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सोना चांदी की कीमतें कैसे तय होती हैं जानें Ram Avtar Verma...

Last Updated:January 14, 2026, 07:38 IST Sone Chandi Ka Bhav : भारत में सोना 1 लाख 46000 प्रति 10 ग्राम और चांदी 2 लाख 75000 प्रति किलो पहुंच गई है. बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन राम अवतार वर्मा के अनुसार कीमतें डॉलर रेट, आयात शुल्क और वैश्विक मांग से तय होती हैं. आइये जानते हैं इसके बारे में. ख़बरें फटाफट नई दिल्ली : भारत में सोने चांदी की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है. आम नागरिक की पहुंच से सोना और चांदी दोनों बाहर हो गए हैं. चांदी इतिहास में पहली बार सोने से ज्यादा महंगी चल रही है. सोने की कीमतें जहां 1 लाख 46000 प्रति 10 ग्राम है तो वहीं, चांदी की कीमत 2 लाख 75000 के करीब प्रति किलो चल रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल अक्सर उठता है कि आखिर सोने-चांदी की कीमतें कैसे तय होती है और कौन तय करता है. कैसे सोना महंगा हो रहा है और चांदी रिकॉर्ड तोड़ रही है. इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए दिल्ली के कूचा महाजनी के दि बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन राम अवतार वर्मा से लोकल 18 की टीम ने बातचीत की. उन्होंने बताया कि चांदी इस समय सोने से ज्यादा महंगी चल रही है. आने वाले समय में सोना और चांदी सस्ते होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है. पिछले कई महीनो से सोने और चांदी के भाव बढ़ रहे हैं. पहले सोने और चांदी के भाव हजारों में चलते थे अब लाखों में चल रहे हैं. ऐसे तय होती हैं सोने-चांदी की कीमतें कूचा महाजनी के दि बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन राम अवतार वर्मा ने बताया कि सोने चांदी की कीमतें फॉरेन करेंसी यानी विदेशी मुद्रा के हिसाब से तय होती हैं. जैसे भारत का रुपया डॉलर के हिसाब में क्या भाव पड़ता है. कितने डॉलर में क्या रेट आ रहा है और भारत में सोने और चांदी की कीमतें सीधे सरकार तय नहीं करती हैं, बल्कि ये कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों के जोड़ से बनती हैं. जैसे अंतरराष्ट्रीय कीमत में सोना-चांदी की वैश्विक कीमत अमेरिकी डॉलर (USD) में तय होती है. उन्होंने बताया कि एक लाइन में समझें तो भारत में सोने-चांदी की कीमत = अंतरराष्ट्रीय भाव + डॉलर रेट + आयात शुल्क + जीएसटी + स्थानीय खर्च इन सबसे तय होता है. इस वजह से बढ़ रहे सोने-चांदी के भाव कूचा महाजनी के दि बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन राम अवतार वर्मा ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब से भारत के ऊपर टैरिफ दर बढ़ा दिए हैं. तब से सोना-चांदी लगातार महंगा होता जा रहा है. एक कारण यह भी है कि लोगों का विश्वास अब डॉलर से उठ रहा है. सोने चांदी में लोगों का विश्वास ज्यादा बढ़ रहा है तो जितने भी देश हैं, चाहें चीन हो, भारत हो या दूसरे देश सभी ने अपने देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए सोना-चांदी बड़े पैमाने पर खरीद कर रख लिया है. उन्होंने बताया कि सोना-चांदी किसी भी देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने में बहुत मदद करता है. जब सभी देशों ने सोना चांदी जमकर खरीद लिया तो उस वजह से भी सोने और चांदी के भाव बढ़ गए हैं. यह भाव अभी गिरेंगे नहीं, बल्कि और बढ़ेंगे. आने वाले समय में ज्वैलरी इंडस्ट्री को ऐसा नहीं लगता है कि सोना और चांदी के भाव लाखों के नीचे आएंगे. जैसे पहले भाव चलता था हजारों में, वैसा आने की संभावना नजर नहीं आ रही है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : January 14, 2026, 07:35 IST Source link

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घर से होटल तक, हर जगह छाया वुडन फर्नीचर का बिज़नेस, मुनाफ़ा...

