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Indian Army Logistics Drones: भारतीय सेना अब हिमालय की दुर्गम चोटियों पर तैनात सैनिकों तक रसद पहुंचाने के लिए एडवांस्ड लॉजिस्टिक्स ड्रोन का इस्तेमाल करने जा रही है. यह ड्रोन पुराने हो चुके चीता हेलीकॉप्टर्स और पैदल राशन ले जाने की मजबूरी को खत्म कर देंगे. मेक इन इंडिया के तहत बने एयर हंस और येती जैसे ड्रोन 18 हजार फीट की ऊंचाई पर भारी वजन उठाकर उड़ान भर सकते हैं.
हिमालय की चोटियों पर राशन पहुंचाएंगे लॉजिस्टिक्स ड्रोन. (सांकेतिक तस्वीर : AI)
नई दिल्ली: भारतीय सेना अब हिमालय के दुर्गम इलाकों में अपनी ताकत को कई गुना बढ़ाने जा रही है. लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की खतरनाक चोटियों पर तैनात जवानों तक रसद पहुंचाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है. अभी तक इसके लिए पुराने हो चुके चीता हेलीकॉप्टर या फिर पैदल सैनिकों का सहारा लिया जाता था. हेलीकॉप्टर मिशन बहुत महंगे होते हैं और खराब मौसम में उड़ान नहीं भर पाते हैं. पैदल सामान ले जाने में बहुत ज्यादा समय और मेहनत लगती है. इसी समस्या को खत्म करने के लिए भारतीय सेना अब खतरनाक लॉजिस्टिक्स ड्रोन का सहारा ले रही है. यह ड्रोन बेहद कम खर्च में और बहुत तेजी से जरूरी सामान बॉर्डर पर पहुंचा सकते हैं. सेना को ऐसे ड्रोन चाहिए जो 18 हजार फीट की ऊंचाई पर 20 से 40 किलोग्राम का वजन उठाकर आसानी से उड़ान भर सकें.
एयर हंस और येती ड्रोन में ऐसी क्या खासियत है?
भारतीय कंपनियों ने सेना की इस जरूरत को पूरा करने के लिए शानदार ड्रोन बनाए हैं. बॉनवी एयरो कंपनी का एयर हंस ड्रोन 20 किलोग्राम का वजन उठा सकता है. यह ड्रोन 12 किलोमीटर की रेंज में 16,500 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है.
दूसरी तरफ आइडियाफोर्ज कंपनी ने येती ड्रोन तैयार किया है. यह ड्रोन बेहद खराब मौसम में भी काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह 50 से 200 किलोग्राम तक का वजन उठा सकता है और 6,500 मीटर की ऊंचाई तक जा सकता है. यह स्वदेशी तकनीक सेना के लिए लाइफलाइन साबित होने वाली है.
हिम-ड्रोन-ए-थॉन से सेना को क्या फायदा होने वाला है?
सेना ने देश के अंदर ड्रोन बनाने वाली कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए हिम-ड्रोन-ए-थॉन जैसी प्रतियोगिताओं की शुरुआत की है. इसके तहत 4,000 से 5,000 मीटर की वास्तविक ऊंचाई पर ड्रोन का ट्रायल किया गया है. इसमें लॉजिस्टिक्स, सर्विलांस और स्वाम ड्रोन तकनीक का शानदार प्रदर्शन हुआ है.
लेह में आयोजित हिमटेक इवेंट ने लद्दाख को डिफेंस इनोवेशन का बड़ा हब बना दिया है. मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत बने यह ड्रोन अब चीन सीमा पर भारतीय सैनिकों की ताकत को दोगुना कर देंगे. स्वायत्त हवाई नेटवर्क से अब माइनस डिग्री तापमान में भी सप्लाई नहीं रुकेगी.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) की गिनती हिंदी डिजिटल मीडिया के तेजी से उभरते चेहरों में होती है. वह News18हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज़ एडिटर की भूमिका में जुड़े हैं. प्रिंट से डिजिटल का रुख करने वाले दीपक के पास पत्र…और पढ़ें