाद दिया। विवाह के बाद दोनों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वे लंबे समय से एक-दूसरे से प्रेम करते थे। अब समाज के सामने अपने नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं। Source link

ताज़ा खबर

NEET UG 2026:NEET: वायुसेना को मिल सकता है पेपर लाने ले जाने...

Last Updated:May 28, 2026, 17:46 IST NEET Paper Leak Meeting: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार एक्शन मोड में है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और NTA महानिदेशक के साथ हाई-लेवल बैठक हुई. जिसके बाद चर्चा है कि नीट के पेपर की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी सेना को मिल सकती है. NEET Paper Leak Scam: नीट पेपर लीक मामले में किसी भी गलती को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा नई दिल्ली (NEET Paper Leak Meeting). नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में मचे भारी बवाल के बीच केंद्र सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है. लाखों उम्मीदवारों के गुस्से और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच आज देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सरकारी आवास पर बेहद महत्वपूर्ण और हाई-लेवल बैठक बुलाई गई है. इस बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं. NEET को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और शिक्षा मंत्री के बीच बैठक में विचार हुआ.एग्जाम को लेकर जिम्मेदारी पोस्टल डिपार्टमेंट से वायु सेना को जिम्मदारी दिये जाने पर विचार किया गया. लॉजिस्टिक में वायु सेना को जिम्मेदारी मिल सकती है. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का एक ही साफ एजेंडा है नीट परीक्षा को लेकर छात्रों और पेरेंट्स के बीच खोई विश्वसनीयता को बहाल करना और दोषियों के खिलाफ ऐसा सख्त एक्शन लेना जो नजीर बन सके. सरकार की तरफ से स्पष्ट संकेत दिए जा चुके हैं कि उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली ‘किसी भी गलती को बख्शा नहीं जाएगा’. इस मैराथन बैठक में जांच की मौजूदा स्थिति और आगामी 21 जून को होने वाले री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा की जा रही है. राजनाथ सिंह के आवास पर नीट पेपर लीक का महामंथन नीट यूजी 2026 को पूरी तरह विवाद रहित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सरकारी आवास पर बेहद महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय महामंथन हुआ. इस मैराथन बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के चीफ अभिषेक सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे. बैठक के दौरान नीट पेपर लीक, गंभीर शिकायतों, प्रशासनिक खामियों और उनके ठोस समाधानों पर गहराई से चर्चा की गई, जिससे सभी चिंताें पूरी तरह दूर की जा सकें. इसके अलावा, परीक्षा के दौरान बड़े स्तर पर जरूरी लॉजिस्टिक सपोर्ट को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के बीच आपसी तालमेल बिठाने तथा परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, हाई-टेक निगरानी और सख्त व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर खास फोकस रहा. बैठक के अंत में एनटीए चीफ से जमीनी तैयारियों का पूरा फीडबैक लिया गया और यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि परीक्षा तंत्र पर छात्रों का भरोसा दोबारा बहाल करना ही सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. नीट री-एग्जाम पर पीएमओ की पैनी नजर 3 मई को रद्द हुई नीट परीक्षा में सामने आए पेपर लीक विवाद और गड़बड़ियों से सबक लेते हुए केंद्र सरकार आगामी 21 जून को होने वाली NEET परीक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद नजर आ रही है. पिछली परीक्षा के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के भारी विरोध और राजनीतिक आलोचना को देखते हुए इस बार सरकार किसी भी स्तर पर चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती है. यह संवेदनशील मामला लाखों छात्रों के भविष्य से सीधे जुड़ा है, इसलिए इस बार खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी प्रक्रिया की कमान संभाल रहे हैं; पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग से लेकर ट्रांसपोर्टेशन तक के हर फेज पर पीएमओ की कड़ी नजर है और प्रधानमंत्री को पल-पल की रिपोर्ट भेजी जा रही है. क्या है नीट विवाद का बैकग्राउंड? इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब 3 मई 2026 को आयोजित की गई नीट परीक्षा के तुरंत बाद राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से पेपर लीक होने की खबरें आईं. सोशल मीडिया और वॉट्सऐप पर एक ‘गेस पेपर’ वायरल हुआ, जिसके सवाल असली परीक्षा से हूबहू मैच कर रहे थे. चौतरफा दबाव और धांधली के पुख्ता सबूत मिलने के बाद एनटीए ने 12 मई 2026 को इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला लिया, जिससे 22 लाख से ज्यादा उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं. वर्तमान में इस मामले की कमान CBI के हाथों में है, जो कई आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर ले चुकी है. About the Author Deepali PorwalSenior Sub Editor Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Source link

Scroll to Top