Last Updated:January 14, 2026, 11:44 IST अगर आप अपना खुद का कारोबार शुरू करने का सपना देख रहे हैं और कम लागत, कम जोखिम व लगातार मुनाफ़े वाला विकल्प तलाश रहे हैं, तो वुडन फर्नीचर बिज़नेस आपके लिए सही मौका हो सकता है. बदलते ट्रेंड के बीच घर, दुकान, ऑफिस, फ्लैट और होटल हर जगह लकड़ी के फर्नीचर की मांग बनी हुई है, जो इस बिज़नेस को लंबे समय तक चलने वाला मजबूत आधार देती है. आज के समय में वुडन फर्नीचर का बिज़नेस काफ़ी कारगर साबित हो रहा है, क्योंकि लोग प्लास्टिक और लोहे की जगह टिकाऊ और दिखने में शानदार लकड़ी के फर्नीचर को प्राथमिकता दे रहे हैं. घर, दुकान, ऑफिस, होटल और फ्लैट हर जगह फर्नीचर की ज़रूरत बनी हुई है. खासकर कस्टमाइज्ड फर्नीचर की मांग तेज़ी से बढ़ी है, वहीं ऑनलाइन ऑर्डर, रील्स और सोशल मीडिया के ज़रिये ग्राहक सीधे जुड़ रहे हैं. यदि क्वालिटी और समय पर डिलीवरी दी जाए, तो यह बिज़नेस लंबे समय तक स्थिर मुनाफ़ा दे सकता है. वुडन फर्नीचर बिज़नेस की शुरुआत छोटे स्तर पर 1.5 से 3 लाख रुपये में की जा सकती है, जिसमें कटर मशीन, प्लेनर, ड्रिल मशीन, पॉलिश टूल्स और कच्चा माल शामिल होता है. यदि रेडीमेड फर्नीचर बेचा जाए तो लागत थोड़ी ज़्यादा हो सकती है. मीडियम लेवल पर वर्कशॉप और शोरूम दोनों के लिए 5 से 8 लाख रुपये का निवेश पर्याप्त रहता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इस बिज़नेस को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है, जिससे जोखिम कम रहता है. वुडन फर्नीचर बिज़नेस में 25% से 40% तक मुनाफ़ा आसानी से निकल आता है, जबकि कस्टम ऑर्डर में यह मार्जिन और भी ज़्यादा हो सकता है. जैसे-जैसे ग्राहक बढ़ते हैं और रेफरेंस मिलते हैं, लागत कम होती जाती है और कमाई बढ़ती है. बेड, अलमारी, सोफा और किचन कैबिनेट जैसे प्रोडक्ट हमेशा मांग में रहते हैं. यदि पॉलिश और फिनिशिंग अच्छी हो, तो ग्राहक ज्यादा कीमत देने को भी तैयार रहता है. सही डिज़ाइन और भरोसे के साथ यह बिज़नेस रोज़गार के साथ अच्छी आमदनी देता है. Add News18 as Preferred Source on Google यदि आप केवल ऑर्डर लेकर काम करवाते हैं, तो 200–300 स्क्वायर फीट की दुकान पर्याप्त होती है. वहीं, खुद की वर्कशॉप लगाने के लिए कम से कम 600–1000 स्क्वायर फीट जगह बेहतर मानी जाती है. शोरूम यदि रोड साइड या रिहायशी इलाके के पास हो, तो ग्राहकी जल्दी बनती है, जबकि वर्कशॉप थोड़ी बाहर भी हो सकती है ताकि किराया कम पड़े. सही प्लानिंग के साथ जगह का पूरा उपयोग किया जाए, तो छोटा स्पेस भी बड़े मुनाफ़े का जरिया बन सकता है. फर्नीचर बिज़नेस में लकड़ी और कारीगर सबसे अहम भूमिका निभाते हैं. शीशम, सागवान, प्लाई और MDF का सही चुनाव करना ज़रूरी होता है, वहीं भरोसेमंद लकड़ी सप्लायर से जुड़ना लागत को कंट्रोल में रखता है. काम की क्वालिटी अनुभवी कारीगर तय करते हैं और शुरुआत में 1–2 कारीगर भी पर्याप्त होते हैं. यदि डिज़ाइन और फिटिंग मजबूत हो, तो ग्राहक दोबारा लौटकर आता है. इसलिए क्वालिटी से किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए. आज के समय में सोशल मीडिया फर्नीचर बिज़नेस का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है. Instagram और Facebook पर तैयार फर्नीचर की रील्स डालकर आसानी से ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा सकती है. WhatsApp कैटलॉग के ज़रिये प्रोडक्ट दिखाना भी कारगर रहता है. इसके साथ लोकल बिल्डर और इंटीरियर डिजाइनर से संपर्क बनाए रखना ज़रूरी है. समय पर डिलीवरी और सही रेट आपकी पहचान बनाते हैं. ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन प्रचार करने से धीरे-धीरे ब्रांड नाम बनता है और ऑर्डर अपने आप आने लगते हैं. First Published : January 14, 2026, 11:44 IST Source link

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ये 5 सुपर-प्रोड्यूसर मुर्गियां, जो देती हैं साल भर अंडों की बारिश,...

