भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Author name: scsmdos@gmail.com

ताज़ा खबर

Adhik Maas Food Rules Tips 2026 what to eat and not to...

Adhik Maas Food Rules Tips 2026: अधिकमास की शुरुआत 17 मई से हो गई है और समापन 15 जून को होगा, यह दो महीने का होने वाला दुर्लभ ज्येष्ठ अधिकमास है. हिंदू धर्म में अधिकमास को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ देखा जाता है. अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह लगभग हर तीन साल में एक बार आता है. इस पूरे मास में भगवान नारायण की पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई भक्ति और सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है. शास्त्रों में अधिकमास को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं और इन नियमों में खान-पान से जुड़े नियम भी शामिल हैं. आइए जानते हैं कैसे बनता है यह अधिकमास और इस मास में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं… कैसे बनता है अधिकमास?हिंदू पंचांग चंद्र और सूर्य की गति पर आधारित होता है. चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सूर्य वर्ष 365 दिनों का. दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. यही अंतर हर तीन साल में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है. इस संतुलन को बनाए रखने के लिए हिंदू कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस मास को भगवान विष्णु ने अपना नाम ‘पुरुषोत्तम मास’ देकर विशेष महत्व प्रदान किया था. अधिकमास में खान-पान को लेकर नियमअधिकमास की शुरुआत के साथ ही लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि इस पवित्र अवधि में क्या खाएं और क्या नहीं. मान्यता है कि अधिकमास भगवान की साधना, दान और सात्त्विक लाइफस्टाइल के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए खानपान पर भी संयम रखना जरूरी बताया जाता है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दौरान ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे फल, मौसमी सब्ज़ियां, घर का बना सादा खाना, दालें और कम मसाले वाले व्यंजन सेवन करने की सलाह दी जाती है. वहीं, तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार, जंक फूड, मांसाहार और शराब से दूर रहने की बात कही जाती है. कई श्रद्धालु इस महीने में लहसुन-प्याज का भी परहेज करते हैं और व्रत रखकर फलाहार या केवल एक समय भोजन करते हैं. आस्थावान लोग मानते हैं कि अधिकमास में शुद्ध और सात्त्विक भोजन ना केवल शरीर को हल्का रखता है बल्कि मन को भी शांत और भक्ति में एकाग्र करता है. अधिकमास में क्या ना खाएं?अधिकमास के दौरान, दाल, मूली, प्याज, लहसुन, फूलगोभी, मूंगफली, सोयाबीन, उड़द दाल, बैंगन, शहद, चंदन, चुकंदर, सब्जियां, औषधियां, मछली, मांस, अंडे, कोई भी तामसिक भोजन, तिल का तेल और गाजर खाने से बचना चाहिए. इन सभी चीजों के साथ पराया अन्न, तंबाकू, मदिरा हमेशा-हमेशा के लिए त्याग दें. अधिकमास में क्या खाएं?महर्षि वाल्मीकि के अनुसार, अधिकमास में गेहूं, चावल, गाय का घी, मूंग, जौ, मटर, तिल, कटहल आदि चीजों का सेवन करना चाहिए. वहीं आम, केला, आंवला, ककड़ी, बथुआ, जीरा, सौंठ और सेंधा नमक का सेवन करना चाहिए. Source link

