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Chanakya Niti Parenting Tips: बच्चों को आत्मविश्वास से भरपूर, समझदार और सफल बनाने के लिए माता-पिता को आचार्य चाणक्य के 6 महामंत्रों को अपनी परवरिश में शामिल करना चाहिए. ये मंत्र बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होंगे और उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करेंगे. चाणक्य नीति के ये सिद्धांत बच्चों को सही दिशा देंगे और उन्हें एक बेहतर इंसान बनने में मदद करेंगे.
Chanakya Niti Parenting Tips: हर भारतीय माता-पिता के पास बच्चे के भविष्य को मजबूत करने के लिए एक लिस्ट होती है, जिसमें अच्छा स्कूल, अतिरिक्त ट्यूशन, प्रतियोगी परीक्षाएं, शनिवार को खेलकूद की क्लास, रविवार को कला की क्लास आदि चीजें. हम अपने बच्चों के भविष्य के निर्माण में अपना सब कुछ लगा देते हैं, फिर भी किसी ना किसी तरह, सबसे महत्वपूर्ण चीजें कभी लिस्ट में शामिल नहीं हो पातीं. वे चीजें जो वास्तव में यह निर्धारित करेंगी कि वह बच्चा भविष्य में एक अच्छा इंसान, वफादार दोस्त, भरोसेमंद सहकर्मी या समझदार एडल्ट बनेगा या नहीं. विद्वान, रणनीतिकार और दार्शनिक आचार्य चाणक्य ने बहुत पहले ही इस संदर्भ में अपनी नीति में लिख दिया था. इस नीति के माध्यम से आप ना केवल बच्चे का भविष्य मजबूत करेंगे बल्कि एक अच्छे और सच्चे इंसान के तौर पर मजबूत भी बनाएंगे. आइए चाणक्य नीति के माध्यम से जानते हैं आत्मविश्वासी और सफल बच्चे का पालन-पोषण माता-पिता को कैसा करना चाहिए…
आचार्य चाणक्य नीति में कहते हैं कि अपने बच्चे को बताएं कि दोस्ती में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और जो दोस्त बने हैं, उनमें क्या देखना चाहिए. चाणक्य का मानना था कि एक व्यक्ति की संगति ही उसके चरित्र को लगभग किसी भी अन्य चीज से अधिक आकार देती है. बच्चे सिर्फ अपने दोस्तों के साथ दोपहर का भोजन और मजाक शेयर नहीं करते हैं. वे उनके दृष्टिकोण, भाषा, आदत और समय के साथ उनके मूल्यों को आत्मसात भी करते हैं. आप अपने बच्चे के लिए दोस्त चुनने के बजाय, उन्हें चुनना सिखाएं. उन्हें यह पहचानने में मदद करें कि उन दोस्तों के बीच क्या अंतर है जो सही मार्ग पर लेकर जाते हैं या वे दोस्त जो उन्हें कहीं और ले जाते हैं जहां वे नहीं जाना चाहते. ईमानदारी, वफादारी और सच्ची दयालुता, ये वे गुण हैं जिन्हें एक दोस्त में देखना चाहिए, ना कि लोकप्रियता या सोशल मीडिया फॉलोअर्स.
आज हम ऐसी डिजिटल दुनिया में रह रहे हैं, जहां सफलता लाइक, फॉलोअर्स और ट्रेंडिंग मोमेंट्स पर निर्भर करती है. बच्चे इस दुनिया में बड़े हो रहे हैं और उनमें से कई बिना एहसास किए इसके मूल्यों को आत्मसात कर रहे हैं. चाणक्य इन मामलों में स्पष्ट थे कि एक व्यक्ति का चरित्र उसकी सबसे बड़ी और स्थायी शक्ति है. जो बच्चा ईमानदारी, जिम्मेदारी और दयालुता सीखता है, उसको आगे जाने से कोई नहीं रोक सकता. अपने बच्चे से बात करें कि एक अच्छा इंसान होने का वास्तव में क्या मतलब है, सिर्फ एक सफल इंसान नहीं. दोनों एक ही चीज नहीं हैं.