Last Updated:January 16, 2026, 19:08 IST आज के समय में मुर्गी पालन किसानों और पशुपालकों के लिए आय का एक भरोसेमंद जरिया बन चुका है. विशेषकर वे नस्लें जो अधिक अंडे देती हैं, नियमित आमदनी सुनिश्चित करती हैं. सही नस्ल का चुनाव कर आप घरेलू पालन या व्यावसायिक फार्मिंग के माध्यम से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. आगे जानिए टॉप 5 ऐसी नस्लें जो अंडा उत्पादन में बेस्ट मानी जाती हैं. लेगॉर्न (Leghorn) नस्ल को दुनिया की सबसे अधिक अंडे देने वाली मुर्गी माना जाता है. यह सफेद अंडे देती है और साल में 280 से 320 तक या इससे भी अधिक अंडे देने की क्षमता रखती है. कम चारा, तेज उत्पादन और कम देखभाल इसकी सबसे बड़ी खासियतें हैं. दूसरे नंबर पर लोहमैन ब्राउन नस्ल की बात करें, तो यह व्यावसायिक मुर्गी पालन में बेहद लोकप्रिय मानी जाती है. यह लगातार और स्थिर अंडा उत्पादन करती है, जिससे बाजार में सप्लाई बनी रहती है. भूरे अंडों की अच्छी मांग के कारण यह नस्ल अपने मालिकों को बेहतर दाम दिलाती है. श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के पशुपालन और दुग्ध विज्ञान विभाग के प्रो. धर्मेंद्र सिंह के अनुसार, ईसा ब्राउन एक संकर नस्ल है, जो कम उम्र में ही अंडा देना शुरू कर देती है. यह सालाना लगभग 300 अंडे देती है और मौसम के उतार-चढ़ाव में भी अच्छा प्रदर्शन करती है. इसी वजह से छोटे और बड़े दोनों पशुपालकों के बीच इसकी अच्छी डिमांड बनी रहती है. Add News18 as Preferred Source on Google अंडा उत्पादन के लिए मुर्गी पालन करने वाले पशु मालिकों के बीच काले चमकदार पंखों वाली ऑस्ट्रेलोर्प नस्ल भी एक बेहतर विकल्प मानी जाती है. इसमें ठंड सहने की अच्छी क्षमता होती है. यह साल में लगभग 250 या उससे अधिक अंडे दे सकती है. स्वभाव से शांत होने के कारण यह नस्ल घरेलू पालन के लिए भी उपयुक्त रहती है. अब अगर रोड आइलैंड रेड नस्ल की बात करें, तो यह मुर्गियां अपने मजबूत शरीर और बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए पहचानी जाती हैं. यह भारतीय मौसम में आसानी से अनुकूलन कर लेती हैं और साल में 250 से अधिक अंडे देने की क्षमता रखती हैं. देसी परिस्थितियों में भी यह नस्ल एक भरोसेमंद विकल्प मानी जाती है. टॉप 5 नस्लों के अलावा गोल्डन कॉमेट, वायंडोट और ग्रामप्रिया जैसी नस्लें भी अंडा उत्पादन के मामले में किसी से कम नहीं हैं. हालांकि नस्ल का चयन करते समय स्थानीय जलवायु, चारे की उपलब्धता और बाजार की मांग को ध्यान में रखना जरूरी होता है. सही नस्ल का चुनाव करने से अंडा उत्पादन बढ़ता है और पशुपालकों की आमदनी में भी इजाफा होता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 16, 2026, 19:08 IST Source link

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जेब में एक रुपया नहीं, फिर भी लाखों की कमाई! जानिए जीरो...