झारखंड

रिम्स इमरजेंसी… आरएल-एनएस तक बाहर से खरीद रहे परिजन

हेल्थ रिपोर्टर| रांची रिम्स इमरजेंसी में जरूरी दवाओं और मेडिकल सामग्री की कमी एक बार फिर सामने आई है। शुक्रवार देर रात एक गंभीर मरीज के इलाज के दौरान परिजनों को स्लाइन, इंजेक्शन और अन्य जरूरी सामान बाहर से खरीदकर लाना पड़ा। इस दौरान ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर भी कुछ देर तक परेशानी बनी रही। मिली जानकारी के अनुसार, चिरौंदी स्थित वृंदावन कॉलोनी की एक महिला अपने 16 वर्षीय बेटे को रात करीब 11 बजे रिम्स इमरजेंसी लेकर पहुंची। युवक की हालत गंभीर थी। उसे इमरजेंसी के माइनर ओटी में भर्ती कर ऑक्सीजन मास्क लगाया गया। हालांकि, कुछ देर तक उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। बाद में ड्यूटी पर पहुंचे सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर इमरजेंसी में पहुंचे तो देखा कि ऑक्सीजन चल ही नही रहा था, उस सिलिंडर में स्टॉक खत्म था। इसके बाद दूसरे ऑक्सीजन प्वाइंट से सप्लाई सुनिश्चित कराई, जिसके बाद मरीज की स्थिति में सुधार होने लगा। टैबलेट डाइक्लोफेनेक 50 एमजी, इंट्राकोनाजोल 100 एमजी, सिरप मेट्रोनिडाजोल, ड्रॉप विटामिन डी3, पैरासिटामोल आईवी समेत अन्य दवाएं स्टॉक में फिलहाल नहीं है। स्लाइन नहीं मिलने से दवा चढ़ाने में हुई देरी इलाज के दौरान डॉक्टरों ने कुछ जरूरी दवाएं लिखीं, लेकिन उन्हें चढ़ाने के लिए आवश्यक स्लाइन आरएल व एनएस तक इमरजेंसी में उपलब्ध नहीं था। इसके बाद परिजन बाहर की दुकान से स्लाइन लेकर आए। करीब एक घंटे बाद मरीज को पहली दवा दी जा सकी। इमरजेंसी में मौजूद अन्य मरीजों के परिजनों ने भी बताया कि कई जरूरी सामग्री बाहर से खरीदनी पड़ रही है। एक परिजन ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उनके मरीज के लिए एनएस, इंजेक्शन और 50 एमएल सीरिंज तक बाहर से मंगाना पड़ा। Source link

झारखंड

निजी अस्पतालों को चेतावनी; मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं, पैसे को...

हेल्थ रिपोर्टर | रांची रांची के जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने शनिवार को जिले के निजी अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। समाहरणालय सभागार में आयोजित बैठक में अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था, मरीजों के अधिकार, फायर सेफ्टी, इलेक्ट्रिकल ऑडिट, अल्ट्रासाउंड सेंटरों में लिंग जांच रोकथाम और आयुष्मान भारत योजना के भुगतान जैसे कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी-सह-हेल्थ नोडल पदाधिकारी राजेश साहू, आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक आशीष रंजन समेत विभिन्न निजी अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक के दौरान उपायुक्त ने निजी अस्पतालों द्वारा बिल भुगतान नहीं होने पर मरीजों के शव रोकने की शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पैसे के अभाव में शव परिजनों को नहीं सौंपना राज्य सरकार के आदेश और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का सीधा उल्लंघन है। आयुष्मान भुगतान में गड़बड़ी पर एफिलिएशन रद्द होगा उपायुक्त ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अस्पतालों को होने वाले भुगतान की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने कहा कि सभी अस्पताल स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन का पालन करें, ताकि भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने चेतावनी दी कि दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों का एफिलिएशन भी रद्द किया जा सकता है।उन्होंने सभी अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया कि किसी भी परिस्थिति में मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी न करें। ऐसा करने वाले अस्पतालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अस्पतालों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल ऑडिट अनिवार्य उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने सभी निजी अस्पतालों को फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में लगे इलेक्ट्रिकल वायरिंग, मेडिकल इक्यूपमेंट्स, आईसीयू में संचालित एसी और जेनरेटर का समय-समय पर विशेषज्ञों से ऑडिट कराया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में देशभर में अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं चिंता का विषय रही हैं, इसलिए सुरक्षा मानकों से किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं होना चाहिए। निर्देश… लिंग जांच कानून का पालन करें सभी अल्ट्रासाउंड सेंटर उपायुक्त ने जिले में संचालित सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत लिंग निर्धारण संबंधी कानून का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी सेंटर की संलिप्तता भ्रूण लिंग जांच जैसे अवैध कार्य में पाई जाती है तो संबंधित संस्थान और व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को अपने निबंधन की वैधता समाप्त होने से पहले नवीकरण के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया । Source link

ताज़ा खबर

‘मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा’ , अरशद मदनी...