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आजकल बच्चे सब कुछ ऑनलाइन शेयर करते हैं, चाहें फिर वह कहां रहते हैं, फीलिंग्स, पिक्चर, ओपिनियन तक शेयर करते हैं. उनमें से कई बच्चों को तो यह भी नहीं पता होता है कि क्या शेयर करना चाहिए और किसके साथ. ऐसे में माता-पिता का फर्ज है कि बच्चे को प्राइवेसी का मूल्य सिखाएं. उन्हें यह समझने में मदद करें कि क्या शेयर करना चाहिए और क्या नहीं. यह एक सेल्फ-प्रोटेक्टिव और इंटेलिजेंट कदम है. यह एक ऐसी आदत है जो उन्हें अपने पूरे जीवन में इमोशनल और मेंटली रूप से सेफ रखेगी.
आजकल बच्चे जल्दी प्रतिक्रिया करते हैं. जब वे गुस्से, उत्साहित या आहत होते हैं तो विचार आने से पहले उनके शब्द निकल जाते हैं. चाणक्य कहते हैं कि माता-पिता बच्चों को बताएं कि शब्दों की क्या अहमियत है, एक बार कहे जाने के बाद, शब्दों को वापस नहीं लिया जा सकता. चाणक्य की बुद्धिमत्ता यहां सरल और कालातीत है कि कुछ भी बोलने से पहले रुकें. वे अपने बच्चे को खुद से पूछना सिखाएं, क्या यह सच है? क्या इससे किसी को परेशानी होगी? क्या यह आवश्यक है? तीन प्रश्न, बस कुछ सेकंड के. आज के दौर में जहां हर पल रिश्ते बदल जाते हैं, वहां किसी भी रिलेशन को लंबे समय तक रहना बहुत बड़ी बात है. ऐसे में जो बच्चे बोलने से पहले सोचना सीखते हैं, वे एडल्ट होने पर कामयाबी प्राप्त करते हैं और हर किसी के प्रिय भी होते हैं.
आज कल हर बच्चा तुरंत जीतना चाहता है. हर माता-पिता अपने बच्चे को सफल होते देखना चाहते हैं. लेकिन चाणक्य ने अपनी नीति में ऐसा बता दिया, जिसकी मॉडर्न साइकोलॉजी ने बाद में पुष्टि भी की है. चाणक्य कहते हैं कि किसी भी बच्चे के लिए अनुशासन और लगातार प्रयास उपलब्धि के वास्तविक आधार होते हैं. अंक ऊपर-नीचे हो सकते हैं. प्रतियोगिताएं जीती और हारी भी जा सकती हैं. लेकिन जो बच्चा फिर भी खड़ा रहता है, फिर से कोशिश करता है और असफलता को हार के बजाय जानकारी के रूप में मानना सीखता है, वह उस बच्चे से आगे जाएगा जो हमेशा शानदार था. माता-पिता हमेशा बच्चे के परिणाम के सामने प्रयास की प्रशंसा करें. यह बच्चे को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाएगा और आगे बढ़ने के लिए प्रयास करेगा.
चाणक्य नीति की सीख को आज के समय से जोड़कर देखें तो यह बात बेहद महत्वपूर्ण लगती है कि हम अपने बच्चों को पढ़ाई, करियर और सफलता के लिए तो तैयार कर रहे हैं, लेकिन उनकी भावनाओं को समझने और संभालने के लिए उतना तैयार नहीं कर रहे. आज की पीढ़ी बुद्धिमान, अच्छी तरह शिक्षित और अपने भविष्य को लेकर जागरूक भी है. लेकिन कई बार भावनात्मक परिस्थितियों का सामना करते समय वह खुद को अकेला महसूस करती है. इसकी वजह यह नहीं है कि बच्चों में कोई कमी है, बल्कि कई बार उन्हें बचपन से ही अपनी भावनाएं व्यक्त करने की पर्याप्त आजादी नहीं मिलती. जब बच्चा गुस्सा करता है तो हम उसे चुप करा देते हैं, डरता है तो कहते हैं कि डरने की जरूरत नहीं, दुखी होता है तो उसका ध्यान किसी दूसरी चीज में लगाने की कोशिश करते हैं. धीरे-धीरे बच्चा यह सीखने लगता है कि गुस्सा, डर, ईर्ष्या, निराशा या दुख जैसी भावनाएं दिखाना गलत है. जबकि सच्चाई यह है कि ये सभी भावनाएं इंसानी जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं. माता-पिता बच्चों को बताएं कि मैच्योरिटी और शालीनता के साथ फीलिंग्स को कैसे संभालना चाहिए.