Last Updated:January 17, 2026, 12:43 IST अगर आप नौकरी से परेशान हैं और सोच रहे हैं कि बिना ज्यादा निवेश के अपना काम शुरू किया जाए, तो यह खबर आपके लिए है. डिजिटल जमाने में बिजनेस शुरू करना अब आसान हो गया है. न कोई दुकान की जरूरत, न भारी पूंजी. बस सही सोच, थोड़ी समझदारी और कोई एक स्किल होने पर घर बैठे ही कमाई की शुरुआत की जा सकती है. आज के समय में बड़ी संख्या में लोग नौकरी छोड़कर खुद का बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं. नौकरी में मेहनत जरूर होती है, लेकिन कमाई और तरक्की की एक सीमा तय रहती है. वहीं, बिजनेस में इंसान अपने फैसले खुद लेता है और आगे बढ़ने की कोई तय सीमा नहीं होती. यही आज के युवाओं को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहा है. डिजिटल युग ने बिजनेस शुरू करना पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है. अब दुकान, ऑफिस या भारी पूंजी की जरूरत नहीं है मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेट की मदद से घर बैठे ही काम शुरू किया जा सकता है. यही वजह है कि छोटे शहरों और कस्बों से भी लोग ऑनलाइन काम करके अच्छी कमाई कर रहे हैं. अगर आपके पास कोई स्किल है, तो वही आपकी असली ताकत है. कंटेंट लिखना, डिजाइन बनाना, वीडियो एडिटिंग या ट्रांसलेशन जैसे काम बिना ज्यादा निवेश के शुरू किए जा सकते हैं. शुरुआत में काम कम मिलता है, लेकिन अनुभव बढ़ने के साथ-साथ क्लाइंट का भरोसा और कमाई दोनों धीरे-धीरे बढ़ने लगती है. Add News18 as Preferred Source on Google फ्रीलांसिंग प्लेटफॉर्म पर प्रोफाइल बनाकर लोग भारत ही नहीं, विदेशों से भी काम ले रहे हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि आप अपनी सुविधा और समय के अनुसार काम चुन सकते हैं. धीरे-धीरे ऐसा समय आता है जब आप खुद अपने रेट तय करने लगते हैं और आपकी आमदनी कई गुना बढ़ जाती है. आज सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा. यूट्यूब, इंस्टाग्राम और ब्लॉग के जरिए लोग पहचान के साथ-साथ कमाई भी कर रहे हैं. अगर आपको बोलना, सिखाना या लिखना पसंद है, तो आप अपने मनपसंद विषय पर कंटेंट बनाकर धीरे-धीरे बड़ी ऑडियंस तैयार कर सकते हैं. सोशल मीडिया पर जैसे-जैसे फॉलोअर्स बढ़ने लगते हैं, कमाई के रास्ते भी खुलने लगते हैं. ब्रांड डील, स्पॉन्सरशिप और एफिलिएट मार्केटिंग से अच्छी इनकम हासिल की जा सकती है. शुरुआत में धैर्य रखना जरूरी है, क्योंकि परिणाम धीरे-धीरे ही नजर आते हैं. जीरो इन्वेस्टमेंट बिजनेस में सबसे जरूरी चीज सही प्लानिंग और लगातार मेहनत है. जो लोग जल्दी हार नहीं मानते, वही आगे चलकर सफलता हासिल करते हैं. एक समय ऐसा भी आता है जब यह छोटा काम लाखों रुपये की स्थिर कमाई में बदल जाता है और नौकरी की जरूरत ही खत्म हो जाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 17, 2026, 12:43 IST Source link

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बीड़ा से बिजनेस तक, छत्तीसगढ़ के छुईखदान की महिलाओं ने पान को...