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने आरोप लगाया है कि देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश की जा रही है. मदनी ने दावा किया कि पहले केवल मुसलमान निशाने पर थे. अब इस्लाम को भी निशाना बनाया जा रहा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा. अरशद मदनी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जमीयत उलमा-ए-हिंद की कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक का घोषणापत्र जारी किया. मदनी ने कहा, ‘देश के वर्तमान हालात, बढ़ती सांप्रदायिकता, संवैधानिक संस्थाओं की चुप्पी, मुसलमानों और इस्लामी प्रतीकों के खिलाफ बढ़ते कदम तथा नफरत आधारित राजनीति अत्यंत चिंताजनक है. हालांकि मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा. वह प्रेम से झुक सकता है, लेकिन ताकत, धमकी और अत्याचार के सामने उसे कभी झुकाया नहीं जा सकता.’ मदनी ने पोस्ट में लिखा, ‘देश में नफरत की राजनीति अब धमकी की राजनीति में बदल चुकी है, जिसका उद्देश्य मुसलमानों को भयभीत करके उन्हें अपनी शर्तों पर जीवन बिताने के लिए मजबूर करना है. सत्ता प्राप्ति के लिए अमन और एकता के साथ खतरनाक खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप धार्मिक उन्माद और नफरत लगातार बढ़ रही है, जबकि कानून के रखवाले मूकदर्शक बने हुए हैं. हालिया चुनावों के बाद कुछ राजनीतिज्ञों में नफरत के आधार पर सत्ता हासिल करने का चलन और बढ़ गई है. बहुसंख्यक समुदाय को अल्पसंख्यकों के विरुद्ध खड़ा करने के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़काया जा रहा है, जबकि सरकारें भय और धमकी से नहीं बल्कि न्याय और इंसाफ से चलती हैं.’ अरशद मदनी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बयान का जिक्र किया. मदनी ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री का यह बयान कि वे ‘सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करेंगे’ संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के पूरी तरह विरुद्ध है, क्योंकि हर मुख्यमंत्री शपथ लेकर सभी नागरिकों के साथ न्याय करने का संकल्प लेता है. सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नफरत और विभाजन की राजनीति करना.’ इसके साथ ही, मदनी ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, ‘देश को योजनाबद्ध तरीके से एक वैचारिक राष्ट्र में बदलने की कोशिश की जा रही है. समान नागरिक संहिता, वंदे मातरम को अनिवार्य बनाना, मस्जिदों और मदरसों के खिलाफ कार्रवाइयां व एसआईआर की आड़ में वास्तविक नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने जैसे कदम इसी सिलसिले की कड़ियां हैं.’ मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद इन सभी कदमों के खिलाफ अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी. मदनी ने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने भी मुसलमानों को सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया, लेकिन आज हालात उससे कहीं अधिक गंभीर हो चुके हैं. पहले केवल मुसलमान निशाने पर थे. अब इस्लाम को भी निशाना बनाया जा रहा है. अरशद मदनी ने कहा, ‘वर्ष 2014 के बाद बनाए गए कानूनों और हालिया कदमों इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि वर्तमान सरकार केवल मुसलमानों ही नहीं, बल्कि इस्लाम को भी नुकसान पहुंचाना चाहती है.’ जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने अपने पोस्ट के आखिर में लिखा, ‘हम सभी न्यायप्रिय दलों, सामाजिक संगठनों और देशहित में सोचने वाले नागरिकों से अपील करते हैं कि वे एकजुट होकर सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों का लोकतांत्रिक और सामाजिक स्तर पर मुकाबला करें व देश में भाईचारा, सहिष्णुता, न्याय और संविधान की सर्वोच्चता के लिए संयुक्त संघर्ष करें.’ Source link

झारखंड

नींबू का पौधा नहीं दे रहा फल? देवघर के कृषि एक्सपर्ट ने...

