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Bokaro का 100 साल पुराना मंदिर, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाया जाता...


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Baba Bada Saheb Than: झारखंड के बोकारो जिले के सिद्धि गांव स्थित बाबा बड़ा साहेब थान श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. 100 वर्षों से अधिक समय से यहां पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है. श्रद्धालु चावल, सिंदूर और सुपारी अर्पित करते हैं. वहीं, मन्नत पूरी होने पर मिट्टी का घोड़ा चढ़ाने की परंपरा है.

बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले के चास प्रखंड से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित सिद्धि गांव का बाबा बड़ा साहेब थान श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां सिर्फ बोकारो ही नहीं, बल्कि झारखंड, पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मान्यता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है. यही कारण है कि सालभर इस देवस्थान पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है.

100 वर्षों से चली आ रही परंपरा
स्थानीय पुजारी सुनील लाया बताते हैं कि बाबा बड़ा साहेब थान में 100 वर्षों से भी अधिक समय से पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है. उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों के समय से ही यहां नियमित पूजा होती रही है. सप्ताह के सातों दिन और साल के 12 महीने श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं.

चावल, सिंदूर और सुपारी चढ़ाने की परंपरा
पुजारी के अनुसार, श्रद्धालु बाबा बड़ा साहेब को मुख्य रूप से चावल, सिंदूर और सुपारी अर्पित करते हैं. जिन लोगों की मनोकामना पूरी हो जाती है, वे परंपरा के अनुसार मिट्टी का घोड़ा चढ़ाते हैं. वहीं, कुछ श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार बकरे की बलि भी अर्पित करते हैं.

प्रसाद को लेकर है खास धार्मिक परंपरा
बाबा बड़ा साहेब थान में प्रसाद को लेकर भी वर्षों पुरानी विशेष परंपरा निभाई जाती है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, बलि के बाद तैयार होने वाले प्रसाद को महिलाएं ग्रहण नहीं करती हैं. इसके अलावा इस प्रसाद को देवस्थान या नदी के उस पार ले जाने की अनुमति भी नहीं होती. श्रद्धालुओं को प्रसाद मंदिर परिसर में ही बैठकर ग्रहण करना पड़ता है. ग्रामीण इसे अपनी धार्मिक परंपरा और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं.

बाबा बड़ा साहेब का इतिहास
बाबा बड़ा साहेब थान से जुड़ी एक लोककथा भी काफी प्रसिद्ध है. पुजारी सुनील लाया बताते हैं कि उन्होंने यह कथा अपने पूर्वजों से सुनी है. लोकमान्यता के अनुसार, बाबा बड़ा साहेब एक पराक्रमी राजा थे. वे गांव और आसपास के क्षेत्रों की रक्षा करते थे. कहा जाता है कि एक बार गांव को शत्रुओं से बचाने के लिए उन्होंने भीषण युद्ध लड़ा. उन्होंने दुश्मनों को पराजित कर दिया, लेकिन युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए. कुछ समय बाद ग्रामीणों को आकाशवाणी हुई, जिसमें बाबा की पूजा करने का निर्देश मिला. इसके बाद ग्रामीणों ने इस स्थान पर पूजा-अर्चना शुरू की. धीरे-धीरे यह स्थल लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बन गया.

श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास
रोपो गांव से पूजा करने पहुंचे श्रद्धालु मनोज गोराई ने बताया कि बाबा बड़ा साहेब थान में जो भी व्यक्ति सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ अपनी मनोकामना लेकर आता है, उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है. यही विश्वास हर साल हजारों श्रद्धालुओं को इस पवित्र स्थान तक खींच लाता है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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