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JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही CID ने बड़ी कार्रवाई की है। चतरा के पत्थलगड्डा प्रखंड में पदस्थापित प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) तेजनारायण पंडित को हिरासत में लिया। टीम उन्हें पत्थलगड्डा से चतरा लेकर पहुंची, जहां सदर थाना में उनसे पूछताछ की गई। तेजनारायण पंडित मूल रूप से गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड क्षेत्र के रहने वाले हैं। वहीं CID ने TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी को भी गिरफ्तार किया। यह इस साल सीजीएल मामले में पहली गिरफ्तारी बताई गई है। दोनों भेजे जाएंगे जेल, होगी पूछताछ सुषमा ने सीजीएल पास कर सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के रूप में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग में पद हासिल किया था। अक्षय महिला एवं बाल विकास विभाग में था और उसने जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा पीटी भी पास की थी। अब दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जाएगा। भर्ती घोटाले में कुल गिरफ्तारियां 24 हो चुकी हैं, जिनमें 22 जेपीएससी 14वीं पीटी और दो जेएसएससी-सीजीएल से जुड़ी हैं। सीआईडी दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। अभय के खिलाफ सीआईडी थाने में 1 जनवरी 2025 को कांड संख्या 01/2025 दर्ज हुआ था। JSSC सचिव से पूछा – अभय तिवारी ने कैसे की एंट्री इधर, सीआईडी ने जेएसएससी सचिव सुधीर गुप्ता से लगातार पूछताछ की। एजेंसी यह जानना चाहती है कि जब सीजीएल परीक्षा किसी दूसरी एजेंसी ने संचालित की, तब अभय तिवारी और उसके सिंडिकेट ने इसमें सेंध कैसे लगाई। परीक्षा एजेंसी को काम कैसे मिला, किसके कार्यकाल में आवंटन हुआ, कंपनी ने परीक्षा से जुड़े कौन-कौन से काम किए और उसकी जांच हुई या नहीं। पीजीटी शिक्षक भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में भी जेएसएससी कार्यालय पर छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। जांच में रिमोट एक्सेस के जरिए अभ्यर्थियों को पास कराने की बात सामने आई है। अभ्यर्थी एक कंप्यूटर पर परीक्षा देते थे, जबकि दूसरे कमरे में सॉल्वर गैंग रिमोट से कंप्यूटर संचालित कर सवाल हल करता था। अभय तिवारी के खुलासे के बाद कार्रवाई तेज हुई है। 1750 ओएमआर की होगी जांच इधर जेपीएससी 14वीं पीटी के आरोपी मनोज कुमार, रौशन केरकेट्टा और उमाकांत उरांव को सीआईडी ने पांच दिन की रिमांड पर लिया है। उनसे सेटिंग नेटवर्क, बिचौलियों, ओएमआर में हेराफेरी और लेनदेन को लेकर पूछताछ होगी। 2204 सफल अभ्यर्थियों में 1750 ने ओएमआर कार्बन कॉपी दी है, जिसका मूल प्रति से मिलान चल रहा है और जांच दो दिन में पूरी होने की उम्मीद है। कॉपी नहीं देने वाले 454 अभ्यर्थी भी सीआईडी के रडार पर हैं।
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