होमताजा खबरकृषि नींबू का पौधा नहीं दे रहा फल? देवघर के कृषि एक्सपर्ट ने बताया आसान घरेलू उपाय Last Updated:May 17, 2026, 13:33 IST नींबू के पौधे में फूल और फल नहीं आ रहे हैं तो मछली के वेस्ट से तैयार ये देसी खाद आपके बेहद काम आ सकती है.कृषि एक्सपर्ट के अनुसार सही समय पर इस घरेलू उपाय को अपनाने से नींबू का पेड़ फलों से लद सकता है. देवघर: गर्मी का मौसम शुरू होते ही नींबू पानी की मांग तेजी से बढ़ जाती है. तेज धूप और उमस भरी गर्मी में नींबू पानी शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ डिहाइड्रेशन से बचाने में भी मदद करता है. यही वजह है कि इन दिनों लोग अपने घर के आंगन, किचन गार्डन या छत पर गमले में भी नींबू का पौधा लगाना पसंद करते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर ताजा नींबू आसानी से मिल सके. हालांकि, कई लोगों की शिकायत रहती है कि नींबू के पौधे में फूल तो आते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में झड़ जाते हैं. वहीं कई पौधों में लंबे समय तक फूल और फल नहीं लगते. ऐसे में लोग समझ नहीं पाते कि पौधे की सही देखभाल कैसे की जाए. क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञदेवघर के कृषि विशेषज्ञ अम्बिका कुशवाहा ने इस समस्या को लेकर कई आसान और घरेलू उपाय बताए हैं. उन्होंने कहा कि सबसे पहले लोगों को अच्छी किस्म का नींबू का पौधा लगाना चाहिए. कई बार लोग बिना जानकारी के कहीं से भी छोटा पौधा खरीदकर लगा देते हैं, जिसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं होती. ऐसे पौधों में फूल और फल दोनों कम आते हैं. अगर शुरुआत में अच्छी किस्म का पौधा लगाया जाए तो पौधा तेजी से बढ़ता है और उसमें अच्छे फल लगते हैं. फूल आने पर पानी देने में बरतें सावधानीकृषि विशेषज्ञ ने बताया कि नींबू के पौधे में फूल आने के समय सबसे ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत होती है. कई लोग पौधे में फूल आते ही रोज पानी देना शुरू कर देते हैं, लेकिन यह सबसे बड़ी गलती होती है. ज्यादा पानी देने से फूल कमजोर होकर झड़ने लगते हैं.उन्होंने सलाह दी कि जब पौधे में फूल आएं, तब कुछ समय तक पटवन नहीं करना चाहिए. जब फूल छोटे फल का रूप लेने लगें और मटर के दाने जितने हो जाएं, तब हल्का पानी देना चाहिए. इससे पौधे की पकड़ मजबूत रहती है और फल गिरने की संभावना कम हो जाती है. मछली का छिलका बन सकता है प्राकृतिक खादअम्बिका कुशवाहा ने बताया कि अगर नींबू के पौधे में लंबे समय तक फूल नहीं आ रहे हैं, तो बाजार से महंगे खाद और दवाइयां खरीदने की जरूरत नहीं है. इसके लिए घर में मौजूद जैविक चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पौधे की जड़ से करीब एक फीट दूर चारों तरफ हल्की खुदाई कर लें. इसके बाद उसमें मछली का छिलका और घर का जैविक कचरा डाल दें. फिर उसे मिट्टी से ढंककर हल्का पानी दें. यह घरेलू उपाय प्राकृतिक खाद का काम करता है. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधे में धीरे-धीरे फूल और फल आने लगते हैं. समय-समय पर करें कटाई-छंटाईकृषि विशेषज्ञ के अनुसार नींबू के पौधे को ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती, लेकिन सही समय पर कटाई-छंटाई करना जरूरी है. इससे नई शाखाएं निकलती हैं और पौधा तेजी से बढ़ता है. साथ ही पौधे को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां उसे भरपूर धूप मिल सके. धूप की कमी होने पर भी पौधे में फूल और फल कम आते हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसान और घरों में पौधे लगाने वाले लोग इन आसान बातों का ध्यान रखें, तो उनके नींबू के पौधे सालभर हरे-भरे रहेंगे और भरपूर फल देंगे. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Deoghar,Jharkhand Source link

झारखंड

पुलिस हिरासत में प्रेमी, छुड़ाने के लिए टावर चढ़ी प्रेमिका:धनबाद में डेढ़...