Last Updated:January 18, 2026, 22:24 IST छत्तीसगढ़ के छुईखदान का प्रसिद्ध पान एक बार फिर चर्चा में है. वर्ष 2000 से संचालित मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह की 12 महिलाएं पान से वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार कर रही हैं. पान फ्रेश, बीड़ा, लड्डू, चाय और पाउडर की सप्लाई रायपुर सहित बड़े शहरों तक हो रही है. अब तक 70 हजार का शुद्ध मुनाफा हो चुका है. CG News : छत्तीसगढ़ का छुईखदान क्षेत्र कभी पूरे प्रदेश में अपने खास और सुगंधित पान के लिए पहचाना जाता था. यहां का पान न सिर्फ स्थानीय बाजारों में, बल्कि आसपास के जिलों में भी काफी प्रसिद्ध था. हालांकि समय के साथ बाजार की उपेक्षा, प्रोत्साहन की कमी और बदलती उपभोक्ता आदतों के कारण छुईखदान के पान की पहचान धीरे-धीरे फीकी पड़ती चली गई. लेकिन अब एक बार फिर छुईखदान का पान सुर्खियों में है और इसके पीछे मेहनत व संकल्प की एक प्रेरक कहानी छिपी है, जिसे यहां की महिलाओं ने गढ़ा है. संगठित होकर पान को आजीविका का मजबूत साधन बना रही वर्ष 2000 से संचालित छुईखदान की मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह ने पान को दोबारा पहचान दिलाने की पहल की है. इस समूह से वर्तमान में 12 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो संगठित होकर पान को आजीविका का मजबूत साधन बना रही हैं. समूह की सचिव आशा मोहबिया बताती हैं कि एक समय छुईखदान का पान बेहद प्रसिद्ध था, लेकिन बाजार और सरकारी प्रोत्साहन के अभाव में इसका उत्पादन और बिक्री दोनों प्रभावित हो गए थे. इससे पान की खेती और उससे जुड़े काम धीरे-धीरे सिमटते चले गए. पहचान और मांग दोनों बढ़ रही इस स्थिति को बदलने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और कृषि महाविद्यालय के सहयोग से महिला समूह ने पान आधारित वैल्यू एडेड उत्पादों पर काम शुरू किया. महिलाओं ने पारंपरिक पान को नए स्वरूप में बाजार तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई. अब महिलाएं घर से ही पान फ्रेश, बीड़ा पान, पान का लड्डू, पान की चाय और पान का पाउडर जैसे कई नवाचार उत्पाद तैयार कर रही हैं. इन उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग के साथ बाजार में उतारा जा रहा है, जिससे इनकी पहचान और मांग दोनों बढ़ रही हैं. पान से बने ये उत्पाद स्वाद में अलग होने के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी माने जाते हैं। पान पाचन क्रिया को बेहतर करने, मुंह की दुर्गंध दूर करने और शरीर को ऊर्जा देने में सहायक माना जाता है. यही वजह है कि पान से बने इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. महिला समूह द्वारा तैयार उत्पादों की सप्लाई अब केवल रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि बॉम्बे और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों तक भी पहुंच चुकी है. वहां से विशेष ऑर्डर के माध्यम से इन उत्पादों की मांग आई, जिसे समूह की महिलाओं ने समय पर पूरा किया. बीते छह महीनों से महिलाएं नियमित रूप से पान से बने उत्पादों का निर्माण कर रही हैं और इससे उन्हें अच्छा आर्थिक लाभ मिलने लगा है. नवंबर माह में राज्योत्सव के दौरान लगाए गए स्टॉल के माध्यम से समूह ने 32 हजार रुपये की बिक्री की. वहीं अब तक लगभग 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हो चुका है. आने वाले समय में उत्पादन और बाजार विस्तार के साथ इस मुनाफे के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. About the Author Amit Singh 7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Raipur,Raipur,Chhattisgarh First Published : January 18, 2026, 22:24 IST Source link

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नौकरी छोड़ना चाहते हैं? बाजार के ये 5 बिजनेस बदल सकते हैं...

Last Updated:January 19, 2026, 13:20 IST बहुत से लोगों का सपना होता है कि वे नौकरी करने के बजाय अपना खुद का व्यापार शुरू करें, लेकिन पूंजी की कमी के कारण यह सपना अधूरा रह जाता है. ऐसे में अगर सही आइडिया और सही जगह मिल जाए, तो कम निवेश में भी अच्छा बिजनेस खड़ा किया जा सकता है. आज हम आपको ऐसे पांच बिजनेस आइडिया के बारे में बताने जा रहे हैं, जो छोटी और कम ट्रैफिक वाली मार्केट के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं और कम लागत में बेहतर कमाई का मौका देते हैं. अगर आप घर पर रहकर और छोटे बाजार में कम लागत में काम शुरू कर कमाई करना चाहते हैं, तो टिफिन सर्विस एक आसान और कारगर तरीका है. इसे घर की महिलाएं भी आसानी से कर सकती हैं. आप अपने घर पर दाल, चावल, रोटी और सब्जी जैसा सादा खाना बनाकर बाजार में काम करने वाले लोगों को टिफिन सर्विस उपलब्ध करा सकती हैं. एक टिफिन में खाना बनाने की लागत लगभग ₹30 आती है, जबकि वही टिफिन ₹50 से ₹60 में बेची जा सकती है. यह महिलाओं के लिए एक बढ़िया विकल्प है. वैसे तो यह एक ऐसा व्यापार है, जिसकी डिमांड साल भर रहती है, क्योंकि लोग पूजा-पाठ पूरे साल करते हैं. लेकिन त्योहारों में इसकी मांग और भी ज्यादा बढ़ जाती है. आप अपने घर पर अगरबत्ती, दिया और पूजन सामग्री बनाकर उसे छोटे-छोटे बाजारों में ले जाकर बेच सकते हैं. इसकी शुरुआत मात्र 10 हजार रुपए से की जा सकती है. आजकल मेकअप और सौंदर्य प्रसाधन लोगों, खासकर महिलाओं का आवश्यक हिस्सा बन चुका है. ऐसे में यदि महिलाएं और लड़कियां चाहें, तो कम पूंजी में ब्यूटी पार्लर खोलकर एक व्यापारिक आधार बना सकती हैं. इससे वे आत्मनिर्भर बन सकती हैं और कई अन्य महिलाओं को रोजगार भी दे सकती हैं. ब्यूटी पार्लर का बिजनेस 50,000 से लेकर ₹1,00,000 की पूंजी में शुरू किया जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google आजकल कोई भी सरकारी योजना हो या कहीं भी कोई काम, ज्यादातर ऑनलाइन और डिजिटल तरीके से किया जा रहा है. ऐसे में आप अपने गांव या छोटे-छोटे बाजार में ऑनलाइन फॉर्म भरकर अच्छी कमाई कर सकते हैं. इसके लिए आप अपने मोबाइल का भी उपयोग कर सकते हैं या फिर जन सुविधा केंद्र खोलकर भी यह काम किया जा सकता है. इसमें आप मोबाइल के जरिए ही लोगों के फॉर्म भरकर उन्हें सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं. अगर आप अपने गांव या शहरी इलाके में किसी छोटे बाजार के आसपास रहते हैं, या आपके पास छोटा बाजार उपलब्ध है, तो आप हेयर कटिंग का काम करके अच्छी कमाई कर सकते हैं. इसके लिए आपको कुछ दिन किसी अनुभवी हेयर कटर के पास जाकर प्रशिक्षण लेना होगा. इसके बाद आप दिन में लगभग ₹1000 तक की कमाई कर सकते हैं. यह एक ऐसा व्यापार है जो कभी बंद नहीं होता और लोगों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने का काम करता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 19, 2026, 13:20 IST Source link

