शिमला: हिमाचल प्रदेश की सत्ता में काबिज कांग्रेस पार्टी को नगर निगम चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है. बीजेपी ने चार में से तीन नगर निगमों पर अपना सीधा कब्जा जमा लिया है. सोलन, मंडी और धर्मशाला में बीजेपी ने स्पष्ट और बड़ा बहुमत हासिल किया है. कांग्रेस पार्टी केवल पालमपुर नगर निगम को ही बचा पाने में किसी तरह सफल रही है. यह चुनावी नतीजे सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के लिए एक बड़े खतरे की घंटी की तरह हैं. इन चुनावों को शहरी वोटरों के मूड का एक बड़ा पैमाना माना जाता है. इसे 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले का एक साफ संकेत माना जा रहा है.
सोलन में हेल्थ मिनिस्टर के इलाके में कैसे हारी कांग्रेस?
- सोलन नगर निगम चुनाव के नतीजे राजनीतिक पंडितों को हैरान करने वाले हैं. यहां कुल 17 वार्ड हैं जिनमें से बीजेपी ने 10 पर शानदार जीत दर्ज कर ली है. कांग्रेस पार्टी केवल छह सीटों पर ही सिमट कर रह गई है.
- एक सीट पर निर्दलीय कैंडिडेट ने बाजी मारी है. इस बड़ी जीत को हिमाचल बीजेपी अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल के लिए बहुत बड़ा बूस्ट माना जा रहा है.
- राजीव बिंदल इसी इलाके से ताल्लुक रखते हैं और सोलन में उनका बहुत गहरा राजनीतिक प्रभाव है. दूसरी तरफ यह परिणाम कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी शर्मिंदगी की बात है. हेल्थ मिनिस्टर धनी राम शांडिल सोलन से ही कांग्रेस के विधायक हैं.
- उनके अपने क्षेत्र में कांग्रेस की इस करारी हार से पार्टी के अंदर खलबली मच गई है. यह हार बताती है कि लोकल लेवल पर सत्ता विरोधी लहर काम कर रही थी.
मंडी में जयराम ठाकुर ने कैसे दिखाया अपना पुराना जलवा?
मंडी नगर निगम के फाइनल रिजल्ट ने यह साबित कर दिया है कि वहां जयराम ठाकुर का मैजिक अभी भी कायम है. मंडी में कुल 15 वार्ड हैं जिनमें से 14 पर वोटिंग हुई थी. बीजेपी ने यहां पूरी तरह से अपना दबदबा दिखाते हुए 12 वार्ड जीत लिए हैं.
- कांग्रेस और एक निर्दलीय के खाते में यहां सिर्फ एक-एक सीट ही आ पाई है. पूर्व सीएम और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का यह अपना गृह जिला है. मंडी को हमेशा से उनका सबसे मजबूत सियासी गढ़ माना जाता रहा है.
राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद बीजेपी का ऐसा दमदार प्रदर्शन बहुत कुछ कहता है. जयराम ठाकुर ने इस शानदार जीत पर खुशी जाहिर की है.
जयराम ठाकुर ने कहा, ‘सीएम सुक्खू ने बड़े वादे करके वोटरों को लुभाने की भरपूर कोशिश की लेकिन जनता ने उन्हें पूरी तरह से नकार दिया’.
धर्मशाला में सुधीर शर्मा का दांव कांग्रेस पर क्यों पड़ा भारी?
सुधीर शर्मा 2024 के बहुचर्चित राज्यसभा चुनाव विवाद के बाद कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. इसके बाद उन्होंने उपचुनाव में भी धर्मशाला विधानसभा सीट जीत ली थी. अब नगर निगम चुनाव में भी उनके नेतृत्व में बीजेपी का झंडा लहरा गया है. यह कांग्रेस के लिए कांगड़ा क्षेत्र में बड़ा डेंट है.
पालमपुर में किस रणनीति से बच गई सत्ताधारी कांग्रेस की लाज?
- चार महत्वपूर्ण नगर निगमों में से कांग्रेस पार्टी सिर्फ पालमपुर में ही खुद को बचा पाई. यहां के 15 वार्डों में से कांग्रेस ने 11 वार्ड जीतकर अपना बहुमत आसानी से हासिल किया है. बीजेपी को यहां सिर्फ चार वार्डों से ही संतोष करना पड़ा है.
- तमाम राजनीतिक जानकार इस जीत का पूरा क्रेडिट स्थानीय कांग्रेस विधायक आशीष बुटेल को दे रहे हैं. उनका पर्सनल प्रभाव और मजबूत जमीनी संगठन इस जीत की सबसे बड़ी वजह बना है.
- एक स्थानीय कांग्रेस नेता ने इस जीत पर कहा, ‘पालमपुर में यह चुनाव कांग्रेस बनाम बीजेपी नहीं था बल्कि यह आशीष बुटेल बनाम बीजेपी था’. यह आशीष बुटेल के लिए एक बहुत बड़ी व्यक्तिगत जीत मानी जा रही है.
पूरे हिमाचल राज्य में हार की खबरों के बीच सिर्फ इसी इलाके से सत्ताधारी कांग्रेस को थोड़ी राहत मिली है.
हिमाचल में 2027 के चुनाव पर इस रिजल्ट का क्या होगा असर?
इन नगर निगम चुनाव नतीजों का असर सिर्फ लोकल बॉडी तक सीमित नहीं रहने वाला है. साल 2027 के हिमाचल विधानसभा चुनाव के लिए इसे एक अलार्मिंग बेल कहा जा सकता है. एक सीनियर कांग्रेस नेता ने अपनी हार स्वीकार करते हुए बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा, ‘सत्ता में होने के बावजूद यह हार हमारे लिए सच में बहुत बड़ा झटका है’. पिछली बार जब राज्य में बीजेपी की सरकार थी तो कांग्रेस ने सोलन और पालमपुर में जीत हासिल की थी.
अब कांग्रेस पार्टी में इस हार के कारणों को खोजने के लिए जल्द ही एक बड़ी रिव्यू मीटिंग होने वाली है. दूसरी ओर इन नतीजों ने बीजेपी के कैडर और कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी है. बीजेपी अब इस विनिंग मोमेंटम को 2027 के विधानसभा चुनाव तक ले जाना चाहेगी. कांग्रेस को अपनी रणनीतियों और वादों का दोबारा एनालिसिस करना होगा ताकि आने वाले चुनावों में ऐसी बुरी हार से बचा जा सके.