धनबाद के गोमो क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवती अपने प्रेमी को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गई। यह घटना सिकलाइन इलाके की है। जहां करीब डेढ़ घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। युवती की पहचान शाहरिया निवासी देवन्ती कुमारी के रूप में हुई है। वह एक शादीशुदा युवक से प्रेम करती है। बताया जा रहा है कि उक्त युवक को निमियाघाट थाना पुलिस ने किसी मामले में गिरफ्तार किया है। प्रेमी की गिरफ्तारी से आहत युवती सीधे मोबाइल टावर पर चढ़ गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। रिहाई और शादी की मांग पर अड़ी रही टावर पर चढ़ी युवती को नीचे उतारने के लिए पुलिस और स्थानीय लोगों ने काफी प्रयास किया, लेकिन वह अपनी मांगों पर अड़ी रही। नीचे खड़े लोगों से वह लगातार यही कहती रही कि उसके प्रेमी को तुरंत रिहा किया जाए और उसकी शादी उसी से कराई जाए। स्थिति को देखते हुए हरिहरपुर थाना की पुलिस भी मौके पर पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई। मुखिया अहमद अली ने बताया कि युवती काफी देर तक टावर पर चढ़ी रही। सभी के समझाने के बावजूद नीचे आने को तैयार नहीं थी। परिजनों को दी गई सूचना काफी मशक्कत के बाद पुलिस और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से युवती को सुरक्षित नीचे उतारा गया। इसके बाद उसे थाने ले जाया गया। परिजनों को सूचना दी गई। हरिहरपुर थाना के सब-इंस्पेक्टर दयचंद हांसदा ने बताया कि युवती अपने प्रेमी को बुलाने और उससे शादी कराने की मांग कर रही है। परिजनों के आने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी सामने आ पाएगी। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है। Source link

झारखंड

पाकुड़ में बीजीआर कंपनी से 50 लाख की लेवी मांग:निर्माण स्थल पर...

पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र में कोयला उत्खनन कार्य में लगी बीजीआर कंपनी से 50 लाख रुपए की लेवी मांगने का मामला सामने आया है। यह मांग कथित तौर पर एक उग्रवादी संगठन के नाम पर की गई है। जानकारी के अनुसार, बड़दाहा गांव के निकट इकड़ी नाले पर कंपनी द्वारा पुल निर्माण कार्य चल रहा है। बीते 14 मई की रात दो नकाबपोश बदमाश निर्माण स्थल पर पहुंचे और वहां मौजूद कर्मियों को डरा-धमकाकर लेवी की पर्ची थमा दी। बदमाशों ने कर्मियों से पर्ची पढ़वाई और स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि तय राशि नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। कंपनी ने थाने में दर्ज कराई शिकायत घटना के बाद बीजीआर कंपनी प्रबंधन ने अमड़ापाड़ा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। थाना प्रभारी अनूप रोशन भेंगरा ने बताया कि कंपनी की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है और पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। कंपनी के पीआरओ संजय बेसरा ने भी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दो अज्ञात बदमाशों द्वारा साइट पर लेवी मांगी गई है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्यरत कर्मियों से पूछताछ की है।घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों को खंगाल रही है। नक्सली एंगल या स्थानीय बदमाश पुलिस इस मामले में कई पहलुओं पर जांच कर रही है। अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र में पहले नक्सली गतिविधियां रही हैं, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में उनकी मौजूदगी काफी कम हो गई है। ऐसे में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं यह घटना स्थानीय बदमाशों द्वारा नक्सली संगठन के नाम पर लेवी वसूली का प्रयास तो नहीं है। इससे पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी का दावा किया है। Source link

ताज़ा खबर

NEET Paper Leak Biwal Family Rajasthan: 12वीं में बमुश्किल पास हुए थे...