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सरसों के डंठल को फेंकना छोड़िए, जानिए इससे कैसे होगी अच्छी कमाई,...

Last Updated:January 19, 2026, 16:30 IST अगर आप गांव में रहते हैं और कुछ चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं, तो यह आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं धान की भूसी से तेल निकालने जैसी कहावत की. इस समय सरसों की बुवाई हो चुकी है और कुछ ही दिनों में सरसों तैयार हो जाएगी. ऐसे में कई किसान सरसों तो रख लेते हैं, लेकिन उसका डंठल या तो जला देते हैं या फेंक देते हैं, जबकि यही डंठल उनकी कमाई का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है. सुल्तानपुर समेत अवध क्षेत्र में सरसों के डंठल को पिंजी कहा जाता है. यह सरसों के पौधे का सूखा हुआ भाग होता है, जो सरसों अलग करने के बाद बचता है. ऐसे में इसे ज्यादातर किसान कूड़ा समझकर फेंक देते हैं, जबकि यही उनकी कमाई का जरिया बन सकता है और अच्छा मुनाफा दिला सकता है. पिंजी को ही सरसों का डंडा भी कहा जाता है, जो कई तरीकों से कमाई में फायदा देता है. किसान अनिल कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि अगर सरसों के डंठल को व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इससे झाड़ू बनाकर बाजार में बेचा जा सकता है. हालांकि यह झाड़ू अस्थायी होती है, लेकिन बड़े क्षेत्रफल की सफाई के लिए यह काफी उपयोगी मानी जाती है. इसे बाजार में 25 से 30 रुपये प्रति झाड़ू के हिसाब से बेचा जा सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में भूसा, उपले रखने और जानवरों को ठंड से बचाने के लिए टटिया का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में सरसों के डंठल और अरहर के डंठल के मिश्रण से टटिया बनाकर इसे बाजार में बेचा जा सकता है. इसकी कीमत करीब 1000 रुपये प्रति टटिया हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google सरसों के डंठल को ईंट भट्ठों पर सप्लाई कर इससे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. दरअसल, सरसों का डंठल ईंट भट्ठों में ईंट पकाने के काम आता है, क्योंकि कोयले को लपक देने के लिए यह ज्यादा कारगर होता है. बशर्ते इसकी मड़ाई की गई हो और इसे टुकड़ों में काटा गया हो. मड़ाई के बाद इसकी कीमत करीब 800 रुपये प्रति कुंतल तक हो सकती है. अगर आप भी सरसों के डंठल का सही इस्तेमाल नहीं जानते हैं, तो आज हम आपको बताते हैं कि इससे जैविक खाद बनाई जा सकती है. जैविक खाद बनाने के लिए सबसे पहले आपको एक बड़ा और कम गहराई वाला गड्ढा खोदना होगा. उसके बाद उस गड्ढे में सरसों के डंठल को डालें और इसे लगभग 3 इंच मिट्टी से ढक दें. इसके बाद हल्का पानी डाल दें. 2 से 3 महीने बाद जब आप गड्ढा खोदेंगे, तो सरसों का डंठल सड़कर जैविक खाद के रूप में तैयार हो चुका होगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 19, 2026, 13:41 IST Source link

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गांव की मिट्टी में छुपा है पैसा, 1 लाख में शुरू करें...

