धनबाद15 मिनट पहले
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धनबाद के हीरापुर स्थित चिल्ड्रेन पार्क में इस बार काली पूजा पर श्रद्धालुओं को अनोखा पंडाल देखने को मिलेगा। झरनापाड़ा पार्क मार्केट श्रीश्री श्यामा पूजा समिति की ओर से आयोजित पूजा का यह 47वां साल है। इस बार पंडाल को बर्ड सैंक्चुरी यानी पक्षी अभयारण्य की थीम पर तैयार किया जा रहा है। इसमें देश-विदेश के रंग-बिरंगे पक्षियों की दुनिया दिखाई जाएगी। पंडाल में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को पक्षियों के प्राकृतिक आवास जैसा माहौल मिलेगा।

पूजा के 47वें वर्ष को यादगार बनाने के लिए समिति ने इस बार पारंपरिक सजावट से अलग पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी थीम चुनी है।
अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों की आकृतियों और सजावट के जरिए अभयारण्य का स्वरूप तैयार किया जा रहा है। समिति का प्रयास है कि मां काली के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं को एक अलग अनुभव भी मिले। खासकर बच्चों के लिए यह पंडाल आकर्षण का केंद्र बनेगा। पूजा के 47वें वर्ष को यादगार बनाने के लिए समिति ने इस बार पारंपरिक सजावट से अलग पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी थीम चुनी है।
प्रवेश द्वार पर बनेगा लंबा मोबाइल टावर
पंडाल का सबसे खास आकर्षण इसका प्रवेश द्वार होगा। यहां एक लंबा मोबाइल टावर बनाया जा रहा है। इसके जरिए पक्षियों के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को दर्शाया जाएगा। थीम में बताया जाएगा कि मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन और पर्यावरण में हो रहे बदलाव का पक्षियों पर किस तरह असर पड़ सकता है।

पक्षियों की घटती संख्या और उनके प्राकृतिक आवास में आ रहे बदलाव को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
पक्षियों की घटती संख्या और उनके प्राकृतिक आवास में आ रहे बदलाव को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसके माध्यम से लोगों को पक्षियों के संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। समिति का मानना है कि धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों को जोड़ना जरूरी है।
पंडाल की सजावट में भी इसी संदेश को प्रमुखता दी जा रही है। श्रद्धालु यहां मां काली के दर्शन के साथ पक्षियों के संरक्षण और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का संदेश भी लेकर लौटेंगे।

यहां मां काली के दर्शन के साथ पक्षियों के संरक्षण और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का संदेश भी लेकर लौटेंगे।
प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार हो रहा इको फ्रेंडली पंडाल
इस बार पंडाल निर्माण में पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए जूट, बांस की टोकरी, मिट्टी के मटके और हुगला पत्तों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्राकृतिक चीजों से पंडाल को आकर्षक रूप दिया जा रहा है। साथ ही ग्रामीण परिवेश की झलक भी दिखाई जाएगी। पंडाल निर्माण पर करीब 12 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
वहीं, पूरे काली पूजा आयोजन का बजट लगभग 20 लाख रुपए निर्धारित किया गया है। समिति के सदस्यों के अनुसार, पंडाल निर्माण और विद्युत सज्जा का काम अंतिम चरण में है। तैयारियों को समय पर पूरा करने के लिए कारीगर लगातार जुटे हैं। इस बार पूजा में भव्य सजावट के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मुख्य आकर्षण रहेगा।