नई दिल्ली (NEET Paper Leak 2026). नीट यूजी परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक मामले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले और दिलचस्प मामले सामने आ रहे हैं. CBI की रडार पर इस समय राजस्थान के सवाई माधोपुर का एक ऐसा परिवार है, जिसके 5 बच्चों ने इस बेहद कठिन परीक्षा में ‘असाधारण’ स्कोर हासिल किया. ‘बिवाल परिवार’ के नाम से चर्चित इस कुनबे के 3 सदस्यों- दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और विकास बिवाल को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. जांच में सामने आया कि इस परिवार के जो बच्चे स्कूल-कॉलेज की सामान्य परीक्षाओं में बमुश्किल पास होते थे, उन्होंने नीट जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में टॉपर्स वाले नंबर हासिल कर लिए. CBI के हाथ लगे सबूत इशारा करते हैं कि यह सफलता किसी कड़ी मेहनत का नतीजा नहीं, बल्कि पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के सुनियोजित खेल की देन थी. दिनेश और मांगीलाल बिवाल पर आरोप है कि उन्होंने मोटी रकम के बदले न केवल अपने परिवार के बच्चों को लीक प्रश्नपत्र मुहैया कराया, बल्कि पूरा सिंडिकेट भी चलाया. हॉस्टल से गायब हुए बिवाल परिवार के बच्चे हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बिवाल परिवार को लेकर हुए खुलासे के बाद जांच की आंच जैसे ही उनके बच्चों तक पहुंची, परिवार के कई सदस्य और छात्र अचानक अपने-अपने मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल से गायब हो गए हैं. इस मामले ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और प्रामाणिकता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 12वीं में 55% और नीट में धमाका: विकास बिवाल की कहानी सीबीआई की गिरफ्त में आए इस परिवार के एक छात्र विकास बिवाल का रिकॉर्ड सबसे ज्यादा हैरान करने वाला है. विकास का 12वीं कक्षा में शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहद सामान्य था और उसने केवल 55 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. लेकिन जब नीट का रिजल्ट आया तो उसने अचानक 86 प्रतिशत अंक हासिल कर सबको चौंका दिया और सवाई माधोपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट सुरक्षित कर ली. मेडिकल कॉलेज में खुली पोल: 30% नंबर लाना भी भारी नीट में असाधारण स्कोर करने वाले विकास की असलियत तब सामने आई, जब उसने मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू की. कॉलेज प्रिंसिपल के मुताबिक, विकास पढ़ाई में बेहद कमजोर छात्र साबित हुआ और कॉलेज की इंटरनल परीक्षाओं में वह औसतन केवल 30 प्रतिशत अंक ही ला पाता था. पोल खुलने और चाचा की गिरफ्तारी के डर से विकास जनवरी महीने से ही बिना किसी सूचना के मेडिकल कॉलेज से गायब है. टॉपर भतीजी पलक और बेटी प्रगति भी रडार पर इस खेल में केवल विकास शामिल नहीं था. दिनेश बिवाल की भतीजी पलक ने नीट में 98.61 जैसे भारी-भरकम परसेंटाइल हासिल किए थे. उसे जयपुर का प्रतिष्ठित एसएमएस (SMS) मेडिकल कॉलेज मिला था. स्कूल में मेधावी रहने वाली पलक मेडिकल कॉलेज के टेस्ट में औसत छात्रा साबित हुई. अपने परिवार पर सीबीआई का शिकंजा कसते ही पलक भी अचानक हॉस्टल छोड़कर फरार हो गई है. इसी तरह मांगीलाल की बेटी प्रगति भी (नीट में 89% अंक) पिता की गिरफ्तारी वाले दिन से ही कॉलेज से छुट्टी पर चली गई है. ग्रेस मार्क्स से पास होने वाले भी डॉक्टर बनने की रेस में! इस परिवार का फर्जीवाड़ा यहीं नहीं रुका. इस साल नीट की परीक्षा में बैठने वाले परिवार के दो अन्य छात्र ऋषि और अमन का रिकॉर्ड तो और भी खराब है. इनमें से ऋषि ने अपनी 12वीं की परीक्षा बेहद मुश्किल से ग्रेस मार्क्स (कृपांक) के सहारे केवल 50% अंकों के साथ पास की थी. सीबीआई को अंदेशा है कि इन दोनों को भी परीक्षा पास कराने के लिए इसी शॉर्टकट और लीक पेपर का सहारा दिया जा रहा था. कैसे काम करता था बिवाल परिवार का ‘पारिवारिक रैकेट’? सीबीआई की जांच में यह बात साफ हो रही है कि दिनेश और मांगीलाल बिवाल केवल अपने बच्चों का भविष्य नहीं संवार रहे थे, बल्कि वे इस पेपर लीक नेटवर्क के मुख्य बिचौलिए थे. वे अन्य कमजोर और औसत छात्रों के अभिभावकों से संपर्क साधते थे और लाखों रुपये लेकर उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और सॉल्वर गैंग के कोड्स उपलब्ध कराते थे. जांच एजेंसियां अब इस परिवार के पुराने रिकॉर्ड और बैंक खातों को खंगाल रही हैं ताकि पता चल सके कि यह खेल कितने सालों से चल रहा था. Source link