Last Updated:January 22, 2026, 11:37 IST आज के समय में गांव सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यहां से भी अच्छी कमाई के नए रास्ते निकल रहे हैं. कम पूंजी में शुरू होने वाले छोटे-छोटे बिजनेस गांव के लोगों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं. दूध, खेती, पैकिंग और घरेलू प्रोडक्ट जैसे काम अब घर बैठे शुरू किए जा सकते हैं. सही प्लानिंग और मेहनत से यही छोटे काम आगे चलकर मजबूत कमाई का जरिया बन जाते हैं. गांव में डेयरी शुरू करना सबसे आसान और भरोसेमंद काम है. इसकी शुरुआत आप 2 से 4 गाय या भैंस से कर सकते हैं. सुबह-शाम दूध बेचकर रोज की कमाई होती है. दूध के साथ दही, घी और पनीर भी बनाया जा सकता है. यह बिजनेस सालभर चलता है. आसपास के कस्बों में सप्लाई करने से मुनाफा और बढ़ जाता है. बकरी पालन कम खर्च में शुरू होने वाला बिजनेस है. 10 से 15 बकरियों से शुरुआत की जा सकती है. बकरी का दूध, बच्चे और मीट तीनों बिकते हैं. इसे किसी भी मौसम में शुरू किया जा सकता है. चारे की व्यवस्था गांव में आसानी से हो जाती है. मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए इस काम में कम समय में अच्छा रिटर्न मिलने लगता है. इस टाइम मुर्गी पालन गांव में तेजी से चलने वाला बिजनेस है. इसमें 200 से 500 मुर्गियों से शुरुआत की जा सकती है. इसके अंडे और मीट दोनों की अच्छी डिमांड रहती है और 30 से 40 दिन में ही कमाई शुरू हो जाती है. सही देखभाल और साफ-सफाई से नुकसान कम होता है. शहरों में सप्लाई करने से मुनाफा दोगुना हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google गांव में आटा चक्की की जरूरत हमेशा रहती है. इसके लिए 40 से 60 हजार रुपये में मशीन आ जाती है और आप चाहें तो गेहूं पिसाई के साथ मसाले पीसने का काम भी जोड़ सकते हैं. रोजाना 500 से 1500 रुपये तक की कमाई हो सकती है. यह काम पूरे साल चलता है और इसमें ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती. गांव में अचार, जैम और जूस बनाने का काम घर से ही आसानी से शुरू किया जा सकता है. इसमें लोकल फल और सब्जियों का इस्तेमाल होता है, जिससे लागत कम रहती है. शुरुआत में थोड़ी मात्रा बनाकर आसपास के लोगों और बाजार में बेच सकते हैं. अगर स्वाद अच्छा रहा तो लोग खुद दोबारा खरीदने लगते हैं. त्योहारों और मेलों के समय इसकी बिक्री ज्यादा होती है. धीरे-धीरे पैकिंग सुधारकर शहरों तक भी सप्लाई की जा सकती है. गांव में बीज, खाद और कीटनाशक की दुकान हमेशा चलती है. किसान सीधे जरूरत के हिसाब से खरीदारी करते हैं. थोड़ी जानकारी और सही कंपनी से माल लेकर यह काम शुरू किया जा सकता है. खेती के मौसम में बिक्री ज्यादा होती है. भरोसा बनने के बाद ग्राहक खुद आते हैं और कमाई लगातार होती रहती है. अगर गांव में फल और सब्जी की पैदावार होती है तो उनकी पैकिंग का काम बढ़िया कमाई का जरिया बन सकता है. टमाटर, आलू, नींबू या हरी सब्जियों को अच्छे से धोकर, छांटकर और साफ पैक करके बाजार में बेचा जा सकता है. इसकी शुरुआत बहुत कम खर्च में हो जाती है. जब माल साफ और सही पैक होता है तो ग्राहक भरोसा करते हैं. यही भरोसा शहरों में भी अच्छा दाम दिलाता है. गांव में तुलसी, नीम और आंवला जैसे पौधों की खेती करना मुनाफे वाला काम है. इन पौधों को ज्यादा पानी या खास देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती है, इसलिए खर्च भी कम आता है. एक बार खेत तैयार हो जाए तो सालों तक इनसे फायदा मिलता रहता है. आयुर्वेदिक दवाएं बनाने वाली कंपनियां इन्हें अच्छे दाम पर खरीदती हैं. यही वजह है कि यह खेती आज के साथ-साथ आने वाले समय के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : January 22, 2026, 11:37 IST Source link

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30 रुपये की साड़ी, लाखों का बिजनेस! कमाल है छत्तीसगढ़ के विनय...

Last Updated:February 04, 2026, 12:02 IST Saree Business Idia : रायपुर के पंडरी कपड़ा मार्केट में शादी सीजन के चलते साड़ियों की जबरदस्त मांग बढ़ गई है. यहां 30-35 रुपये से शुरू होने वाली साड़ियां अच्छी क्वालिटी में उपलब्ध हैं. होलसेल बाजार होने के कारण छोटे व्यापारी यहां से सस्ती साड़ियां खरीदकर अपने क्षेत्रों में बेचकर बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. बाजार सुबह 9:30 से रात 10 बजे तक खुला रहता है. Saree Business Idia : छत्तीसगढ़ में शादी का सीजन एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुका है और इसके साथ ही बाजारों में रौनक लौट आई है. रायपुर के पंडरी इलाके में स्थित ऐतिहासिक कपड़ा मार्केट इन दिनों ग्राहकों की पहली पसंद बना हुआ है. यहां साड़ियां मात्र 30 से 35 रुपये की शुरुआती कीमत में उपलब्ध हैं, जो पूरे छत्तीसगढ़ में कहीं और इतनी सस्ती दर पर नहीं मिलतीं. कम दाम में भी अच्छी क्वालिटी की साड़ियांपंडरी कपड़ा मार्केट के साड़ी व्यापारी विनय जैन ने बताया कि कम कीमत का मतलब यह नहीं है कि क्वालिटी से समझौता किया गया है. यहां कम दाम में भी अच्छी क्वालिटी की साड़ियां मिल जाती हैं. जैसे-जैसे ग्राहक अधिक कीमत वाली साड़ियों की ओर बढ़ते हैं, उन्हें और बेहतर डिजाइन व कपड़े की क्वालिटी मिलती है. यही वजह है कि इस बाजार में हर महीने साड़ियों की लगातार मांग बनी रहती है. विनय जैन के अनुसार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में साड़ी का विशेष महत्व है. यहां की महिलाएं पारंपरिक रूप से साड़ी पहनना पसंद करती हैं, विशेषकर विवाह, पूजा-पाठ और सामाजिक आयोजनों में. शादी के सीजन की शुरुआत होते ही बाजार में ग्राहकों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो जाती है. पसंद के अनुसार चयन करने में आसानीउन्होंने बताया कि यहां उपलब्ध साड़ियां 8 से 10 रंगों में आती हैं, जिससे ग्राहकों को अपनी पसंद के अनुसार चयन करने में आसानी होती है. पंडरी मार्केट की खासियत यह है कि यहां अधिकतर दुकानें थोक विक्रेता (होलसेल) हैं. छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के व्यापारी यहां से कम कीमत में साड़ियां खरीदकर अपने इलाकों में खुदरा बिक्री करते हैं. जो लोग साड़ियों का व्यापार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए पंडरी कपड़ा मार्केट सबसे उपयुक्त विकल्प माना जाता है. कम पूंजी में व्यापार शुरू करने की सुविधा यहां मौजूद है. दुकानें सुबह साढ़े 9 बजे से रात 10 बजे तक खुली रहती हैं, जिससे ग्राहकों और व्यापारियों दोनों को पर्याप्त समय मिलता है. विनय जैन ने बताया कि इच्छुक व्यापारी उनसे मोबाइल नंबर 9981299492 पर संपर्क कर सकते हैं. शादी सीजन के चलते इन दिनों बाजार में भारी भीड़ देखी जा रही है और साड़ियों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. पंडरी कपड़ा मार्केट न केवल रायपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में साड़ी व्यापार का प्रमुख केंद्र बन चुका है. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Raipur,Raipur,Chhattisgarh First Published : February 04, 2026, 12:02 IST Source link

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अब वेंडरों को नहीं जाना पड़ेगा साहूकार के पास, छत्तीसगढ़ सरकार दे...

X अब वेंडरों को नहीं जाना पड़ेगा साहूकार के पास, छत्तीसगढ़ सरकार दे रही पैसा   Street vendors loan scheme : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पीएम स्वनिधि योजना से जुड़े स्ट्रीट वेंडरों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब पात्र पथ विक्रेताओं को बिना ब्याज ₹30,000 तक की रुपे क्रेडिट कार्ड सुविधा मिलेगी, जिससे छोटे कारोबार को बढ़ाने और आपात जरूरतों में मदद मिलेगी. नगर निगम ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. दूसरे चरण का ऋण चुका चुके हितग्राहियों को पहले ₹10,000 की लिमिट मिलेगी, जो समय पर भुगतान करने पर ₹30,000 तक बढ़ाई जाएगी. 45 दिनों में भुगतान करने पर कोई ब्याज नहीं लगेगा, जिससे वेंडरों की आर्थिक मजबूती बढ़ेगी. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। Source link

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