झारखंड

देवघर में रास्ते में एंबुलेंस हुआ खराब, मरीज फंसा:दूसरा एंबुलेंस रस्सियों से...

देवघर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है। सारठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रेफर मरीज को ले जा रही एंबुलेंस बीच रास्ते में अचानक खराब हो गई। जिससे मरीज और उसके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि खराब एंबुलेंस को दूसरी एंबुलेंस की मदद से खींचकर गैरेज तक ले जाना पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो एक राहगीर ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया। अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। वे स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं। एंबुलेंसकर्मी बोला- पहले भी दी गई थी सूचना एंबुलेंस कर्मियों ने बताया कि संबंधित वाहन काफी पुराना हो चुका है। उसमें लगातार तकनीकी खराबियां आती रहती हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या की जानकारी कई बार विभागीय अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसे हालात में गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है, जिससे उनकी जान भी खतरे में पड़ सकती है। इस घटना ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वेतन-पेमेंट में देरी से कर्मियों में नाराजगी इधर, एंबुलेंस कर्मियों ने वेतन भुगतान में देरी और पीएफ कटौती को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि कई महीनों से उनका वेतन लंबित है। जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक स्वास्थ्य विभाग अपनी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं करेगा, तब तक ऐसी घटनाएं सामने आती रहेंगी। Source link

झारखंड

केदला खदान में करंट से ठेका मजदूर की मौत:दूसरा गंभीर घायल, परिजन...

रामगढ़ जिले के घाटों थाना क्षेत्र स्थित सीसीएल की केदला अंडरग्राउंड खदान में बड़ा हादसा हो गया। करंट लगने से एक ठेका मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतक की पहचान 31 वर्षीय राजू महतो (पुत्र स्व. चुरामन महतो) के रूप में हुई है। वहीं घायल मजदूर 21 वर्षीय मुकेश कुमार महतो (पुत्र शिव नारायण महतो) हैं। यह हादसा केदला भूगर्भ परियोजना के तीन नंबर माइंस के पास ट्रांसफार्मर के समीप हुआ, जहां दोनों मजदूर मेंटेनेंस कार्य में लगे हुए थे। घटना के बाद खदान परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घायल का गंभीर हालत में इलाज हादसे के तुरंत बाद दोनों मजदूरों को घाटों के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने राजू महतो को मृत घोषित कर दिया। गंभीर रूप से घायल मुकेश कुमार महतो को बेहतर इलाज के लिए रांची रोड स्थित पाली डॉग अस्पताल रेफर किया गया है। जहां उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। घटना से आक्रोशित परिजन और ग्रामीण खदान का गेट जाम कर धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि जब तक मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी नहीं दी जाएगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सुरक्षा मानकों पर सवाल बताया जा रहा है कि दोनों मजदूर ठेकेदार विपिन शर्मा के अधीन कार्यरत थे। पिछले कुछ दिनों से वहां मेंटेनेंस का काम चल रहा था। यह बिजली लाइन परियोजना की एलसीएच कॉलोनी में जाती है। परिजनों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर ट्रांसफार्मर के पास इस तरह करंट कैसे पहुंचा। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए सीसीएल के सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब आठ महीने पहले भी इसी स्थान पर इसी तरह की घटना हुई थी, जिसमें एक मजदूर की मौत और दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ था। इसके बावजूद सुरक्षा में सुधार नहीं किया गया। लोगों ने जिला प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है। Source link

Scroll to Top